प्रियंका चतुर्वेदी का BJP पर तंज | वंदे मातरम vs वंदे भारत बयान से सियासत गर्म

वंदे मातरम और वंदे भारत को लेकर प्रियंका चतुर्वेदी ने बीजेपी पर तीखा तंज कसा... उनके बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में...  

4पीएम न्यूज नेटवर्कः केंद्र सरकार ने 11 फरवरी 2026 को वंदे मातरम गीत के गायन के लिए नई गाइडलाइन जारी की है.. यह गाइडलाइन गृह मंत्रालय की ओर से जारी की गई है.. जिसमें कहा गया है कि सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सभी छह छंद गाए जाएंगे.. इसकी कुल अवधि 3 मिनट और 10 सेकंड होगी.. अगर किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम और राष्ट्रगान जन गण मन दोनों को गाना हो.. तो पहले ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा.. वहीं इस फैसले के बाद राजनीति गरमा गई है.. शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार पर तंज कसा है.. और उन्होंने कहा कि भाजपा वाले पहले ‘वंदे मातरम’ और ‘वंदे भारत’ ट्रेन में फर्क सीख लें.. साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव बीतने के बाद देखते हैं सरकार क्या करती है.. यह गाइडलाइन ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर जारी की गई है.. इसमें स्कूलों और शिक्षण संस्थानों से अपील की गई है कि.. वे दैनिक सभाओं में इस गीत को गाएं.. गायन के दौरान सभी को सावधान मुद्रा में खड़े रहना होगा..

‘वंदे मातरम’ भारत का राष्ट्रीय गीत है.. इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में लिखा था.. यह गीत उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल है.. गीत में मातृभूमि की स्तुति है.. और यह स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बना.. मूल गीत में सात छंद हैं.. लेकिन आमतौर पर पहले दो छंद ही गाए जाते हैं.. कांग्रेस ने 1937 में इसे राष्ट्रीय गीत घोषित किया.. लेकिन सभी छंदों को शामिल नहीं किया.. क्योंकि कुछ छंदों में धार्मिक संदर्भ थे.. अब केंद्र सरकार ने सभी छह छंदों को आधिकारिक रूप से अपनाया है.. यह फैसला गीत की 150वीं वर्षगांठ पर लिया गया है.. जिसको लेकर गृह मंत्रालय का कहना है कि इससे गीत की पूरी भावना को सम्मान मिलेगा.. ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से अलग है.. लेकिन दोनों ही राष्ट्रीय प्रतीक हैं.. स्वतंत्रता संग्राम में ‘वंदे मातरम’ का नारा बहुत लोकप्रिय था.. भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस जैसे स्वतंत्रता सेनानी इसे गाते थे.. आज भी यह गीत देशभक्ति का प्रतीक है..

आपको बता दें कि गृह मंत्रालय की गाइडलाइन में कहा गया है कि ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंद गाए जाएंगे.. इसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड होगी.. यह गीत प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों में गाया जाएगा..  जिसमें राष्ट्रीय ध्वज फहराना, राष्ट्रपति और राज्यपालों के आगमन-प्रस्थान, उनके भाषण शामिल हैं.. अगर ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान दोनों गाए जाएं, तो पहले ‘वंदे मातरम’ आएगा.. गायन के दौरान सभी को सावधान मुद्रा में खड़े रहना होगा.. यह नियम सिनेमा हॉल में लागू नहीं है.. वहां खड़े होना जरूरी नहीं.. स्कूलों और शिक्षण संस्थानों से अपील की गई है कि वे दैनिक सभाओं में गीत को शामिल करें.. गाइडलाइन का मकसद गीत को सम्मान देना और एकरूपता लाना है.. पहले राष्ट्रगान के लिए नियम थे.. लेकिन ‘वंदे मातरम’ के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं थे.. अब यह औपचारिक हो गया है.. गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों को निर्देश भेजे हैं कि इसे लागू करें..

वहीं नई गाइडलाइन जारी होने के बाद राजनीति तेज हो गई है.. शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एक निजी चैनल से बातचीत में सरकार पर तंज कसा.. उन्होंने कहा कि छह छंद हों या चार या दो.. ‘वंदे मातरम’ गाना जरूरी है.. लेकिन भाजपा वाले पहले ‘वंदे मातरम’ और ‘वंदे भारत’ ट्रेन में फर्क सीख लें.. उन्होंने संसद में हुई चर्चा का जिक्र किया.. जहां भाजपा ने सत्र के दौरान ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाने पर रोक लगाई थी.. शिवसेना ने विरोध किया तो रोक हटा ली गई.. प्रियंका ने कहा कि भाजपा को चर्चा के दौरान भी ‘वंदे मातरम’ और ‘वंदे भारत’ का फर्क नहीं पता था.. उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव बीत जाएं, उसके बाद देखते हैं.. सरकार क्या करती है.. यह तंज भाजपा की चुनावी रणनीति पर था.. प्रियंका चतुर्वेदी शिवसेना (यूबीटी) की प्रमुख प्रवक्ता हैं.. और अक्सर सरकार की नीतियों पर हमला करती हैं..

