अंकिता भंडारी परिवार ने ठुकराई सीएम की पेशकश, CBI जांच से नाराज, कांग्रेस का प्रदर्शन

19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास पौड़ी गढ़वाल स्थित वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। आरोप है कि अंकिता पर किसी वीआईपी मेहमान को विशेष सेवा देने के लिए दबाव डाला गया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: क्या एक गरीब की बेटी का खून इतना सस्ता है कि सत्ता के रसूख के आगे उसे भुला दिया जाए? क्या बेटी बचाओ का नारा सिर्फ चुनावी रैलियों तक सीमित है? यह सवाल इसलिए क्योंकि उत्तराखंड की वादियों में गूंजती अंकिता भंडारी की चीखें आज भी इंसाफ मांग रही हैं।

एक तरफ वो परिवार है जिसने अपनी लाड़ली को खोया, और दूसरी तरफ वो सिस्टम है जो एक वीआईपी का नाम बताने से कतरा रहा है। बड़ी खबर यह है कि कल सीबीआई जांच के लिए पुष्कर सिंह धामी सरकार ने प्रस्ताव किया है, उसको भी अंकिता भंडारी के परिवार ने न सिर्फ ठुकरा दिया है बल्कि गंभीर आरोप भी लगाए हैं, क्यों अंकिता भंडारी के परिवार ने सीबीआई जांच की पेशकश को ठुकरा दिया है। कैसे सीबीआई जांच में भी सरकार पर वीआईपी को बचाने के आरोप लग रहे हैं,

19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास पौड़ी गढ़वाल स्थित वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। आरोप है कि अंकिता पर किसी वीआईपी मेहमान को विशेष सेवा देने के लिए दबाव डाला गया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था। इसी विवाद के चलते 18 सितंबर 2022 को रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो साथियों (सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता) ने अंकिता को चीला नहर में धक्का देकर मार डाला। उनका शव 24 सितंबर को बरामद हुआ था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, मई 2025 में उत्तराखंड की एक सत्र अदालत ने पुलकित आर्य और उसके दोनों सहयोगियों को हत्या का दोषी पाया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। लेकिन परिवार इससे बहुत खुश नहीं था, परिवार शुरु से यह डिमांड कर रहा था कि घटना में जिस वीआईपी का नाम आया था उसको क्यों छिपाया जा रहा है।

हालांकि हाल ही में जनवरी 2026 की शुरुआत में सहारनपुर की अभिनेत्री उर्मिला सनोवार से जुड़े एक ऑडियो लीक ने मामले को फिर से गरमा दिया। इस ऑडियो में पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की कथित बातचीत सुनाई देती है, जिसमें अंकिता हत्याकांड में एक ‘वीआईपी’ के शामिल होने का जिक्र है। इस लीक के बाद पूरे उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच और उस ‘वीआईपी’ की पहचान की मांग की। इन विरोध प्रदर्शनों के दबाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 7 जनवरी 2026 को अंकिता के माता-पिता विरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी से मुलाकात की। इसके दो दिन बाद यानी 9 जनवरी 2026 को राज्य सरकार ने सीबीआई जांच का आदेश जारी किया। सीएम धामी ने कहा कि वे अंकिता को सिर्फ पीड़िता नहीं, बल्कि बहन और बेटी की तरह मानते हैं और न्याय सुनिश्चित करना उनकी सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

हालांकि एक ओर जहां सीएम धामी ने अंकिता के परिवार से मिलकर सीबीआई जांच का ऐलान किया है तो दूसरी ओर एक बार फिर से अंकिता का परिवार इस जांच से खुश नहीं बताया जा रहा है। परिवार का कहना है कि सरकार का आदेश अधूरा है, क्योंकि इसमें सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में जांच का कोई जिक्र नहीं है और न ही कथित ‘वीआईपी’ के बारे में कोई स्पष्टीकरण दिया गया है। अंकिता के पिता विरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा, “हमें सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में सीबीआई जांच चाहिए। लेकिन सीएम ने कहीं भी इसका जिक्र नहीं किया है।”मां सोनी देवी ने इसे और साफ करते हुए कहा, “आदेश अधूरा है और आंदोलन अभी भी जारी है। यह आदेश सतही है। हमारी मांगें पूरी नहीं हुई हैं।”

