बीजेपी नेता ने मुस्लिम महिलाओं को नहीं बांटे कंबल, कांग्रेस ने खोल दिए धागे
बीजेपी राज में नेताओं मनमानी चल रही है। यहाँ तक कि जाति मजहब को लेकर हो रहे भेदभाव में बीजेपी नेता इस कदर मसरूफ हो चुके हैं जिसकी कोई हद नहीं है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बीजेपी राज में नेताओं मनमानी चल रही है। यहाँ तक कि जाति मजहब को लेकर हो रहे भेदभाव में बीजेपी नेता इस कदर मसरूफ हो चुके हैं जिसकी कोई हद नहीं है।
नफरत का बीज बोन वाले ये बीजेपी के नेता अब मंचों से खुलेआम एक ही विशेष समुदाय को टारगेट करते हुए नजर आ रहे हैं। इसी बीच राजस्थान के टोंक जिले में एक शर्मनाक घटना घटी है, जहां पूर्व बीजेपी सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने ठंड से बचाव के लिए कंबल बांटने के कार्यक्रम में मुस्लिम महिलाओं से उनका नाम और धर्म पूछा, और जैसे ही पता चला कि वे मुस्लिम हैं, कंबल छीन लिया।
यह घटना तब हुई जब जौनपुरिया अपने निजी फंड से गरीबों को कंबल दे रहे थे। वीडियो में साफ दिखता है कि वे कहते हैं, “जो मोदी को गाली देने वाले हैं, उन्हें लेने का हक नहीं है।” उन्होंने अपने समर्थकों से भी नाराजगी जताई कि मुस्लिमों को क्यों बुलाया गया। घटना का वीडियो जमकर वायरल हुआ। जिसे लेकर विपक्ष और आम जनता में भारी आक्रोश देखने को मिला। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर जमकर शेयर किया गया।
वहीं इस वीडियो को शेयर करते हुए कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने जोरदार हमला बोला। वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा कि BJP और RSS की मानवीय दृष्टिकोण और संवेदनाओं की व्याख्या में करुणा की बजाय नफरत झलकती है। एक गरीब, ज़रूरतमंद महिला को कंबल देने से वंचित करना और उसका अपमान करना बेहद निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव करना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन भी है। दो बार सांसद रह चुके और क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया जी से अपेक्षा थी कि वे मानवीय संवेदनशीलता दिखाते।
इस वीडियो से साफ जाहिर होता है कि बीजेपी के नेता धर्म के आधार पर भेदभाव कर रहे हैं, जो देश के संविधान और समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। मोदी सरकार “सबका साथ, सबका विकास” का नारा देती है, लेकिन उसके नेता जमीन पर मुस्लिमों को अलग-थलग करने का काम कर रहे हैं।
यह घटना बीजेपी की सांप्रदायिक राजनीति को उजागर करती है, जहां मदद भी धर्म देखकर दी जाती है। जौनपुरिया, जो टोंक-सवाई माधोपुर से दो बार सांसद रह चुके हैं, और जिनकी मोदी ने “मन की बात” में तारीफ की थी, अब खुद मोदी के नाम पर भेदभाव फैला रहे हैं। इससे पता चलता है कि बीजेपी में ऊपर से नीचे तक धार्मिक विभाजन की सोच कितनी गहरी है। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने इसकी कड़ी निंदा की है, और कहा कि बीजेपी का असली चेहरा अब सबके सामने आ गया है। पायलट ने इसे बीजेपी की सांप्रदायिक मानसिकता का सबूत बताया, और कहा कि ऐसे नेता देश की एकता को तोड़ रहे हैं।
वहीं इस वीडियो में दिख रही महिला की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। महिला ने बताया है कि कैसे ना सिर्फ उसके साथ बल्कि कंबल लेने पहुंची अन्य महिलाओं पर भी बीजेपी नेता भड़क उठे।
वहीं इस वीडियो पर विपक्षी खेमे के एक के बाद प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं ईसिस बीच टोंक सवाई माधोपुर से कांग्रेस MP हरीश चंद्र मीणा ने सुखबीर सिंह का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया है। कांग्रेस MP ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ‘गरीब और असहाय महिलाओं को कंबल देकर फिर उनका नाम पूछकर, उनके धर्म के आधार पर कंबल वापस लेना, यह बेहद शर्मनाक और अमानवीय कृत्य है।’
हरीश चंद्र मीणा ने आगे लिखा, ‘राजनीति सेवा का माध्यम होती है, अपमान और भेदभाव का नहीं। जनता जनप्रतिनिधियों को इसलिए चुनती है कि वे हर वर्ग, हर धर्म और हर जरूरतमंद व्यक्ति के साथ समान व्यवहार करें, न कि किसी की गरीबी और मजबूरी का मजाक बनाएं।’
यह पहली बार नहीं है जब बीजेपी के नेता मुस्लिमों के खिलाफ ऐसी हरकत कर रहे हैं; पहले भी कई मामले सामने आए हैं जहां सरकारी योजनाओं या मदद में धर्म देखा गया। राजस्थान में जहां कांग्रेस की सरकार है, वहां भी बीजेपी के पूर्व नेता ऐसा कर रहे हैं, जो दिखाता है कि पार्टी की विचारधारा कितनी विषाक्त है। इस घटना से मुस्लिम समुदाय में डर और गुस्सा फैल रहा है, क्योंकि वे सोचते हैं कि अगर एक पूर्व सांसद ऐसा कर सकता है, तो बाकी क्या करेंगे। बीजेपी को इस पर सफाई देनी चाहिए, लेकिन पार्टी चुप है, जो बताता है कि वह ऐसे भेदभाव को बढ़ावा देती है।
देश में जहां ठंड से लोग मर रहे हैं, वहां मदद को राजनीति और धर्म से जोड़ना अमानवीय है। जौनपुरिया ने कहा कि यह उनका निजी कार्यक्रम है, इसलिए वे चुन सकते हैं किसे दें, लेकिन क्या यह सही है? नहीं, क्योंकि वे एक सार्वजनिक व्यक्ति हैं, और उनकी हरकत पार्टी की छवि बनाती है। पायलट ने इसे “बीजेपी का मास्क उतरना” कहा, और सही कहा, क्योंकि मोदी सरकार के दस सालों में मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव बढ़ा है। सीएए-एनआरसी से लेकर लव जिहाद के नाम पर कानून तक, सब मुस्लिमों को निशाना बनाते हैं। इस घटना से साफ है कि बीजेपी की राजनीति हिंदू-मुस्लिम विभाजन पर टिकी है, और वे वोट बैंक के लिए कुछ भी कर सकते हैं।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसकी निंदा की है, और मांग की है कि जौनपुरिया पर कार्रवाई हो। लेकिन बीजेपी की चुप्पी बताती है कि पार्टी ऐसे नेताओं को बचाती है। यह घटना देश को सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम सच में एक सेकुलर राष्ट्र हैं, या बीजेपी की सत्ता में धर्म आधारित शासन चल रहा है। मुस्लिम महिलाओं का अपमान पूरे समुदाय का अपमान है, और इससे समाज में नफरत बढ़ेगी।
बीजेपी को अपनी विचारधारा बदलनी चाहिए, वरना देश की एकता खतरे में पड़ेगी। पायलट ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेगी, और सभी को बराबर मदद मिलेगी। लेकिन केंद्र में बीजेपी है, जो ऐसे नेताओं को बढ़ावा देती है। कुल मिलाकर, यह घटना बीजेपी की सांप्रदायिकता का एक और उदाहरण है, जो देश को पीछे ले जा रही है।