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि छह स्टेंजा हों या चार हों या दो स्टेंजा हों.. जो भी गाया जाए, वंदे मातरम गाना जरूरी है.. क्योंकि जब हमारी चर्चा चल रही थी.. पहले तो बीजेपी से फरमान आया कि सेशन के दौरान कोई ‘वंदे मातरम’ के नारे नहीं लगा सकता.. हमने जब उस पर आपत्ति जताई तो यह वापस लिया गया.. दूसरी बात, जब बीजेपी चर्चा कर रही थी तब उन्हें वंदे मातरम और वंदे भारत में ही अंतर पता नहीं था.. पहले गाया जाए या बाद में गाया जाए.. हम पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद देखेंगे.. उनका यह बयान व्यंग्यात्मक था.. वे कह रही थीं कि सरकार चुनावी फायदे के लिए ऐसे फैसले ले रही है.. प्रियंका ने संसद में ‘वंदे मातरम’ पर बहस का जिक्र किया.. जहां उन्होंने कहा कि 2014 के बाद इतिहास की गलत व्याख्या हो रही है.. और उन्होंने व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी पर तंज कसा.. और कहा कि संसद को सही इतिहास सिखाना चाहिए..

आपको बता दें कि वंदे मातरम बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को लिखा था.. यह संस्कृत और बांग्ला में है.. गीत में भारत माता की स्तुति है.. स्वतंत्रता संग्राम में यह नारा बना.. 1896 में कांग्रेस सत्र में पहली बार गाया गया.. 1905 में बंगाल विभाजन के खिलाफ आंदोलन में लोकप्रिय हुआ.. ब्रिटिश सरकार ने इसे प्रतिबंधित किया.. लेकिन लोग गाते रहे.. 1937 में कांग्रेस ने इसे राष्ट्रीय गीत बनाया.. लेकिन पहले दो छंद ही अपनाए.. क्योंकि बाकी में हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र था.. मुस्लिम लीग ने विरोध किया था.. स्वतंत्र भारत में ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान बना, ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत.. 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसे गाना अनिवार्य नहीं.. लेकिन सम्मान जरूरी है.. अब नई गाइडलाइन से सभी छंद शामिल हो गए.. जो 150वीं वर्षगांठ पर है..

गृह मंत्रालय का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ को एकरूप सम्मान मिले.. इसलिए गाइडलाइन जारी की गई.. पहले नियम अस्पष्ट थे.. राष्ट्रगान के लिए सख्त नियम हैं.. ‘वंदे मातरम’ के लिए ऐसा नहीं था.. अब इसे औपचारिक बनाया गया है.. 150वीं वर्षगांठ पर यह कदम उठाया गया.. सरकार का मकसद देशभक्ति बढ़ाना है.. स्कूलों में गाने से युवाओं में राष्ट्रीय भावना आएगी.. लेकिन विपक्ष इसे चुनावी स्टंट बता रहा है.. पश्चिम बंगाल में चुनाव होने वाले हैं.. जहां ‘वंदे मातरम’ का इतिहास गहरा है.. भाजपा वहां राष्ट्रवाद पर जोर दे रही है.. प्रियंका चतुर्वेदी का तंज इसी पर है..

‘जन गण मन’ राष्ट्रगान है.. जिसे रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा.. इसे 52 सेकंड में गाया जाता है.. खड़े रहना और सम्मान अनिवार्य है.. अपमान पर सजा है.. ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत है, जो सम्मान का प्रतीक है.. इसे गाना अनिवार्य नहीं था.. लेकिन अब गाइडलाइन से नियम बने हैं.. दोनों को एक साथ गाने पर ‘वंदे मातरम’ पहले आएगा.. सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान पर सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में खड़े रहना वैकल्पिक बना दिया.. ‘वंदे मातरम’ पर भी ऐसा ही है.. लेकिन सरकारी कार्यक्रमों में नियम सख्त हैं..

प्रियंका चतुर्वेदी शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद हैं.. वे पहले कांग्रेस में थी.. लेकिन 2019 में शिवसेना में शामिल हुईं.. वे पार्टी की प्रमुख प्रवक्ता हैं और संसद में जोरदार बहस करती हैं.. वे महिलाओं के अधिकार, इतिहास और राष्ट्रवाद पर बोलती हैं.. हाल में उन्होंने ‘वंदे मातरम’ पर बहस में कहा कि 2014 से फेक नैरेटिव फैलाए जा रहे हैं.. उन्होंने व्हाट्सएप इतिहास पर तंज कसा और कहा कि संसद को सही इतिहास सिखाना चाहिए.. वे पश्चिम बंगाल चुनावों पर भी नजर रखती हैं.. क्योंकि शिवसेना वहां भी सक्रिय है.. उनका तंज भाजपा की चुनावी रणनीति पर है..

पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.. भाजपा वहां ममता बनर्जी की टीएमसी को चुनौती दे रही है.. ‘वंदे मातरम’ बंगाल से जुड़ा है.. क्योंकि बंकिम चंद्र बंगाली थे.. भाजपा राष्ट्रवाद पर जोर देती है.. प्रियंका का कहना है कि यह गाइडलाइन चुनावी है.. चुनाव बीतने के बाद देखते हैं.. बंगाल में ‘वंदे मातरम’ का इतिहास है.. भाजपा इसे हिंदुत्व से जोड़ती है, जबकि विपक्ष इसे राजनीति बता रहा है..

 

Related Articles

Back to top button