SIR में पकड़ा गया BJP का बड़ा फर्जीवाड़ा, नाम खुला तो मचा हडकंप!

SIR को लेकर अब जो सच्चाई सामने आई है...उसने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है...जिस प्रक्रिया को वोटर लिस्ट सुधारने का नाम दिया गया था...

4पीएम न्यूज नेटवर्क: SIR को लेकर अब जो सच्चाई सामने आई है…उसने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है…जिस प्रक्रिया को वोटर लिस्ट सुधारने का नाम दिया गया था…

वही प्रक्रिया अब वोट चोरी का सबसे बड़ा हथियार बनती नजर आ रही है…और इस पूरे खेल में बीजेपी की भूमिका सामने आने के बाद देशभर में हड़कंप मच गया है.. विपक्ष शुरुआत से ही चेतावनी दे रहा था कि SIR कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है…

विपक्ष का साफ आरोप था कि इसके जरिए चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में हेरफेर किया जा रहा है…खासतौर पर उन मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है…जो बीजेपी के खिलाफ वोट करते हैं…लेकिन तब सत्ता पक्ष ने इसे सिरे से खारिज कर दिया था…बीजेपी नेताओं ने आरोपों को विपक्ष का बहाना बताया था…चुनाव आयोग ने भी हर बार यही कहा कि सब कुछ नियमों के तहत हो रहा है…लेकिन अब जो दस्तावेज, रिपोर्ट और जमीनी सच्चाई सामने आई है….उसने इन सभी दावों की पोल खोलकर रख दी है…

फर्जी आपत्ति देने वाले निकले भाजपा के BLA, नाम खुले तो बोले-हमने नहीं दी…..यानी जो आपत्तियां दर्ज कराई जा रही थीं…वोटर लिस्ट को लेकर…..वो किसी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी की ओर से नहीं दर्ज कराई जा रही थीं….वो आपत्तियां भाजपा से जुड़े बूथ लेवल एजेंटों की ओर से दर्ज कराई जा रही थीं….जिसका अब भांडाफोड हो गया है….और कथिततौर पर बीजेपी की बड़ी चोरी पकड़ी गई है कि कैसे बीजेपी अपने BLAs की जरिए ये बड़ा खेल कर रही थी…..यानी, SIR को लेकर जिस बड़े फर्जीवाड़े का शक विपक्ष पहले दिन से जता रहा था…अब वही शक धीरे-धीरे हकीकत बनता दिखाई दे रहा है…जिस तरह से SIR की आड़ में वोटर लिस्ट से छेड़छाड़ के सबूत सामने आए हैं…उसने पूरे सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है…

खास बात ये है कि इस पूरे मामले में अब बीजेपी का नाम खुलकर सामने आने लगा है…जिसके बाद चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं…विपक्ष लगातार ये आरोप लगाता रहा है कि बीजेपी लोकतंत्र से नहीं….बल्कि साजिशों से चुनाव जीतना चाहती है…विपक्ष का कहना था कि SIR के जरिए चुन-चुनकर उनके समर्थक वोटरों के नाम काटे जा रहे हैं…लेकिन, उस वक्त बीजेपी और चुनाव आयोग दोनों ही इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे थे…यहां तक कि हम और आप भी यही कहते थें कि विपक्ष का काम ही है विरोध करना….इसलिए वो ऐसे आरोप लगा रहा है…..लेकिन अब जो सच और दस्तावेज सामने आए हैं……वो विपक्ष के आरोपों को सही साबित करते नजर आ रहे हैं…

दरअसल, सरकार और चुनाव आयोग की ओर से SIR का मकसद वोटर लिस्ट को दुरुस्त करना बताया गया था…कहा गया कि फर्जी नाम हटाए जाएंगे और सही मतदाताओं को जोड़ा जाएगा…लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है…SIR के नाम पर बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट से नाम गायब किए गए…सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि जिन इलाकों में विपक्ष मजबूत माना जाता है….वहीं सबसे ज्यादा नाम कटे पाए गए…गरीब, दलित, अल्पसंख्यक और प्रवासी मजदूरों के नाम अचानक वोटर लिस्ट से गायब हो गए…जब इन लोगों ने कारण जानना चाहा तो प्रशासन के पास कोई ठोस जवाब नहीं था…

