राष्ट्रपति केअभिभाषण के साथ बजट सत्र का आगाज
संसद में रखा सरकार का एजेंडा, विपक्ष ने एसआईआर व मनरेगा पर चर्चा की मांग की

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू केअभिभाषण के साथ ही बजट सत्र आज से आरंभ हो गया। इससे पहले कल विपक्ष ने कई एसआईआर से लेकर मनरेगा पर चर्चा कराने की मां की है। सत्र को सही से चलाने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष के साथ बैठक की। बुधवार को संसद को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने सरकार की सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने पिछले दशक में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार जैसी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए बजट सत्र 2026-27 के पहले दिन सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और विकसित भारत के लिए केंद्र सरकार के दृष्टिकोण को रेखांकित किया। राष्ट्रपति ने लोकसभा कक्ष में दोनों सदनों के सदस्यों को संबोधित किया, जो 18वीं लोकसभा के सातवें सत्र और राज्यसभा के 270वें सत्र के उद्घाटन दिवस पर एक साथ उपस्थित थे। अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि उन्हें संसद को संबोधित करते हुए प्रसन्नता हो रही है और उन्होंने याद दिलाया कि पिछला वर्ष भारत की तीव्र प्रगति और समृद्ध विरासत का जश्न मनाने के लिए यादगार रहा। उन्होंने उल्लेख किया कि वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे देश में मनाए गए, जिसमें नागरिकों ने बंकिम चंद्र चटर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि मेरी सरकार दलितों, पिछड़ों, आदिवासी समुदाय और सभी के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। सबका साथ सबका विकास का दृष्टिकोण प्रत्येक नागरिक के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। 2014 की शुरुआत में, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं केवल 25 करोड़ नागरिकों तक ही पहुंच पाई थीं। सरकार के प्रयासों से अब लगभग 95 करोड़ भारतीयों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

राजनाथ की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक
सत्र से पहले एजेंडे की रूपरेखा तैयार करने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक हुई। कांग्रेस सांसद मनिकम टैगोर ने कहा कि पार्टी कार्यवाही के दौरान सहयोग का आश्वासन देते हुए कथित वोट चोरी, एसआईआर अभ्यास, धान खरीद और मनरेगा फोकस की बहाली सहित जन-केंद्रित मुद्दों को उठाएगी।
राजकोषीय प्रस्तावों से पहले देश के ज्वलंत मुद्दों का समाधान करे सरकार : इमरान मसूद
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र से पहले, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उसकी प्राथमिकताओं और इरादों पर सवाल उठाए। मसूद ने कहा कि सरकार को राजकोषीय प्रस्तावों को पेश करने से पहले देश के ज्वलंत मुद्दों का समाधान करना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए मसूद ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जिक्र किया और राज्य सरकार की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा, देखते हैं वे इस बजट में क्या लाते हैं। इस समय देश का ज्वलंत मुद्दा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हैं। उत्तर प्रदेश सरकार को उनसे उनकी उपाधि के बारे में पूछने का क्या अधिकार है? भारत की संसद का बजट सत्र आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करने के साथ शुरू होगा। भारत का आर्थिक सर्वेक्षण 29 जनवरी को पेश किया जाएगा, जिसमें 2025-26 के लिए अर्थव्यवस्था का विस्तृत आकलन और अगले वित्तीय वर्ष के लिए अनुमान प्रस्तुत किए जाएंगे। 2026-27 का केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश किया जाना है। सत्र 65 दिनों में फैले 30 सत्रों के साथ 2 अप्रैल को समाप्त होगा। दोनों सदन 13 फरवरी को अवकाश के लिए स्थगित होंगे और 9 मार्च को पुन: सत्र शुरू करेंगे, जिससे स्थायी समितियों को विभिन्न मंत्रालयों के अनुदान अनुरोधों की जांच करने का अवसर मिलेगा।
मसूद ने आगे आरोप लगाया कि पहचान, धर्म और मतदान के अधिकार को आपस में जोडऩे के प्रयास बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा, मतदान करने के लिए आपको यह साबित करना होगा कि आप वैध मतदाता हैं। लेकिन यह पूछना कि आप हिंदू हैं या नहीं, समझ से परे है। वे देश में क्या करना चाहते हैं? वे क्या बदलाव लाना चाहते हैं?
