सृजन करने की आजादी से आधुनिक जीवन होता है अग्रसर: उपेन्द्र राय

भारत लिटरेचर फेस्टिवल के छठे सीजन में युवाओं को किया संबोधित

  • भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क के चेयरमैन बोले – जीवन का सबसे बड़ा मूल्य स्वतंत्रता है, दौलत मात्र बाय-प्रोडक्ट
  • दुनिया में कहीं भी जन्मे बच्चे केदो अनमोल गुण

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में विश्व पुस्तक मेला 2026 का आगाज हो गया। भारत मंडपम आयोजित भारत लिटरेचर फेस्टिवल (बीएलएफ) के छठे सीजन ने साहित्य प्रेमियों और युवा लेखकों के बीच नई ऊर्जा का संचार किया। बीएलएफ में भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क के चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर एवं एडिटर-इन-चीफ उपेन्द्र राय ने विशेष रूप से पीएम-युवा स्कीम के तहत चुने गए युवा लेखकों को संबोधित किया। उन्होंने ‘राष्ट्र निर्माण में युवा लेखकों की भूमिका’ विषय पर गहन एवं प्रेरणादायक विचार व्यक्त किए। इससे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसका उद्घाटन किया।
उद्घाटन समारोह के दौरान उन्होंने टैम्बोरिन बजाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। बुद्ध, महावीर और कबीर जैसे महापुरुषों का उदाहरण देते हुए उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि इन्हीं महान आत्माओं को अपना आदर्श बनाएं। उन्होंने बुद्ध के अंतिम वादे का जिक्र किया कि वे मैत्रेय के रूप में पुन: आएंगे, लेकिन साढ़े तीन हजार वर्ष बीत जाने के बाद भी ऐसी महान आत्मा को धारण करने योग्य गर्भ नहीं मिला। सीएमडी उपेन्द्र राय ने अपने संबोधन की शुरुआत बच्चों के सहज स्वभाव से की। उन्होंने कहा, दुनिया में कहीं भी जन्मा कोई भी बच्चा दो अनमोल गुण लेकर आता है – पहला, वह बिना किसी काम के भी व्यस्त रहता है और दूसरा, बिना किसी खास वजह के खुश रहता है, उसे खुश करने के लिए कोई विशेष आयोजन नहीं करना पड़ता।

हमारे कर्म ही आत्मा पर छाप छोड़ते हैं

अहंकार और आत्मा की चर्चा करते हुए उपेन्द्र राय ने जुड़वा बच्चों का रोचक उदाहरण दिया। एक ही मां के गर्भ से जन्मे दो जुड़वा बच्चे एक ही समय में पैदा होते हैं, फिर भी एक बेहद सफल और दूसरा संघर्षशील क्यों बन जाता है? इसका उत्तर है अलग-अलग संस्कारों वाली आत्माओं का प्रवेश। माता-पिता केवल शरीर का निर्माण करते हैं, आत्मा का रहस्य विज्ञान आज तक नहीं सुलझा पाया है। उन्होंने आगे कहा कि हमारे कर्म एक-एक करके आत्मा पर छाप छोड़ते हैं, जैसे एक रजिस्टर में प्रविष्टियां दर्ज होती हैं। यही कर्म आगे चलकर हमारे स्वभाव और जीवन दिशा को निर्धारित करते हैं।

युवा लेखकों को संदेश- सफलता का मूल मंत्र है सहजता

उपेन्द्र राय ने युवा लेखकों को संदेश दिया कि सहजता से जीवन सरल और सुंदर बनता है, जबकि कुटिलता अवसरों को छीन लेती है। उन्होंने एक छोटी कहानी सुनाई कि कैसे एक साहूकार ज्यादा होशियारी दिखाने में बहुमूल्य हीरा खरीदने का अवसर गंवा बैठा। पीएम-युवा स्कीम के तहत चयनित युवा लेखकों से विशेष संवाद में उन्होंने राष्ट्र निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवा लेखक समाज को दिशा देने वाले दीपक हैं। यदि वे स्वतंत्र चेतना, आध्यात्मिक गहराई और आधुनिक मूल्यों को अपनाते हैं, तो देश का भविष्य उज्ज्वल होगा।

शेर कभी भी टारगेट से नहीं चूकता

शेर और सपूत का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि शेर शिकार के लिए दौड़ते समय कांटों को नहीं देखता, चोट खाकर भी लक्ष्य पर अटल रहता है। इसी प्रकार सपूत संतान स्वयं धन का निर्माण कर लेती है, जबकि नालायक संतान पिता की सारी संपत्ति नष्ट कर देती है।

जीवन का सर्वोच्च मूल्य है स्वतंत्रता

उपेन्द्र राय ने जोर देकर कहा कि दुनिया के किसी भी कोने में, किसी भी युग में जीवन का सबसे बड़ा मूल्य स्वतंत्रता ही रहा है। यदि आपको अपनी बात कहने की, जीवन जीने की, कुछ नया सृजन करने की आजादी मिलती है, तो आप आधुनिक जीवन मूल्यों की सच्ची दिशा में अग्रसर हैं।

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