मोदी-मोदी करने के चक्कर में भाजपा की लगी लंका, FIR और जुर्माना, भाजपा बनाम भाजपा
पीएम मोदी ने तिरुवनंतपुरम में एक रैली भी की थी. अब साउथ में मोदी का डंका बजाने के लिए बीजेपी ने उनके स्वागत के लिए शहर भर में फ्लेक्स, बैनर और झंडे लगाए थे। लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ कि बीजेपी के एक बड़े नेता पर FIR दर्ज हो जाती है और बीजेपी पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया जाता है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: हमें तो अपनों ने लूटा गैरों में कहां दम था, मेरी कश्ती वहीं डूबी जहां पानी कम था। राजनीति में कब क्या हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में केरल यात्रा पर थे. वो साउथ इंडिया में अपने लिए चुनावी जमीन तलाशने गए थे।
पीएम मोदी ने तिरुवनंतपुरम में एक रैली भी की थी. अब साउथ में मोदी का डंका बजाने के लिए बीजेपी ने उनके स्वागत के लिए शहर भर में फ्लेक्स, बैनर और झंडे लगाए थे। लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ कि बीजेपी के एक बड़े नेता पर FIR दर्ज हो जाती है और बीजेपी पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया जाता है। और हैरानी की बात तो ये है कि जुर्माना लगाने वाला और कोई नहीं बल्कि बीजेपी के ही मेयर साहब निकलते हैं। तो ऐसा क्या हुआ कि बीजेपी को केरल में पीएम मोदी की रैली कराना इतना भारी पड़ी कि उसपर FIR और लाखों का जुर्माना लगा दिया जाता है और क्यों चुनाव से पहले ही राज्य में बीजेपी बनाम बीजेपी होना लगा हैं।
तिरुवनंतपुरम नगर निगम ने भारतीय जनता पार्टी(BJP) पर 19.7 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। ये जुर्माना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केरल दौरे के दौरान शहर में फुटपाथों पर फ्लेक्स बोर्ड लगाने पर लगाया गया है। बोर्ड लगाने से क्षेत्र के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दरअसल, 23 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केरल यात्रा पर तिरुवनंतपुरम पहुंचे थे. यहां उन्होंने एक रैली भी की थी. पीएम मोदी के इस दौरे को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी की तिरुवनंतपुरम यूनिट ने पीएम मोदी के दौरे से पहले शहर भर में के कई सार्वजनिक स्थानों पर फ्लेक्स बोर्ड, बैनर और पार्टी झंडे लगाए थे। लेकिन बीजेपी शासित नगर निगम ने इसे अवैध माना और अपनी ही पार्टी पर 20 लाख का जुर्माना ठोक दिया.
नगर निगम ने इन्हें अनधिकृत बताते हुए हटाने के निर्देश दिए. आरोप लगाया गया कि बीजेपी जिला समिति ने निर्देशों की अनदेखी की है। लेकिन जब निर्देश देने के बाद भी बैनर नहीं उतरे, तो बड़ी कार्रवाई हुई. ऐसी कार्रवाई जिसने केरल में बीजेपी की जमीन तैयार होने से पहले ही उजड़ गई। नगर निगम ने 19 लाख 70 हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया और औपचारिक नोटिस जारी किया.नोटिस बीजेपी के तिरुवनंतपुरम जिला अध्यक्ष करमना जयन को दिया गया. निगम का कहना है कि बार-बार चेतावनी के बावजूद बैनर नहीं हटाए गए. लेकिन मामला यहीं नहीं रुका. कैंटोनमेंट पुलिस स्टेशन में एफआईआर भी दर्ज की गई जो निगम सचिव की शिकायत पर हुई. मतलब कानून पालन नहीं किया, निर्देशों का नजरअंदाज किया गया जिसके बाद एफआईआर और जुर्माना जैसी कार्रवाई की जाती है।
