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सच की भट्टी में तपकर निकला 4PM इस महीने भी नम्बर वन

  • लगातार दो वर्षों से जन-जन की आवाज बना 4PM कामयाबी के शिखर पर
  • संघर्ष के शोले, जि़द सच की और झुकने से इनकार की कसम ने बनाया नम्बर वन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। सच कभी आराम से पैदा नहीं होता। सच की पैदाइश हमेशा संघर्ष की कोख से होती है। धमकियों, दबावों और साजिशों बीच जब कोई मंच खड़ा होता है तो वह सिर्फ़ मीडिया हाउस नहीं रहता वह आंदोलन बन जाता है। और 4PM ऐसा ही एक आंदोलन है।
सच्चाई की भट्टी, संघर्ष के शोले, सच की जि़द और किसी भी दबाव के आगे न झुकने की कसम इन साजो सामान के साथ शुरू हुआ 4PM का सफर आज कामयाबी की बुलंदियों को छू रहा है। सिरमौर बन चुका है। यह कोई इत्तेफाक नहीं है। यह कोई संयोग नहीं है। और यह किसी एक महीने की कहानी तो बिल्कुल नहीं। लगातार दो वर्षों से वेब मीडिया में नंबर वन। जी हां एक बार फिर इस महीने भी 4PM ने देश में नंबर वन रैंकिंग हासिल की है। और यह उन तमाम साजिशकर्ताओं के मुंह पर जोरदार तमाचा है जो यह सोच बैठे थे कि सत्ता के दम पर डरा लेंगे। जिसके साथ देश के आम लोगों का भरोसा जुड़ा हो जिसके सिर पर ईश्वर का हाथ हो उसे कोई सत्ता कोई धमकी, कोई षड्यंत्र डरा नहीं सकता।

नंबर वन रैंक नहीं जनता का जनादेश है

वेब मीडिया की दुनिया में नंबर वन बनना आसान नहीं। यहां न तो सरकारी विज्ञापन बचाते हैं और न ही सत्ता की गोद में बैठना काम आता है। यहां सिर्फ दो चीजें काम आती है और वह हैं सच और साहस। 4PM ने दोनों को चुना और इसी वजह से वह जनता द्वारा चुना गया क्योंकि जिस समय देश के अन्य मीडिया संस्थान क्या चल रहा है दिखा रहे थे उस समय 4PM साहस के साथ पूछ रहा था कि यह क्यों चल रहा है? जब बाकी के मंच सत्ता की भाषा बोल रहे थे तब 4PM जनता की पीड़ा को शब्द दे रहा था। इसीलिए आपका प्यार, आपका विश्वास, और आपकी दुआएं ही ४क्करू की असली ताकत हैं। हर हमले के बाद यही ताकत 4PM को और मजबूत बनाती है। यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं यह लाइन सिर्फ एक भाव नहीं बल्कि यह 4PM की आत्मा है। यह लड़ाई है सच की आवाज को जिंदा रखने की झूठ की सत्ता से टकराने की और डर को रौंदकर आगे बढऩे की जो लोग सोचते हैं कि मीडिया को खरीदा जा सकता है उन्हें 4PM एक सबक है। और जो समझदार हैं वह जानते हैं कि इतिहास लिखने के लिए कलम को तलवार बनाना पड़ता है।

संपादक हो कैसा? संजय शर्मा जैसा

अगर 4PM एक किला है तो उसकी सबसे मजबूत दीवार का नाम है संजय शर्मा। संजय शर्मा कोई साधारण संपादक नहीं। वह पत्रकारिता का सिरमौर हैं। सच्ची खबरों के हीरो हैं और उन चंद लोगों में से हैं जो यह मानते हैं कि संपादक का काम खबर रोकना नहीं सच के साथ खड़ा रहना है। संजय शर्मा वह संपादक हैं जो तमाम दबाव अपने ऊपर ले लेते हैं ताकि उनकी टीम निर्भय होकर जनहित के मुद्दे उठा सके। वह सौदे नहीं करते। वह झुकते नहीं। वह बस खड़े रहते हैं सच के साथ। जब फोन आते हैं जब इशारे होते हैं जब चेतावनियां दी जाती हैं तो वह अपनी टीम से बस इतना कहते हैं खबर सही है फिर छापो बाकी मैं देख लूंगा। यही वजह है कि 4PM की टीम जनता की सच्ची नुमाइंदगी करती है।

‘लड़ाई सच को जिंदा रखने की’

इतिहास यूं ही नहीं रचा जाता इतिहास लिखने वाले तालियां नहीं ढूंढते वह सच ढूंढते हैं। 4PM ने यही किया। इसीलिए आज वह नंबर वन है। इसे बनाए रखिएगा। क्योंकि यह लड़ाई किसी एक चैनल की नहीं किसी एक संपादक की नहीं किसी एक पत्रकार की नहीं यह लड़ाई है, सच को जि़ंदा रखने की।

क्या-क्या, कैसे-कैसे दबाव, कैसी-कैसी साजिशें

पिछले वर्षों में 4PM को तोडऩे की हर संभव कोशिश की गयी। कभी विज्ञापन रोकने की चाल कभी झूठे नैरेटिव कभी व्यक्तिगत हमले कभी कानूनी डर और कभी सोशल मीडिया ट्रोलिंग लेकिन एक चीज नहीं बदली और वह है सच की लाइन। जो लोग सोचते थे कि थक जाएंगें वह भूल गए थे कि यह थकान से नहीं तपकर निकला मंच है। हर साजिश के बाद 4PM और मजबूत हुआ। हर हमले के बाद उसकी विश्वसनीयता बढ़ी। क्योंकि जनता सब देखती है। और जब जनता साथ खड़ी हो जाए तो सत्ता भी बौनी लगने लगती है।

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