पूरे प्रदेश में कई दिनों से बहुत बड़ा आंदोलन चल रहा था और यहां तक कि सीएम धाामी के आवास पर भी हजारों की संख्या में लोग पहुंचे थे, माना जा रहा था कि सीबीआई जांच के आदेश के बाद ये मामला रुकेगी लेकिन जिस तरह से परिवार ने एक बार फिर सीबीआई जांच के आदेश में खमियां बताई हैं उसको लेकर जनता में आक्रेाश उभर सकता है। आज ही कांग्रेस की ओर से प्रदर्शन किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि सीबीआई जांच में वीआईपी का नाम नहीं है। ऐसे में वीआईपी को एक्ट्रा सर्विस देने का मामला गरमाया हुआ है, सरकार कह रही है कि हमने जांच का आदेश कर दिया है लेकिन सवाल है कि सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में क्यों नहीं। क्यों वीआईपी के नाम नहीं है जिनको एक्ट्रा सर्विस देने की बात चल रही थी।

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि अंकिता की डायरी और उसके दोस्तों से हुई बातचीत इस खौफनाक हकीकत को पहले ही बयां कर चुकी है। रिजॉर्ट का मालिक पुलकित आर्य जो एक पूर्व भाजपा नेता का बेटा है, अंकिता पर दबाव डाल रहा था। एक्सट्रा सर्विस देने का। ये एक्स्ट्रा सर्विस क्या थी, ये समझने के लिए किसी रॉकेट साइंस की जरूरत नहीं है। एक 19 साल की बच्ची को देह व्यापार के दलदल में धकेलने की कोशिश की गई। लेकिन अंकिता ने झुकने से मना कर दिया। उसने अपनी गरिमा चुनी, और बदले में उसे मौत मिली। सवाल ये है कि वो कौन सा रसूखदार वीआईपी था जिसके लिए अंकिता पर दबाव बनाया जा रहा था? धामी सरकार उस नाम को उजागर करने से क्यों डर रही है?

सवाल यह है कि रिजॉर्ट के उस कमरे को क्यों ढहाया गया जहाँ अंकिता रहती थी? क्या वहां कोई ऐसे सबूत थे जो सत्ताधारी दल के किसी बड़े चेहरे को बेनकाब कर सकते थे? क्यों जांच सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश के अंडर में नहीं कराने का आदेश जारी हुआ। ये सवाल हैं जो न सिर्फ अंकिता के परिवार के मन में उठ रहे हैं बल्कि जनता इन्हीं सवालों को लेकर पहले भी सडको पर थी और अब सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न होने पर सवाल खड़ा हो रहा हें

कहते हैं कि जब सिस्टम सो जाता है, तो सड़कों को जागना पड़ता है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर पूरे प्रदेश में मोर्चा खोल दिया है। जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं, पुतले फूंके जा रहे हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि ये सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटी की अस्मत और उत्तराखंड के स्वाभिमान पर हमला है। राजधानी देहरादून से लेकर श्रीनगर तक, हर जगह एक ही गूंज है- अंकिता के हत्यारों को फांसी दो और वीआईपी का नाम बताओ!

हैरानी की बात देखिए, सीबीआई जांच के आदेश के बाद मामला धमता नहीं दिख रहा है पहले ही गवाहों को डराने-धमकाने के आरोप लग रहे हैं। परिवार का कहना है कि उन्हें मिलने वाली सुरक्षा सिर्फ दिखावा है। सरकार ने मदद की पेशकश की, लेकिन परिवार के लोगों ने इसको ठुकरा दिया। परिवार का कहना है कि उनको नाौकरी या पैसा नहीं चाहिए। उन्हें वो संतुष्टि चाहिए कि उनकी बेटी के असली गुनहगार जेल की सलाखों के पीछे हैं।

अंकिता भंडारी सिर्फ पौड़ी या उत्तराखंड की की बेटी नहीं थी, वो इस देश की हर उस लड़की की आवाज थी जो अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है। उसकी हत्या ने ये साबित कर दिया कि सत्ता और रसूख के गठजोड़ में आज भी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। अगर आज अंकिता को न्याय नहीं मिला, तो भविष्य में कोई भी मां-बाप अपनी बेटी को काम करने के लिए बाहर भेजने से डरेगा। सरकार को समझना होगा कि जनता की याददाश्त कम नहीं होती। ये आक्रोश तब तक ठंडा नहीं होगा जब तक उस वीआईपी का चेहरा बेनकाब नहीं होता।

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