साबित करो सच्चे हिन्दू हो… 40 दिन में पूरी हो डिमांड’, अविमुक्तेश्वरानंद की योगी को चेतावनी!

अविमुक्तेश्वरानंद ने इन मांगों को पूरा करने के लिए शासन को 40 दिनों का समय दिया है. यह विवाद तब बढ़ा जब प्रशासन ने उनके शंकराचार्य होने का प्रमाणपत्र मांगा.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान को लेकर हुआ विवाद दिन बा दिन गंभीर होता जा रहा है। उस घटना के बाद से एक तरफ जहां विपक्ष बीजेपी सरकार और सीएम योगी को जमकर घेर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ खुद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जमकर हमला रहे हैं।

एक बार फिर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बयान से सियासी पारा हाई हो गया है। दरअसल अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी के विद्या मठ में प्रेस वार्ता के दौरान यूपी के मुख्यमंत्री को अपने हिंदू होने का प्रमाण देने की चुनौती दी. उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से गोमाता को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने और मांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है. अविमुक्तेश्वरानंद ने इन मांगों को पूरा करने के लिए शासन को 40 दिनों का समय दिया है. यह विवाद तब बढ़ा जब प्रशासन ने उनके शंकराचार्य होने का प्रमाणपत्र मांगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 10-11 मार्च तक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे लखनऊ में संतों के समागम के बीच बड़ा फैसला लेंगे.

दरअसल अविमुक्तेश्वरानंद ने दो शर्तें रखी हैं. पहली मांग यह है कि महाराष्ट्र और उत्तराखंड की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी गाय को ‘राज्यमाता’ का आधिकारिक दर्जा मिले. दूसरी मांग मांस निर्यात पर तत्काल रोक लगाने की है. उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत के कुल मांस निर्यात में यूपी की हिस्सेदारी 40% से अधिक है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या रामराज्य का स्वप्न गायों के खून से अर्जित विदेशी मुद्रा पर आधारित होगा?

इतना ही नहीं अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाते हुए कहा कि सारा निर्यात ‘भैंस के मांस’ के नाम पर होता है, लेकिन बिना DNA परीक्षण के इसकी आड़ में गोवंश काटा जा रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य में भैंसों की संख्या और निर्यात की मात्रा में भारी अंतर है. जब तक वधशालाओं और कंटेनरों का वैज्ञानिक परीक्षण अनिवार्य नहीं होता, तब तक इसे सरकार की ‘मौन स्वीकृति’ ही माना जाएगा.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का एक और वीडियो चर्चा में बना हुआ है जिसमें वो प्रसाशन और सरकार पर उन्हें लालचन देने का आरोप लगाते हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह हमें लालच दे रहे थे कि आप ऐसे स्नान कर लीजिए, आपके ऊपर हम फूल बरसा देंगे, अगले वर्षों के लिए एसओपी बना देंगे, चारों शंकराचार्यों के लिए एसओपी बना देंगे।

गौरतलब है कि प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान को लेकर हुए विवाद को लेकर अब खूब सियासी रंग देखने को मिल रहा है और बीजेपी सरकार घिरती हुए नजर आ रही है। ऐसे में अब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा सीएम योगी को चेतावनी देना चर्चा का विषय बना हुआ है।

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