BMC चुनाव के बाद भी महाराष्ट्र की सियासत में मचा हड़कंप, राउत-राज के बयान ने बढ़ाया पारा!

इन दिनों महाराष्ट्र का सियासी पारा सातवें आसमान पर है। भले ही BMC चुनाव हो गए हों लेकिन सियासी रार और बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रहे। इसी बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना मुखिया राज ठाकरे और शिवसेना UBT नेता संजय राउत के बयान से महाराष्ट्र में सियासी बवाल मचा हुआ है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: इन दिनों महाराष्ट्र का सियासी पारा सातवें आसमान पर है। भले ही BMC चुनाव हो गए हों लेकिन सियासी रार और बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रहे। इसी बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना मुखिया राज ठाकरे और शिवसेना UBT नेता संजय राउत के बयान से महाराष्ट्र में सियासी बवाल मचा हुआ है।

दरअसल महाराष्ट्र की मौजूदा सियासत पर चर्चा करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि आज की पूरी तरह बदल चुकी राजनीति में अगर वह थोड़ा लचीला रुख अपनाते भी हैं तो यह कभी उनके व्यक्तिगत लाभ या स्वार्थ के लिए नहीं होगा. उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब दो दिन पहले उनकी पार्टी के पांच पार्षदों ने ठाणे जिले के कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में एकनाथ शिंदे-नीत शिवसेना को समर्थन दिया था. यह कदम आश्चर्यजनक है, क्योंकि मनसे ने 15 जनवरी के निकाय चुनाव में केडीएमसी और मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई नगर निगमों में शिवसेना UBT के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. उद्धव ठाकरे-नीत पार्टी ने मनसे के पार्षदों के प्रतिद्वंद्वी दल के पक्ष में जाने पर सार्वजनिक तौर पर निराशा जताई.

राज ठाकरे ने शिवसेना संस्थापक और अपने ताऊ दिवंगत बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘आज निष्ठाएं आसानी से बिक जाती हैं. सिद्धांतों को यूं ही त्याग दिया जाता है और राजनीति पूरी तरह अवसरवादी हो गई है. आज की राजनीति में सफलता इस बात से नहीं आंकी जाती कि कौन से मुद्दे सामने लाए गए या क्षेत्रीय और भाषाई अस्मिता को कितनी मजबूती से जीवित रखा गया, बल्कि यह इस बात से आंकी जाती है कि चुनावी राजनीति में कितनी सफलता मिली तथा वहां तक पहुंचने के लिए कौन-कौन से हथकंडे अपनाए गए.’’ राज ठाकरे ने आगे कहा कि मराठी भाषा, मराठी प्रांत और मराठी लोगों के प्रति बालासाहेब के अटूट प्रेम को देखकर हजारों-लाखों लोग उनके साथ जुड़े और वह भी उनमें से एक हैं. उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए ‘बालासाहेब’ और ‘मराठी’- इन दो शब्दों के प्रति मेरे और मेरे ‘महाराष्ट्र सैनिकों’ के मन में जो विश्वास तथा प्रेम है वह रत्ती भर भी कम नहीं होगा.’’

बालासाहब को लेकर बात करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि ‘‘बालासाहेब के समय में ऐसी अपेक्षाओं से कोई समझौता नहीं होता था. उन्हें स्वयं सत्ता की लालसा नहीं थी. यहां तक ​​कि जब बालासाहेब को कभी राजनीति में लचीला रुख अपनाना पड़ा, तब भी मराठी लोगों के प्रति उनका प्रेम रत्ती भर भी कम नहीं हुआ, बल्कि इसके विपरीत यह और भी मजबूत हो गया. ये वही मूल्य हैं जो हमारे भीतर बोए गए हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं आज एक बार फिर वचन देता हूं कि इस पूरी तरह बदल चुकी राजनीति में अगर मैं थोड़ा लचीला रुख अपनाऊं भी, तो वह कभी मेरे निजी लाभ या स्वार्थ के लिए नहीं होगा.’’

वहीं इस खास मौके पर अपनी बात रखते हुए शिवसेना UBT नेता संजय राउत ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी और पीएम नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि देशभर से कई मान्यवरों ने बालासाहेब ठाकरे को लेकर अपने संदेश भेजे हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने भी बालासाहेब के साथ अपनी तस्वीर पोस्ट कर यह बताया था कि उन्हें उनसे दिशा और ऊर्जा मिली, लेकिन वही पीएम मोदी बाद में शिवसेना को तोड़कर एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा देते हैं. संजय राउत ने कहा, ”अब वही लोग बालासाहेब ठाकरे से ऊर्जा लेने की बात कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि बालासाहेब एक महान और लोकमान्य व्यक्तित्व थे. लोकमान्य तिलक के बाद अगर कोई नेता सही मायने में लोकमान्य हुआ तो वह बालासाहेब ठाकरे थे.” उन्होंने बताया कि आज इस अवसर पर एक विशेष समारोह आयोजित किया गया है, जिसमें उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे दोनों उपस्थित रहेंगे.

