कौन हैं Sahar Shaikh ? Owaisi की वो पार्षद जिनकी ‘हरे रंग’ वाली धमकी ने मचाया हड़कंप।

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM की 22 साल की पार्षद सहर शेख इन दिनों अपने बयान को लेकर सुर्खियों मे हैं...इनके एक बयान ने इन दिनों सियासी बवाल मचा रखा है...जिसमें उन्होंने हरे रंग का जिक्र करते हुए कथित तौर पर धमकी दी...

4पीएम न्यूज नेटवर्क: असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM की 22 साल की पार्षद सहर शेख इन दिनों अपने बयान को लेकर सुर्खियों मे हैं…इनके एक बयान ने इन दिनों सियासी बवाल मचा रखा है…जिसमें उन्होंने हरे रंग का जिक्र करते हुए कथित तौर पर धमकी दी…

जिसने राजनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है….विपक्षी दलों ने इसे खुली धमकी बताया है…वहीं उनकी पार्टी AIMIM और समर्थक इसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया बयान बता रहे हैं…इस पूरे विवाद के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर सहर शेख कौन हैं?…उनका राजनीतिक सफर क्या रहा है? और उन्होंने ऐसा क्या कहा जिससे इतना बवाल मच गया और इस बयान के क्या राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं..

देश की राजनीति में कभी-कभी ऐसे बयान सामने आते हैं…जो सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहते…बल्कि पूरे राजनीतिक माहौल को गर्मा देते हैं…जैसा कि AIMIM की पार्षद सहर शेख के बयान को लेकर हुआ है….उनके एक बयान में इस्तेमाल हुए हरे रंग शब्द ने सियासत, प्रशासन और सोशल मीडिया…तीनों जगह भूचाल ला दिया है…अब ये मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रहा….बल्कि इसके पीछे राजनीतिक रणनीति, धार्मिक प्रतीक, चुनावी माहौल और अभिव्यक्ति की सीमा जैसे कई बड़े सवाल जुड़े हुए हैं…

सहर शेख तब अचानक सुर्खियों में आईं…जब उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ…इस वीडियो में वो एक सार्वजनिक मंच से भाषण देती नजर आ रही हैं…भाषण के दौरान उन्होंने कथित तौर पर कहा कि……तो हरा रंग दिखाने में देर नहीं लगेगी…यही एक बयान पूरे विवाद की जड़ बन गई…वीडियो वायरल होते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई और सहर शेख का नाम देशभर में चर्चा का विषय बन गया…

तो जैसा कि आपने सुना की कैसे सहर शेख ने मुंब्रा को हरे रंग में रंगने की बात कही….सहर शेख AIMIM की नेता हैं और ठाणे महानगरपालिका के मुंब्रा इलाके में निर्वाचित पार्षद हैं….AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी में उन्हें एक जुझारू और मुखर महिला नेता के तौर पर देखा जाता है…वो जिस इलाके से पार्षद हैं…वहां मुस्लिम आबादी अच्छी खासी है और स्थानीय मुद्दों को लेकर वो अक्सर प्रशासन से टकराती रही हैं…सहर शेख की पहचान एक ऐसी नेता की रही है जो…मंच से खुलकर बोलती हैं…प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाती हैं और अल्पसंख्यकों के मुद्दों को प्राथमिकता देती हैं….

वहीं सहर शेख का राजनीतिक सफर की अगर बात करें…तो सहर शेख का राजनीतिक सफर अचानक शुरू नहीं हुआ…राजनीति में आने से पहले वो सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी रहीं हैं….जहां स्थानीय स्तर पर…महिलाओं की समस्याएं…गरीब तबके की परेशानियां…बुनियादी सुविधाओं की कमी…जैसे मुद्दों को लेकर उन्होंने आवाज उठाई…बाद में AIMIM से जुड़कर उन्होंने चुनाव लड़ा और पार्षद बनीं…उनकी जीत को पार्टी ने महिला नेतृत्व को आगे लाने के उदाहरण के तौर पर पेश किया….

AIMIM लंबे समय से ये दावा करती रही है कि वो सिर्फ मुस्लिम राजनीति नहीं….बल्कि हाशिये पर खड़े लोगों की राजनीति करती है….सहर शेख को इसी सोच का जमीनी चेहरा बताया जाता है…पार्टी के अंदर उन्हें..तेज तर्रार वक्ता…जमीनी नेता…महिलाओं की मजबूत आवाज के तौर पर देखा जाता है…यही वजह है कि उनका ये बयान पार्टी के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर गया…

