शंकराचार्य के अपमान का आरोप, AAP का सूरत में जोरदार विरोध प्रदर्शन

ज्योतिष मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंदजी के कथित अपमान को लेकर आम आदमी पार्टी ने सूरत में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 के दौरान 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के पवित्र स्नान के दिन.. ज्योतिर्मठ (ज्योतिष पीठ) के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ.. कथित दुर्व्यवहार का मामला बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है.. स्वामी जी का आरोप है कि उनकी पालकी रोकी गई, छत्र (ऊपरी छाता) तोड़ा गया.. उनके शिष्यों को पुलिस ने मारा-पीटा और उन्हें संगम स्नान से रोका गया.. और उन्होंने इसको सनातन धर्म और शंकराचार्य परंपरा का अपमान बताया है.. उन्होंने माफी मांगने और सम्मान के साथ स्नान कराने की मांग की.. जिसके लिए वे घटनास्थल पर ही बैठे रहे..

वहीं इस घटना पर विपक्षी दलों ने बीजेपी और योगी सरकार पर सनातन धर्म का अपमान करने का आरोप लगाया.. आम आदमी पार्टी ने सूरत में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया.. और बीजेपी नेताओं से माफी मांगने की मांग की.. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने भी सरकार को घेरा.. वहीं मेला प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा नियमों का पालन कराया गया.. कोई अपमान नहीं हुआ और पालकी ले जाने की अनुमति नहीं थी.. शंकराचार्य उपाधि के इस्तेमाल पर भी नोटिस जारी किया गया.. क्योंकि ज्योतिर्मठ की उत्तराधिकार विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित है..

आदि शंकराचार्य ने हिंदू धर्म की रक्षा और प्रचार के लिए चार मुख्य मठ (पीठ) स्थापित किए थे.. उत्तर में ज्योतिर्मठ (बद्रीनाथ के पास जोशीमठ, उत्तराखंड), दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में पुरी और पश्चिम में द्वारका.. ज्योतिर्मठ को ज्योतिष पीठ भी कहते हैं.. शंकराचार्य इन पीठों के प्रमुख होते हैं.. जिन्हें जगद्गुरु माना जाता है.. वे धार्मिक, दार्शनिक और सामाजिक मुद्दों पर मार्गदर्शन देते हैं..

ज्योतिर्मठ में पिछले दशकों से उत्तराधिकार विवाद चला आ रहा है.. कई दावेदार रहे हैं.. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने खुद को शंकराचार्य घोषित किया है.. उनके समर्थक कहते हैं कि उन्हें उचित प्रक्रिया से पद मिला है.. और कुछ अदालती आदेश भी उनके पक्ष में हैं.. लेकिन विपक्षी दावेदार हैं, विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और कुछ अखाड़ों ने उनकी मान्यता पर सवाल उठाए हैं.. मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि वे राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में शामिल नहीं हुए थे.. और राहुल गांधी को हिंदू धर्म से बाहर निकालने जैसे बयान दे चुके हैं.. यह विवाद उनकी उपाधि पर सवालों का आधार बना..

जानकारी के मुताबिक माघ मेला में मौनी अमावस्या का स्नान बहुत खास माना जाता है.. लाखों श्रद्धालु संगम (गंगा-यमुना-सरस्वती संगम) में डुबकी लगाते हैं.. सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए मेला प्रशासन ने घाटों पर वाहनों/पालकियों पर सख्ती की थी.. कोई वीआईपी पालकी या रथ संगम नाक (नाक का सिरा) तक नहीं ले जा सकता था.. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपनी परंपरा के अनुसार पालकी में संगम स्नान के लिए गए.. उन्होंने तीन दिन पहले व्हाट्सएप पर प्लान शेयर किया था.. प्रशासन कहता है कि उन्होंने लिखित अनुमति नहीं ली.. और प्रतिबंधित रास्ते से पालकी ले गए.. जिससे भीड़ प्रबंधन प्रभावित हो सकता था..

पुलिस/अधिकारियों ने तीन घंटे तक सम्मानपूर्वक पैदल जाने का अनुरोध किया.. लेकिन स्वामी जी ने मना कर दिया.. उनके शिष्यों में धक्का-मुक्की हुई.. स्वामी ने दावा करते हुए कहा कि पालकी रोकी गई, छत्र तोड़ा गया, शिष्यों को लाठीचार्ज किया गया.. 35 शिष्यों को हिरासत में लिया गया.. जिसमें 12 घायल हुए.. वे रात 1 बजे तक इंतजार करते रहे लेकिन कोई सीनियर अधिकारी माफी मांगने या एस्कॉर्ट करने नहीं आया.. और वह संगम तक नहीं पहुंच पाए..

वहीं घटना के बाद स्वामी जी घटनास्थल पर ही बैठ गए.. उन्होंने कहा कि वे कैंप में नहीं लौटेंगे जब तक प्रशासन माफी न मांगे.. और सम्मान के साथ (पालकी/उचित एस्कॉर्ट) स्नान कराए.. उन्होंने शंकराचार्य परंपरा में पालकी का अधिकार बताया.. कुछ रिपोर्ट्स में उन्होंने अन्न-जल त्याग का जिक्र है.. लेकिन एक स्रोत में उन्होंने साफ किया कि भूख हड़ताल नहीं, सिर्फ बैठे हैं.. उन्होंने 35 शिष्यों की हिरासत और हमले का आरोप लगाते हुए मेडिकल जांच और एफआईआर की मांग की.. बाद में हाईकोर्ट जाने की बात कही.. और उन्होंने कहा कि शंकराचार्य को प्रशासन से अनुमति लेने की जरूरत नहीं.. मेरे शिष्यों को बुरी तरह मारा गया.. उन्होंने एक समर्पित कॉरिडोर की मांग भी की.. जो गैर-समझौता वाली है..

प्रयागराज मेला प्रशासन (डिवीजनल कमिश्नर सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार आदि) ने कहा कि कोई अपमान नहीं हुआ है.. सुरक्षा के लिए नियम सबके लिए बराबर है.. लाखों श्रद्धालुओं के बीच पालकी ले जाना खतरनाक होता.. तीन घंटे समझाया गया, पैदल चलने को कहा गया.. मारपीट के आरोप झूठे हैं.. कोई स्नान से नहीं रोका गया.. बस वाहन प्रतिबंधित था..

कैंप की जमीन संगठन के नाम पर आवंटित थी.. स्वामी के व्यक्तिगत नाम पर नहीं.. उन्होंने दूसरा शो-कॉज नोटिस जारी किया.. जिसमें नियम उल्लंघन (अनधिकृत रास्ता, सुरक्षा) पर जमीन रद्द करने, सुविधाएं वापस लेने, मेला क्षेत्र से रोकने आदि की चेतावनी दी..

प्रशासन ने शंकराचार्य उपाधि के इस्तेमाल पर भी नोटिस भेजा.. क्योंकि ज्योतिर्मठ उत्तराधिकार विवाद सुप्रीम कोर्ट में है.. स्वामी जी ने 21 जनवरी को 8 पेज का विस्तृत जवाब दिया.. इसमें नोटिस को अपमानजनक बताया.. तुरंत वापस लेने या कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी.. कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उपाधि इस्तेमाल से नहीं रोका है.. कुछ आदेश उनके पक्ष में हैं.. आरोपों को गलत और बदनामी वाला बताया.. कोई बैरिकेडिंग तोड़ी नहीं गई..परंपरा का पालन किया गया..

 

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