उद्धव ठाकरे गुट के नेता ने आगे कहा, ”बालासाहेब ठाकरे ने देश और महाराष्ट्र को एकजुट रहने का संदेश दिया. उनकी दी हुई ‘एकता की वज्रमूठ’ किसी भी ताकत का सामना कर सकती है. उन्होंने आम आदमी को शूरवीर बनाया और समाज में कुछ अलग करने की भावना पैदा की.” इतना ही नहीं दोस्तों संजय राउत ने ये भी कहा कि बीजेपी किसी भी हालत में महापौर पद छोड़ने को तैयार नहीं होती. उन्होंने आरोप लगाया कि अगर बालासाहेब ठाकरे के फोटो का इस्तेमाल राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं किया जाता, तो शिवसेना को नहीं तोड़ा जाता. जिस बीजेपी का कभी अस्तित्व नहीं था, उसे बालासाहेब ने खड़ा किया और आज उसी बीजेपी ने शिवसेना को तोड़कर धनुष-बाण का चुनाव चिह्न ‘नामर्दों’ के हाथ में दे दिया. शिवसेना (यूबीटी) सांसद ने आगे कहा, ”शिवसेना पर इससे बुरा समय पहले कभी नहीं आया, लेकिन सत्ता नहीं मिलने के कारण हम तड़प नहीं रहे हैं. बीजेपी की ‘राक्षसी महत्वाकांक्षा’ अब साफ दिखाई दे रही है. पैसों के दम पर चुनाव जीतना बालासाहेब की विचारधारा नहीं थी.

राज ठाकरे को लेकर पूछे गए सवाल पर संजय राउत ने कहा कि वे पार्टी के बड़े नेता हैं और उनकी भूमिका पर वे टिप्पणी नहीं करना चाहते. उन्होंने यह भी कहा कि राज ठाकरे का एक शानदार लेख आज ‘सामना’ में प्रकाशित हुआ है. KDMC के घटनाक्रम पर बोलते हुए संजय राऊत ने कहा, ”जो कुछ वहां हुआ, वह उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी पसंद आया होगा, ऐसा उन्हें नहीं लगता.” राउत ने दोहराया कि मुख्यमंत्री राज्य का बॉस होता है और सत्ता उसी के पास होती है.

बीएमसी चुनाव में 20 साल में पहली बार उद्धव ठाकरे का दबदबा खत्म हो गया. बीजेपी और एकनाथ शिंदे ने गठबंधन में चुनाव लड़ा और दोनों दलों ने बहुमत का आंकड़ा पार कर दिया. इस चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने अपने सालों पुराने मतभेद दूर किए और साथ आ गए. लेकिन चुनाव में बीजेपी-शिंदे गठबंधन में वो पीछे रह गए. उद्धव ठाकरे गुट के सांसद संजय राउत ने कहा कि जनता चाहती थी कि दोनों भाई साथ आएं, हमने जनता की इच्छा को पूरा कर दिया. संजय राउत ने दावा किया कि राज ठाकरे के साथ आने से हमारे गठबंधन को फायदा हुआ है. उन्होंने कहा कि हम उम्मीद कर रहे थे कि MNS 20 सीटों पर चुनाव जीतेगी. लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हुआ लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि हमें फायदा नहीं हुआ.

बीजेपी और शिंदे को मिले बहुमत पर उन्होंने कहा, “जादुई आंकड़ा किसी के पास नहीं है. अगर जादुई आंकड़ा होता तो एकनाथ शिंदे के पार्षदों को होटल में बंद करने की नौबत नहीं आती. पार्षदों को होटल में रखने की क्या जरूरत है, जब सरकार आपकी है और आप डिप्टी सीएम हैं. उनको डर है कि हमारे पार्षद टूट सकते हैं.” संजय राउत ने दावा किया, “शिंदे कोशिश कर रहे हैं कि बीजेपी के कुछ टूटे. बीजेपी कोशिश कर रही है कि शिंदे के कुछ टूटे. चार-पांच महानगरपालिका में उनका ये खेल चल रहा है. हम लोग खेल का मजा ले रहे हैं. अभी हमारे पास बहुत टाइम है.”

बीजेपी और शिवसेना की खींचतान के बीच संजय राउत ने बीते मंगलवार को MNS चीफ राज ठाकरे से मुलाकात की. बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन ने मिलकर बीएमसी में ठाकरे के करीब तीन दशकों के वर्चस्व को इस चुनाव में खत्म कर दिया है. बीजेपी और शिवसेना ने मिलकर बीएमसी के जादुई आंकड़े 114 को पार कर दिया है. बीजेपी ने अकेले 89 सीटों पर जीत हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी बनने का खिताब हासिल किया. वहीं सहयोगी शिवसेना ने 29 सीटों पर कब्जा जमाया है. दोनों को आंकड़ा 118 हो जाता है तो बहुमत से चार ज्यादा हैं. जीत के बाद शिवसेना ने मुंबई के पार्षदों को एक लग्जरी होटल में शिफ्ट कर दिया. पार्टी ने इसके पीछे की वजह ओरिएंटेशन वर्कशॉप बताया. एकनाथ शिंदे ये जरूर कह रहे हैं कि मेयर महायुति का बनेगा लेकिन उन्होंने शिवसेना के लिए भी इस पद पर दावा ठोक दिया।

बीजेपी के पार्षद नवनाथ बन ने संजय राउत पर पलटवार करते हुए कहा, “हमें फोन टैपिंग की जरूरत नहीं है लेकिन संजय राउत को ये बताना चाहिए कि जब महाविकास अघाड़ी सत्ता में थी तब एकनाथ शिंदे और उदय सामंत का फोन किसने टैप किया था. हमारे पास पार्षदों का मजबूत समर्थन है और हम ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं हैं.” गौरतलब है कि महाराष्ट्र में भले में ही BMC चुनाव हो गए हों लेकिन राज्य का सियासी पारा अभी भी चढ़ा हुआ है। नेताओं के एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने का सिलसिला जारी है। ऐसे में शिवसेना UBT नेता संजय राउत का ये बयान सियासी गलियारे में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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