AIMIM और सहर शेख का कहना है कि उनका बयान गलत तरीके से वायरल किया गया….पार्टी का दावा है कि वो किसी हिंसा या सांप्रदायिक संकेत की बात नहीं कर रही थीं…बल्कि…अपने समर्थकों को एकजुट रहने…डर के बिना लोकतांत्रिक तरीके से लड़ने की बात कर रही थीं….हालांकि वीडियो में हरा रंग जैसे शब्द का इस्तेमाल साफ तौर पर सुनाई देता है…..जिससे विवाद और ज्यादा गहरा गया…हालांकि, सहर शेख ने अपने इस बयान पर सफाई दी है कि….हमारी पार्टी के झंडे का रंग हरा है और आज हम 5 जीते हैं, आगे हमारे और भी पार्षद जीतेंगे तो हरा झंडा लहराएगा। अगर हमारे झंडे का रंग नीला होता तो हम नीला बोलते। भाजपा केवल सांप्रदायिक खेल खेलना है जब ये लोग कहते हैं कि हम सब भगवा कर देंगे तब कोई कुछ नहीं बोलता है।

भारत में रंग सिर्फ रंग नहीं होते…राजनीति और धर्म में इनके गहरे मतलब होते हैं…हरा रंग इस्लाम से जुड़ा माना जाता है…भाजपा और हिंदुत्व की राजनीति में इसे अक्सर सांप्रदायिक नजरिए से देखा जाता है…इसी वजह से AIMIM का कहना है कि सहर शेख का बयान धार्मिक पहचान के सहारे दबाव बनाने की कोशिश है…

वहीं भाजपा ने इस बयान को लेकर AIMIM और सहर शेख पर तीखा हमला बोला…AIMIM की सहर शेख के हरा रंग वाले बयान के जवाब में अमरावती से पूर्व सांसद और बीजेपी नेता नवनीत राणा ने पलटवार करते हुए कहा कि…भारत में रहना है…तो भगवा स्वीकार करो….हरा चाहिए तो पाकिस्तान जाओ…. हालांकि, सहर शेख ने उनके इस बयान को विपक्षी दलों ने सांप्रदायिक करार दिया था….अब इस पर सफाई देते हुए सहर शेख ने आरोप लगाया है कि…उनके शब्दों को जानबूझकर तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और राजनीतिक विरोधियों ने इसे धार्मिक रंग देने की कोशिश की। सहर शेख ने सफाई देते हुए कहा कि हम हरे रंग को बढ़ावा दे रहे हैं क्योंकि मेरी पार्टी का झंडा हरे रंग का है।

सहर शेख ने मीडिया के जरिए अपनी बात रखी…लेकिन, इस विवाद ने एक और बहस को जन्म दे दिया है कि….क्या महिला नेताओं के बयानों को अलग नजरिए से देखा जाता है?…कुछ लोगों का कहना है कि…महिला नेताओं की भाषा पर ज्यादा निगरानी होती है…उनके शब्दों को ज्यादा उछाला जाता है…हालांकि विरोधी दल इसे सिर्फ कानून और मर्यादा का सवाल बताते हैं……….सहर शेख AIMIM का चेहरा हैं….इसलिए इसका असर सीधे तौर पर असदुद्दीन ओवैसी की राजनीति पर भी पड़ता है….विरोधी दल इस मुद्दे को AIMIM की कथित कट्टर राजनीति और ध्रुवीकरण की रणनीति से जोड़कर देख रहा है….वहीं सोशल मीडिया पर ये मुद्दा पूरी तरह से बंटा हुआ नजर आ रहा है…एक वर्ग सहर शेख का समर्थन कर रहा है…तो दूसरा वर्ग उन्हें गिरफ्तार करने की मांग कर रहा है…जबकि, तीसरा वर्ग इसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस छेड चुका है….

जबकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये विवाद ऐसे समय में आया है…जब चुनावी माहौल गरम है…ऐसे में हर बयान को वोट बैंक से जोड़कर देखा जा रहा है…छोटी बात भी बड़ा मुद्दा बन जाती है…सहर शेख का बयान भी इसी माहौल में और ज्यादा उछल गया…

ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या ये विवाद AIMIM को फायदा देगा?…तो कुछ विश्लेषकों का मानना है कि विवाद AIMIM के कोर वोटर को और मजबूत कर सकता है…पार्टी खुद को निशाने पर आई आवाज के रूप में पेश कर सकती है….वहीं कुछ का कहना है कि…इससे AIMIM की छवि को नुकसान हो सकता है…पार्टी पर कट्टरता का ठप्पा और गहरा सकता है……हालांकि, सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या प्रशासन निष्पक्ष जांच करेगा?…क्या कानून सबके लिए बराबर है?…लोग देख रहे हैं कि इस मामले में कार्रवाई होती है या नहीं….लेकिन इतना तो तय है कि हरे रंग वाला बयान सहर शेख को लंबे समय तक राजनीति में चर्चा का विषय बनाए रखेगा.

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