बांग्लादेश ने रद्द किया प्रोजेक्ट इंडियन इकोनॉमिक जोन
ट्रंप के टैरिफ अटैक के बाद भारत को आर्थिक मोर्चा में दूसरा बड़ा झटका
इंडस्ट्रीयल जोन की जगह बंग्लादेश ने टांग दिया डिफेस जोन का बोर्ड
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। बांग्लादेश द्वारा इंडियन इकोनॉमिक ज़ोन प्रोजेक्ट के रद्द होने से भारत के लिए यह सिर्फ़ एक प्रोजेक्ट का नुकसान नहीं है बल्कि रणनीतिक आर्थिक और कूटनीतिक तीनों मोर्चो पर झटका माना जा रहाहै। जिस जमीन पर भारतीय पूंजी से फैक्ट्रियों की नींव पडऩी थी जहां हजारों करोड़ के निवेश और हजारों रोजगार की कहानियां गढ़ी जानी थीं उसी ज़मीन पर अब तोपों गोला बारूद और रक्षा उद्योग का बोर्ड टंग दिया गया है। और यह सब उस देश में हुआ है जिसे भारत पिछले एक दशक से सबसे भरोसेमंद पड़ोसी बताता आया है।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में राष्ट्रीय मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस ने चटगांव मीरसराय में भारत के सहयोग से बनने जा रहे इकोनमिक जोन को बांग्लादेश आर्थिक ज़ोन प्राधिकरण बीईजेडए की एक अहम बैठक में न बनने का एलान कर सभी को चौका दिया है। चटगांव में बंद हुआ यह ज़ोन दरअसल भारतीय प्रभाव के सिमटने की पहली सार्वजनिक घोषणा है। और यह घोषणा बेहद शोर के साथ नहीं बल्कि नीतिगत खामोशी और रणनीतिक बेरुख़ी के साथ की गयी है जो कहीं ज़्यादा खतरनाक है।
अब… डिफेंस इंडस्ट्रीयल जोन: चटगांव-मीरसराय का इंडियन इकोनामिक जोन कागज पर एक औद्योगिक परियोजना थी। लेकिन जमीन पर वह भारत की साफ्ट पावर की प्रयोगशाला। 1000 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में बनने वाले इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 8 से 10 अरब डालर का निवेश माना जा रहा था। इस प्रोजक्ट में टेक्सटाइल, फार्मा, आटो कंपोनेंट्स आदि की कंपनियों को लगना था। बदली परिस्थितियों में ढाका ने साझेदारी नहीं संदेह को चुना।
डिफेंस इंडस्ट्रियल ज़ोन का ऐलान यह बता रहा है कि बांग्लादेश अब अपनी ज़मीन पर भारतीय पूंजी नहीं रणनीतिक हथियार चाहता है। और यह बदलाव तब हुआ जब क्षेत्र में चीन पहले से हथियार बंदरगाह और कर्ज़ के साथ मौजूद है।
घरेलू मोर्चे पर असर
आईईजेड का रद्द होना सिर्फ विदेश नीति का झटका नहीं है। इस प्रोजेक्ट के बंद होने से भारत की ग्रोथ विंडो पर असर पड़ेगा यानि कि भारतीय अर्थव्यवस्था में इस फैसले का निगेटिव इम्पैक्ट आना तय है। क्योंकि विदेशी निवेश पहले ही दबाव में चल रहा है। रुपया डालर के सामने लडख़ड़ा रहा है और सोना चांदी रिकार्ड ऊंचाई पर है। वहीं ईयू ट्रेड डील से सस्ते आयात का एक अनजाना डर भी जन्म ले चुका है और अब पड़ोस में भारतीय उद्योग के लिए दरवाज़े बंद यह सब बजट से ठीक पहले हो रहा है। जहां सरकार मेक इन इंडिया का ढोल पीटने वाली है लेकिन पड़ोसी देश मेक विदाउट इंडिया का बोर्ड टांग चुके हैं।
दोस्ती की पिच पर बेवफाई की बाउंसर
हर राजनीतिक कहानी में एक मोड़ आता है जहां तर्क चुप हो जाते हैं और इशारे बोलने लगते हैं। बांग्लादेश द्वारा इंडियन इकोनॉमिक ज़ोन को रद्द करने की कहानी भी वहीं पहुंच चुकी है। ऊपर से तो यह फैसला औद्योगिक नीति का लगता है। लेकिन भीतर उतरिए तो यह रिश्तों की टूटी हुई हड्डियों की आवाज़ से ज्यादा कुछ नहीं। भारत और बांग्लादेश के रिश्ते भरोसे से शुरू हुए थे। शेख़ हसीना के दौर में भारत ने ढाका को वह समर्थन दिया जो कोई पड़ोसी नहीं देता। राजनीतिक संरक्षण कूटनीतिक ढाल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बचाव। लेकिन राजनीति में हर एहसान ब्याज के साथ लौटता है और कई बार वही ब्याज रिश्ते डुबो देता है।
मणिपुर में पीडि़तों को मिलती रहेगी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने उच्च-स्तरीय समिति का कार्यकाल बढ़ाया
