टेस्टिंग में ही ढही 21 करोड़ की टंकी, कांग्रेस का हमला, कहा- यह है ‘BJP मॉडल’
सूरत में 21 करोड़ रुपये की पानी की टंकी टेस्टिंग के दौरान ढहने के बाद सियासत तेज हो गई है... कांग्रेस ने इसे भ्रष्टाचार और सिस्टम...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात में हाल ही में दो पानी की टंकियों की घटनाओं ने सुर्खियां बटोरी हैं.. एक तरफ सूरत जिले के मांडवी तालुका के तड़केश्वर गांव में.. गयपगला ग्रुप वाटर सप्लाई स्कीम के तहत 21 करोड़ रुपये की लागत से बनी 15 मीटर ऊंची नई आरसीसी पानी की टंकी टेस्टिंग के दौरान पानी भरते ही पूरी तरह ढह गई.. और तीन मजदूर घायल हो गए.. दूसरी तरफ अहमदाबाद के सारंगपुर इलाके में 70-75 साल पुरानी 10 मंजिला ऊंची ओवरहेड पानी की टंकी इतनी मजबूत निकली कि.. उसे तोड़ने के लिए 200 टन की क्रेन से 8 टन की जेसीबी मशीन ऊपर चढ़ानी पड़ी.. इन दोनों घटनाओं ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है.. कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस मॉडल वर्सेज भाजपा मॉडल का नारा लगाते हुए पुरानी टंकी की मजबूती और नई टंकी के ढहने की तुलना की है..
आपको बता दें कि 19 जनवरी को तड़केश्वर गांव में गयपगला स्कीम की टंकी की क्षमता टेस्टिंग हो रही थी.. टंकी में करीब 9 लाख लीटर पानी भरा गया.. जैसे ही पानी का दबाव बढ़ा.. टंकी भरभराकर ढह गई.. आसपास काम कर रहे तीन मजदूर—अंगूरीबेन राजूभाई आद, अंजलीबेन राजूभाई आद.. और कालीताबेन अनिलभाई वाछलिया घायल हो गए.. वहीं घायल एक महिला सहित तीनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया.. टंकी 15 मीटर ऊंची थी और इसका मकसद 33 से 35 गांवों को पीने का पानी सप्लाई करना था..
जानकारी के मुताबिक टंकी जयंती सुपर कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने बनाई थी.. जांच में पता चला कि सामग्री घटिया इस्तेमाल की गई थी.. लोहे की मात्रा कम और सीमेंट की क्वालिटी खराब थी.. ठेकेदार ने नियमों का पालन नहीं किया था.. जिसके चलते यह हादसा हुआ.. वहीं घटना के बाद गुजरात सरकार ने सख्त कदम उठाए.. उप कार्यकारी अभियंता जय (सोमाभाई) चौधरी.. और तत्कालीन कार्यकारी अभियंता रजनीकांत चौधरी को निलंबित कर दिया गया.. ठेकेदार एजेंसी को बाकी भुगतान रोक दिए गए.. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 316(5), 318(4) और 125(ए) के तहत केस दर्ज किया.. जनता के साथ विश्वासघात, ठगी और जान-माल को खतरे में डालने के आरोप लगा..
वहीं इस मामले में 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया.. जिसमें ठेकेदार बाबूभाई अंबालाल पटेल, उनके पार्टनर जस्मिनभाई बाबूभाई पटेल, साइट इंजीनियर धवलभाई रतिलाल पटेल, मैनेजमेंट पार्टनर जयंतिभाई अंबालाल पटेल, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट बाबूभाई मणिलाल पटेल, सुपरवाइजर जिगरभाई रावजीभाई प्रजापति.. और वाटर सप्लाई विभाग के कार्यकारी अभियंता अंकितभाई परसोतमभाई गरासिया शामिल है.. उप कार्यकारी अभियंता जय चौधरी की तलाश जारी है.. डीवाईएसपी बीके वानर की अगुवाई में सात टीमें छापेमारी कर रही हैं.. विभागीय जांच भी चल रही है.. ताकि दोषियों पर आगे कार्रवाई हो..