लेकिन इस पूरे प्रकरण को लेकर जो बात सबसे ज्यादा विचलित करती वो ये है कि एफआईआर और जुर्माने लगाने की जो कार्रवाई हुई वो नगर के मेयर द्वारा की गई और वो मेयर किसी विपक्षी पार्टी से नहीं बल्कि बीजेपी के ही हैं। दिसंबर में हुए नगर निगम चुनाव में तिरुवनंतपुरम में BJP ने 50 सीटें जीती थीं। इसके बाद 26 दिसंबर को BJP के वीवी राजेश को यहां का मेयर बनाया गया था। निगम सचिव जहानगीर एस का कहना है कि यह कोई राजनीतिक कार्रवाई नहीं है. उनके मुताबिक हाईकोर्ट के आदेशों के तहत पहले भी अलग-अलग राजनीतिक दलों पर जुर्माना लगाया जा चुका है. नियम तोड़ने पर कार्रवाई तय है, चाहे पार्टी कोई भी हो. अब देखिए केरल उच्च न्यायालय वर्तमान में सार्वजनिक स्थानों पर अवैध रूप से लगाए गए होर्डिंग्स और फ्लेक्स बोर्ड से संबंधित एक मामले पर विचार कर रहा है और उसने स्थानीय निकायों को इन्हें लगाने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसीलिए निगम अधिकारियों का दावा है कि यह कार्रवाई राजनीति से परे है और हाईकोर्ट के आदेशों के तहत हुई है.
नगर निगम के अधिकारी या मेयर लाख कानून का दावा कर लें। बीजेपी समर्थक इसे कितना ही कानून का राज कहें लेकिन सच्चाई ये है कि यह मामला सिर्फ जुर्माने का नहीं, बल्कि ‘भाजपा बनाम भाजपा’ की सियासी बहस बन गया. इस फैसले ने केरल की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है. विपक्ष इसे दिखावा बता रहा है। कानून लागू करने का ‘नाटक’ बता रहा है। लेकिन इससे संगठन की लापरवाही और अंदरूनी कलह उजागर हुई है। लेकिन हैरानी की बात है कि जब पिछले दिनों पीएम मोदी केरल आए थे तो वो कांग्रेस पर निशाना साध रहे थे।
बीजेपी अक्सर “डबल इंजन” की सरकार का दावा करती है, लेकिन तिरुवनंतपुरम की यह घटना “डबल कन्फ्यूजन” की कहानी कहती दिखती है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि फुटपाथ पर लगे फ्लेक्स हटे या नहीं, सवाल ये है कि तस्वीर क्या संदेश दे रही है। एक तरफ प्रधानमंत्री का दौरा, साउथ में राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश, बड़ी रैली, शक्ति प्रदर्शन और दूसरी तरफ उसी पार्टी की नगर सरकार अपनी ही पार्टी को नोटिस, एफआईआर और लाखों का जुर्माना थमा देती है। जनता के बीच ये संदेश क्या जाता है? यही कि या तो संगठन के भीतर तालमेल नहीं है, या फिर नियमों का पालन केवल मजबूरी में किया जा रहा है, इच्छा से नहीं।
यह मामला इसलिए भी बड़ा है क्योंकि यह चुनावी मौसम से ठीक पहले हुआ है। कार्यकर्ताओं का मनोबल, नेतृत्व की पकड़, संगठन का अनुशासन, सब पर सवाल खड़े होते हैं। क्या स्थानीय नेतृत्व ने जल्दबाज़ी की? क्या ऊपर से समन्वय नहीं था? या फिर अंदर ही अंदर गुटबाज़ी चल रही है? राजनीति में संदेश ही असली ताकत होता है, और यहाँ संदेश गड़बड़ा गया है। पीएम मोदी मंच से विपक्ष को घेर रहे थे, लेकिन केरल की सियासत में सुर्खी कुछ और बन गई। “बीजेपी बनाम बीजेपी”। अब देखना ये है कि पार्टी इसे अनुशासन की मिसाल बनाकर पेश करती है या अंदरूनी दरारों पर पर्दा डालने में जुटती है। क्योंकि चुनावी राजनीति में विरोधी से लड़ाई जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी है अपनों के बीच एकजुट दिखना।



