देवी-देवताओं और ग्रंथों का अपमान, मोदी पर क्यों नहीं उठता विरोध? क्या आस्था सिर्फ विपक्ष आहत करता है?
देश की राजनीति में धार्मिक भावनाओं के मुद्दे पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है... देवी-देवताओं और धार्मिक ग्रंथों के कथित अपमान पर...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः भारत की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक भावनाओं को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है.. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ.. हनुमान जी की तस्वीर वाली पतंग उड़ाने की घटना ने पूरे देश में हंगामा मचा दिया है.. विपक्षी दल कांग्रेस इसे सनातन धर्म का अपमान बता रही है.. जबकि कुछ लोग इसे भारत-जर्मनी के बीच सांस्कृतिक दोस्ती का प्रतीक मानते हैं.. कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इसे ‘नौटंकी’ करार दिया.. और सवाल उठाया कि सनातन धर्म की बात करने वाले लोग अब कहां गायब हैं.. यह विवाद 12 जनवरी 2026 को अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल से शुरू हुआ.. जहां मोदी और मर्ज ने साथ मिलकर पतंग उड़ाई.. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.. जिसके बाद आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया..
आपको बता दें कि 12 जनवरी 2026 को गुजरात के अहमदाबाद में इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल का आयोजन हुआ.. यह फेस्टिवल हर साल मकर संक्रांति के आसपास होता है.. और दुनिया भर से लोग इसमें हिस्सा लेते हैं.. इस बार जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भारत के दौरे पर थे.. और प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें इस फेस्टिवल में शामिल किया.. दोनों नेता साबरमती रिवरफ्रंट पर पहुंचे.. जहां उन्होंने महिलाओं से बनी पतंगों के बारे में बात की.. और फिर साथ मिलकर पतंग उड़ाई..
खास बात यह थी कि उड़ाई गई पतंग पर भगवान हनुमान जी की तस्वीर बनी हुई थी.. वीडियो में मोदी और मर्ज हंसते-मुस्कुराते नजर आ रहे हैं.. एक पतंग ‘ऑपरेशन सिंदूर’ थीम वाली थी.. लेकिन मुख्य विवाद हनुमान जी वाली पतंग पर हुआ.. मोदी ने इसे भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रचार बताया.. और कहा कि यह भारत-जर्मनी के रिश्तों को मजबूत करने का तरीका है.. इस दौरे का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और साफ ऊर्जा पर बातचीत था.. मर्ज ने भी इसे मजेदार अनुभव बताया.. और गांधी आश्रम का दौरा किया..
वहीं यह पहली बार नहीं है जब मोदी किसी विदेशी नेता के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं.. पहले भी वे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ ‘नमस्ते ट्रंप’ इवेंट या जापानी पीएम के साथ योगा कर चुके हैं.. लेकिन इस बार हनुमान जी की छवि का इस्तेमाल विवाद का कारण बना..
आपको बता दें कि जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर आया, विपक्ष ने तीखा हमला बोल दिया.. कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एक्स पर पोस्ट किया कि इनकी घड़ी घड़ी की नौटंकी तो झेल ही रहे हैं.. लेकिन अपने देवी देवताओं का अपमान कैसे सहें.. पवनसुत हनुमान जी को पतंग बनाकर उड़ाने की हिम्मत कैसे हो रही है इनकी.. सनातन की बात करने वाले सारे फ़र्ज़ी कहां ग़ायब हैं.. मुंह में दही जम गई क्या.. सुप्रिया ने मोदी को ‘स्वयंभू ठेकेदार’ बताया.. और कहा कि वे लगातार हिंदू धर्म का अपमान कर रहे हैं..
कांग्रेस के यूपी चीफ अजय राय ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी.. और उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है.. और सनातनियों का अपमान है कि पीएम मोदी एक विदेशी नेता के साथ हनुमान जी वाली पतंग उड़ा रहे हैं.. हम भगवान की पूजा करते हैं.. और कलयुग में अगर कोई पूजनीय है तो वह हनुमान जी हैं.. मोदी को सनातन अनुयायियों से माफी मांगनी चाहिए.. राय ने आरोप लगाया कि अगर विपक्ष का कोई नेता ऐसा करता तो देश में बवाल मच जाता.. कांग्रेस नेता BV श्रीनिवास ने भी सवाल उठाया कि क्या हनुमान जी को पतंग की तरह उड़ाना शोभनीय है..
विपक्ष का मुख्य तर्क है कि हनुमान जी सनातन धर्म में भक्ति, बल और त्याग के प्रतीक हैं.. उन्हें पतंग बनाकर उड़ाना अपमान है.. क्योंकि पतंग गिर सकती है या गंदी जगह पर गिर सकती है.. वे कहते हैं कि भाजपा धर्म को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करती है.. अगर कोई मुस्लिम या विपक्षी नेता ऐसा करता तो उसे हिंदू विरोधी घोषित कर दिया जाता.. विपक्ष ने बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद पर भी सवाल उठाया कि वे चुप क्यों हैं.. ये संगठन फिल्मों या विज्ञापनों में छोटी-छोटी बातों पर हंगामा मचाते हैं.. लेकिन मोदी के मामले में सन्नाटा है..
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध में हनुमान चालीसा पढ़ने की कोशिश की.. लेकिन पुलिस ने रोक दिया.. इससे विवाद और बढ़ गया.. विपक्ष कहता है कि भाजपा का दोहरा चरित्र सामने आ रहा है.. भावनाएं सिर्फ विपक्ष आहत करता है और मोदी के लिए चुप्पी साधे हुए हैं..
भाजपा की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.. लेकिन कुछ समर्थकों और मीडिया रिपोर्ट्स में इसे ‘काइट डिप्लोमेसी’ बताया गया है.. उनका तर्क है कि यह भारत की विरासत को दुनिया के सामने रखने का तरीका है.. मोदी ने पहले भी राम मंदिर उद्घाटन या काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसे कामों से हिंदू संस्कृति को बढ़ावा दिया है.. समर्थक कहते हैं कि पतंग उड़ाना मकर संक्रांति की परंपरा है.. और हनुमान जी की छवि से कोई अपमान नहीं होता.. एक पोस्ट में कहा गया कि यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान है.. जो भारत-जर्मनी की दोस्ती दिखाता है..
वहीं कुछ भाजपा नेता निजी तौर पर कहते हैं कि विपक्ष राजनीतिक फायदा उठाने के लिए मुद्दा बना रहा है.. असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा जैसे नेताओं ने पहले हिंदू राष्ट्र की बात की है… लेकिन इस मुद्दे पर चुप्पी है.. VHP और बजरंग दल ने भी कोई बड़ा विरोध नहीं किया.. जो विपक्ष के ‘दोहरे चरित्र’ के आरोप को मजबूत करता है..