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मणिपुर में राहत और पुनर्वास उपायों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए गठित सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की उच्च-स्तरीय समिति का कार्यकाल 31 जुलाई, 2026 तक बढ़ा दिया, जहां मई 2023 से जातीय हिंसा जारी है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि मामले के तथ्यों को देखते हुए समिति का निरंतरता आवश्यक है और उससे निर्धारित अवधि के भीतर अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने का आग्रह किया। वरिष्ठ अधिवक्ता विभा दत्ता मखीजा द्वारा समिति की ओर से पेश होने पर अदालत को सूचित किया गया कि समिति ने अभी तक अपना निर्धारित कार्य पूरा नहीं किया है, जिसके बाद समय सीमा में विस्तार दिया गया। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरामानी भी उपस्थित थे।
यूजीसी मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त की, क्योंकि शैक्षणिक परिसरों में जाति-आधारित भेदभाव को दूर करने के उद्देश्य से बनाए गए नए ढांचे को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है।
यह घटनाक्रम तब सामने आया जब सामाजिक कार्यकर्ता और उद्यमी राहुल दीवान की ओर से अधिवक्ता पार्थ यादव ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के समक्ष याचिका का जिक्र किया। यादव ने अदालत से मामले पर तत्काल सुनवाई करने का आग्रह करते हुए कहा कि नियमों के लागू होने से भेदभाव होगा और इस मुद्दे पर तत्काल न्यायिक जांच की आवश्यकता है। अनुरोध का जवाब देते हुए, मुख्य न्यायाधीश कांत ने सुनवाई की तारीख जल्द तय करने पर विचार करने की सहमति जताई और वकीलों से याचिका में मौजूद सभी खामियों को दूर करने को कहा ताकि मामले को सूचीबद्ध किया जा सके।
दीवान की याचिका उन कम से कम तीन चुनौतियों में से एक है जो 2026 के नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं। इन नियमों को यूजीसी ने 1& जनवरी को अधिसूचित किया था और इसके तहत 2012 के ढांचे को प्रतिस्थापित किया गया था। इनमें से एक याचिका उत्तर प्रदेश के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पोस्ट-डॉक्टरल शोधकर्ता मृत्युंजय तिवारी ने दायर की है। दूसरी याचिका मंगलवार सुबह अधिवक्ता विनीत जिंदल ने दायर की।
शबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले को लेकर केरल विस में हंगामा
विपक्ष ने सरकार को घेरा, देवस्वोम मंत्री के इस्तीफे पर अड़ा यूडीएफ
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। केरल विधानसभा की कार्यवाही बुधवार को शुरू हुई। विष्णुनाध ने बताया कि देवस्वम मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि वे भी इस साजिश और सोने की चोरी में शामिल हैं। पहले हमारी मांग देवस्वम मंत्री और देवस्वम बोर्ड अध्यक्ष को हटाने की थी, जो पहले ही पूरी हो चुकी है। अब हमारी अगली मांग पर जोर दिया जा रहा है। जो कुछ भी हो रहा है, वह सरकार की जानकारी में है।
राज्य देवस्वम मंत्री (वी एन वासवन) इस साजिश में शामिल थे, और हम इस पर आगे कोई चर्चा नहीं चाहते। हम विधानसभा में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष ने सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले को लेकर केरल सरकार पर अपना हमला तेज कर दिया और राज्य के देवस्वम मंत्री वीएन वासवन के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा। कांग्रेस विधायक सीआर महेश और नजीब कंथापुरम ने लगातार दूसरे दिन केरल विधानसभा में सत्याग्रह जारी रखते हुए सरकार से जवाबदेही और तत्काल कार्रवाई की मांग की। विपक्ष ने मामले के संचालन में गंभीर चूक का आरोप लगाया और कहा कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए मंत्री का इस्तीफा अनिवार्य है।
इस बीच, कांग्रेस विधायक पीसी विष्णुनाध ने कहा कि यूडीएफ सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले को लेकर दूसरे दिन भी केरल विधानसभा में विरोध प्रदर्शन जारी रखेगा और आरोप लगाया कि राज्य के देवस्वम मंत्री वीएन वासवन इस साजिश में शामिल थे। उनके ये बयान विधानसभा में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रं ट (यूडीएफ) के सदस्यों के विरोध प्रदर्शन के बीच आए, जिन्होंने तख्तियां दिखाकर, नारे लगाकर और यहां तक कि एक व्यंग्य गीत गाकर कार्यवाही बाधित की। बाद में, एलडीएफ विधायकों ने भी विधानसभा से वॉकआउट किया। विपक्ष ने सबरीमाला सोने की चोरी मामले में राज्य देवस्वम मंत्री वी एन वासवन के इस्तीफे की मांग की।