वहीं इस घटना को लेकर स्थानीय लोग गुस्से में हैं.. गांववाले कहते हैं कि इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद टंकी एक दिन भी नहीं टिकी.. वे भ्रष्टाचार की शिकायत कर रहे हैं.. मुख्यमंत्री ने भी घटना पर दुख जताया.. और जांच के निर्देश दिए है.. वहीं दूसरी घटना अहमदाबाद के पुराने शहर के सारंगपुर इलाके (सारंगपुर सर्किल के पास, खाड़िया क्षेत्र) में हुई.. यह ओवरहेड वाटर टैंक 70 से 75 साल पुराना था.. लगभग 1950 के दशक में बना होगा.. जब कांग्रेस की सरकार थी.. टैंक 10 मंजिला ऊंची थी.. और 15 लाख लीटर पानी रख सकती थी.. यह खाड़िया और सारंगपुर इलाकों को पीने का पानी सप्लाई करती थी..
अगस्त 2025 में इसे असुरक्षित घोषित कर दिया गया.. अक्टूबर में पानी की सप्लाई बंद कर दी गई.. दिसंबर से तोड़ने का काम शुरू हुआ.. लेकिन टैंक इतनी मजबूत थी कि मजदूरों से ऊपरी हिस्सा टूट ही नहीं रहा था.. सड़कें चारों तरफ होने की वजह से पिलर तोड़कर गिराना मुश्किल.. और खतरनाक था.. क्योंकि यह भीड़भाड़ वाला इलाका है.. पास में कलूपुर रेलवे स्टेशन भी है..
13-16 जनवरी के आसपास अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन ने खास तरीका अपनाया.. 200 टन क्षमता की क्रेन की मदद से 8 टन की जेसीबी मशीन रात में टैंक की छत पर चढ़ाई गई.. फिर जेसीबी से ऊपर से तोड़ना शुरू किया गया.. यह काम बिना ज्यादा ट्रैफिक बाधा के पूरा किया गया.. लोग इसकी मजबूती की तारीफ कर रहे हैं कि 75 साल बाद भी इतनी ठोस थी..
वहीं इन दोनों घटनाओं ने राजनीतिक रंग ले लिया.. कांग्रेस पार्टी ने एक्स (ट्विटर) और फेसबुक पर वीडियो शेयर किए.. एक पोस्ट में लिखा कि एक तरफ कांग्रेस शासन में बनी 70-75 साल पुरानी पानी की टंकी.. जिसे तोड़ने के लिए जेसीबी क्रेन से ऊपर चढ़ानी पड़ी.. दूसरी तरफ भाजपा शासन में बनी 21 करोड़ की टंकी उद्घाटन से पहले ही ढह गई.. कांग्रेस मॉडल vs भाजपा मॉडल.. कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोशी ने भी इस पर टिप्पणी की.. कई कांग्रेस समर्थक और सोशल मीडिया यूजर्स ने पुरानी टंकी की फोटो-वीडियो शेयर कर कहा कि पहले की सरकारें मजबूत निर्माण करती थी..
भाजपा की तरफ से कहा गया कि पुरानी टंकी को अब सुरक्षा के लिहाज से तोड़ना जरूरी था.. नई टंकी के मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो रही है.. भाजपा इसे अलग-अलग घटनाएं बताती है.. और गुजरात मॉडल की विकास योजनाओं की तारीफ करती है.. लेकिन विपक्ष इसे भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण का सबूत बता रहा है.. आपको बता दें कि गुजरात में पानी की समस्या बड़ी है.. कई इलाकों में भूजल स्तर गिरा हुआ है.. नदियों में प्रदूषण है.. गयपगला जैसी स्कीम्स तापी नदी से पानी लेकर गांवों तक पहुंचाती हैं.. 21 करोड़ की लागत में पाइपलाइन, पंपिंग स्टेशन, टंकी सब शामिल होते हैं.. लेकिन अगर निर्माण में लापरवाही हो तो जनता को नुकसान भुगतना पड़ता है..