अब सामने आई रिपोर्ट में ये साफ हो गया है कि SIR के दौरान नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं…बिना नोटिस दिए मतदाताओं के नाम हटाए गए…घर-घर जाकर सत्यापन करने की प्रक्रिया को केवल कागजों तक सीमित रखा गया…यानी पूरी कवायद सिर्फ दिखावे की थी…इस पूरे खेल में बीजेपी से जुड़े कई स्थानीय नेताओं और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की भूमिका सामने आई है…आरोप है कि इन्हीं लोगों ने चुनिंदा वोटरों की लिस्ट बनाकर उन्हें हटवाने का काम किया…ये कोई मामूली गलती नहीं…..बल्कि एक pre-planned साजिश दिखाई देती है…

सबसे बड़ा और गंभीर सवाल चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर खड़े हो रहे हैं…विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग को इस गड़बड़ी की जानकारी थी…इसके बावजूद आयोग ने आंखें मूंदे रखीं…यही वजह है कि अब चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठने लगे हैं…लोकतंत्र में चुनाव आयोग को सबसे निष्पक्ष संस्था माना जाता है…लेकिन अगर वही संस्था सत्ता पक्ष के इशारे पर काम करने लगे, तो लोकतंत्र का क्या होगा…यही सवाल आज देश का हर जागरूक नागरिक पूछ रहा है…

बीजेपी पर पहले भी EVM, वोटर लिस्ट और चुनावी प्रक्रिया को लेकर आरोप लगते रहे हैं…हर बार बीजेपी ने इन आरोपों को विपक्ष की हताशा बताया…लेकिन इस बार हालात अलग हैं…क्योंकि इस बार आरोपों के साथ सबूत भी सामने आ चुके हैं…SIR से जुड़े जिन दस्तावेजों का खुलासा हुआ है…वो साफ बताते हैं कि प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी की गई…कई मामलों में एक ही पते पर रहने वाले कुछ लोगों के नाम रखे गए और कुछ के हटा दिए गए…ये चयन किस आधार पर हुआ…इसका जवाब किसी के पास नहीं है…

विपक्ष का कहना है कि ये चयन बीजेपी की राजनीतिक जरूरतों के आधार पर किया गया…जहां बीजेपी कमजोर थी….वहां वोट काटे गए…और जहां बीजेपी मजबूत थी…वहां आंख मूंद ली गई………यही तो वोट चोरी की असली परिभाषा है…बीजेपी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताती है…लेकिन सवाल ये है कि अगर पार्टी इतनी ही मजबूत है….तो उसे वोट चोरी की जरूरत क्यों पड़ रही है?…

क्या जनता का भरोसा इतना कमजोर हो चुका है कि अब फर्जीवाड़े का सहारा लेना पड़ रहा है…SIR में सामने आए इस बड़े फर्जीवाड़े ने बीजेपी के स्वच्छ चुनाव के दावों की पोल खोल दी है…एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकतंत्र की दुहाई देते हैं…और दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी लोकतंत्र की जड़ों पर वार करती नजर आती है…….इसे लेकर विपक्ष का कहना है कि ये सिर्फ एक राज्य या एक चुनाव की बात नहीं है…ये पूरे देश के लोकतंत्र पर हमला है…अगर आज इसे रोका नहीं गया, तो आने वाले चुनावों में जनता का वोट सिर्फ एक दिखावा बनकर रह जाएगा…

अब सवाल ये भी उठता है कि क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी…या फिर हमेशा की तरह इसे भी दबाने की कोशिश की जाएगी…अब तक के अनुभव बताते हैं कि बीजेपी सरकार में बड़े घोटाले अक्सर फाइलों में ही दफन हो जाते हैं…लेकिन इस बार मामला ज्यादा गंभीर है…क्योंकि ये सीधा-सीधा जनता के मताधिकार से जुड़ा है…क्योंकि, मतदान का अधिकार छीनना….लोकतंत्र की हत्या के बराबर माना जाता है…

अजमेर शहर कांग्रेस ने बीजेपी के बीएलए के साथ इसका खुलासा किया…बीएलए ने भी लिखित में दिया कि आपत्तियां फर्जी हैं…वहीं, इस दौरान वार्ड 72 से भाजपा के बीएलए राधेश्याम बंजारा ने बताया कि…मेरे पास फॉर्म नहीं पहुंचे थे…बीएलओ तक पहुंचे फॉर्म में मेरे हस्ताक्षर नहीं हैं….मैं हिंदी में हस्ताक्षर करता हूं…फॉर्म पर इंग्लिश में कर रखे हैं…किसने मेरे नाम से हस्ताक्षर किए मुझे इसकी जानकारी नहीं है…

वहीं कांग्रेस नेता धर्मेंद्र राठौड़ ने कहा कि…SIR को लेकर राहुल गांधी लगातार वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं। मोदी सरकार भी वोट चोरी से बनी है। अजमेर में भी इसी तरह SIR को लेकर कई गड़बड़ियां सामने आई है। आगे राठौड़ ने कहा- बीजेपी के बीएलए खुद कह रहे हैं कि जो यह ऑब्जेक्शन हुए इसमें उनके हस्ताक्षर नहीं है। बूथ नंबर 72 से राधेश्याम बंजारा भाजपा के बीएलए है। बंजारा ने खुद लिखित में दिया कि उनके नाम से जो फॉर्म 7 उपलब्ध करवाए गए। उस पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। इसके साथ ही उनके पास कोई फॉर्म भी नहीं पहुंचे थे। इससे बड़ा बीजेपी के खिलाफ कोई सबूत नहीं हो सकता है। धर्मेंद्र राठौड़ ने कहा- इससे साफ जाहिर होता है कि मोदी और भजनलाल सरकार चुनाव में किस तरीके से वोटों की चोरी कर रहे हैं। इसके अलावा कई और बीएलए की ओर से लिखित में दिया गया है। इससे बड़ा प्रमाण फर्जीवाड़े का कुछ नहीं हो सकता।

वहीं रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी रहे आर्यन जुबेर ने बताया कि…13 दिसंबर को रामगढ़ एसडीएम बाबूलाल जाटव के पास ऑफलाइन 1383 आपत्तियां पहुंचीं….इनकी जांच के लिए BLO को नोटिस तक जारी कर दिए गए…जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रामगढ़ में निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा और विपक्ष ने मांग की है कि SIR प्रक्रिया को तुरंत रद्द किया जाए…साथ ही पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए…जिन अधिकारियों और नेताओं की भूमिका सामने आई है…उन पर सख्त कार्रवाई हो…बीजेपी इन मांगों से साफ बचती नजर आ रही है..

.वहीं इस बारे में भाजपा दक्षिण से जिलाध्यक्ष अशोक गुप्ता ने कहा कि…कुछ भी जानकारी नहीं है…हमारी ओर से कोई गलत काम नहीं किया है…यानी कि….कोई भी सीधे तौर पर आरोपों का जवाब देने को तैयार नहीं है…हालांकि, चुप्पी भी कई बार बहुत कुछ कह जाती है…और इस मामले में बीजेपी की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है…अगर सच में कुछ गलत नहीं हुआ, तो जांच से डर क्यों?…

आज देश के सामने ये साफ हो चुका है कि SIR कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं थी…ये एक राजनीतिक हथियार था…जिसका इस्तेमाल बीजेपी ने सत्ता में बने रहने के लिए किया…विपक्ष जिस बात को पहले दिन से कह रहा था…अब वही बात सच साबित होती दिखाई दे रही है…SIR के जरिए वोट चोरी की गई…और इस चोरी में सत्ता, प्रशासन और चुनाव आयोग की चुप्पी शामिल रही…..ऐसे में अब ये लड़ाई सिर्फ विपक्ष की नहीं रह गई है…ये लड़ाई हर उस नागरिक की है……जो अपने वोट की ताकत पर भरोसा करता है………अगर वोट ही सुरक्षित नहीं है…तो लोकतंत्र सिर्फ एक शब्द बनकर रह जाएगा…SIR में पकड़े गए इस बड़े फर्जीवाड़े ने बीजेपी के चेहरे से नकाब उतार दिया है…

ऐसे में अब देखना ये है कि देश की जनता इसे कितनी गंभीरता से लेती है…और क्या लोकतंत्र को बचाने के लिए कोई बड़ा फैसला लिया जाएगा…क्योंकि अगर आज भी आंखें मूंद ली गईं…तो कल वोट नहीं, बल्कि पूरा संविधान खतरे में होगा..

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