राजकोट के जंगलेश्वर में बड़ी कार्रवाई | 1489 घरों पर चला बुलडोजर

गुजरात के Rajkot के जंगलेश्वर इलाके में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई के तहत 1489 घरों पर बुलडोजर चलाया गया... कार्रवाई के दौरान कई परिवार बेघर हो गए...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः राजकोट शहर गुजरात का एक प्रमुख औद्योगिक.. और सांस्कृतिक केंद्र, इन दिनों एक बड़ी घटना का गवाह बन रहा है.. शहर के जंगलेश्वर इलाके में राजकोट नगर निगम ने अजी नदी के किनारे.. और टाउन प्लानिंग रोड पर बने सैकड़ों अवैध मकानों.. और दुकानों को तोड़ने का अभियान शुरू कर दिया है.. यह अभियान 23 फरवरी को शुरू हुआ.. जो शहर के इतिहास में सबसे बड़ा डिमोलिशन ड्राइव माना जा रहा है.. जानकारी के अनुसार कुल 1,489 अवैध संरचनाओं को निशाना बनाया गया है.. जिनमें ज्यादातर गरीब परिवारों के घर.. और छोटी-मोटी दुकानें शामिल हैं.. इस कार्रवाई ने इलाके को तनावपूर्ण माहौल में बदल दिया है.. जहां एक तरफ विकास की बात हो रही है.. वहीं दूसरी तरफ हजारों लोग बेघर होने के दर्द से गुजर रहे हैं..

वहीं यह घटना सिर्फ एक डिमोलिशन नहीं है.. बल्कि शहर के विकास, पर्यावरण संरक्षण.. और गरीबों के अधिकारों के बीच की जटिल लड़ाई का प्रतीक है.. आरएमसी के मुताबिक यह अभियान अजी नदी को साफ करने.. और टीपी रोड को चौड़ा करने के लिए जरूरी है.. ताकि बाढ़ की समस्या से निपटा जा सके.. और शहर का ट्रैफिक सुधारा जा सके.. लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि.. रमजान के पवित्र महीने में यह कार्रवाई उनके लिए एक बड़ा सदमा है.. वे दशकों से यहां रह रहे हैं.. टैक्स भर रहे हैं.. लेकिन अब अचानक बेघर हो गए हैं.. इस दर्द को स्थानीय रैपर चांदमियां फकीर ने अपने गाने ‘जस्टिस फॉर जंगलेश्वर’ में बयां किया है.. जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है..

जंगलेश्वर राजकोट शहर के पूर्वी हिस्से में स्थित एक घनी आबादी वाला इलाका है.. यह अजी नदी के किनारे बसा है.. जो शहर को पूर्व और पश्चिम में बांटती है.. इतिहास में यह इलाका मुख्य रूप से ग्रामीण था.. लेकिन पिछले 4-5 दशकों में यहां तेजी से शहरीकरण हुआ.. गरीब मजदूर, छोटे व्यापारी और प्रवासी परिवार यहां सस्ते मकान बनाकर बस गए.. आरएमसी के रिकॉर्ड्स के अनुसार.. इनमें से ज्यादातर संरचनाएं सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनी हैं.. नदी के किनारे 992 मकान और टीपी रोड पर 497 दुकानें और घर शामिल हैं.. जो कुल 87 हडार वर्ग मीटर क्षेत्र को कवर करते हैं..

इस इलाके में अतिक्रमण की समस्या पुरानी है.. पिछले 2-3 सालों में राजकोट में भारी बारिश के कारण अजी नदी में बाढ़ आई.. जिसने शहर के कई हिस्सों को प्रभावित किया.. अधिकारियों का कहना है कि नदी के बेड पर बने इन अवैध मकानों के कारण पानी का बहाव रुक जाता है.. जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है.. पिछले 5 सालों में आरएमसी ने 800 से ज्यादा परिवारों को आवास योजना के तहत वैकल्पिक घर दिए हैं.. लेकिन अभी भी हजारों लोग यहां बसे हुए हैं.. गुजरात हाई कोर्ट में इस डिमोलिशन के खिलाफ याचिका दायर की गई थी.. लेकिन कोई स्टे ऑर्डर नहीं मिला.. जिससे अभियान को हरी झंडी मिल गई..

जंगलेश्वर की आबादी मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल है.. लेकिन यहां हिंदू परिवार भी रहते हैं.. अनुमान है कि 40 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हो सकते हैं.. कई निवासी दावा करते हैं कि वे 35-40 साल से यहां रह रहे हैं.. बिजली और पानी के बिल भर रहे हैं.. और नगर निगम को टैक्स दे रहे हैं.. लेकिन कानूनी रूप से यह जमीन सरकारी है.. और विकास योजनाओं के लिए इसे खाली करना जरूरी बताया जा रहा है.. समान घटनाओं में जामनगर में रंगमती नदी पर 600 अवैध संरचनाओं को 2025 में तोड़ा गया था.. जहां भी रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट का प्लान है..

आरएमसी ने इस अभियान की तैयारी महीनों से की थी.. 23 फरवरी को सुबह-सुबह शुरू हुए इस ड्राइव में 64 से ज्यादा बुलडोजर, जेसीबी मशीनें, ट्रैक्टर.. और डंपर लगाए गए हैं.. इलाके को 7 जोनों में बांटा गया है.. जहां अलग-अलग टीमें काम कर रही हैं.. म्यूनिसिपल कमिश्नर तुषार सुमेरा खुद कंट्रोल रूम से निगरानी कर रहे हैं.. पहले दिन ही करीब 350 संरचनाओं को तोड़ा गया.. और अभियान 3-4 दिनों में पूरा होने की उम्मीद है.. आपको बता दें कि अजी नदी को साफ करना.. टीपी रोड को 15 मीटर चौड़ा करना.. और शहर को बाढ़ से बचाना.. आरएमसी का प्लान अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट जैसा अजी रिवरफ्रंट विकसित करने का है.. इससे ट्रैफिक सुगम होगा और पर्यावरण बेहतर होगा.. लेकिन निवासियों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त नोटिस नहीं दिया गया.. कुछ को सिर्फ 3 दिन पहले सूचना मिली.. जबकि कई ने खुद ही अपने घर तोड़ने शुरू कर दिए.. 21 फरवरी तक 224 परिवारों ने स्वेच्छा से घर खाली कर दिए थे..

जानकारी के अनुसार आरएमसी ने निवासियों की मदद के लिए ट्रैक्टर और लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया है.. ताकि वे अपना सामान सुरक्षित स्थान पर ले जा सकें.. पुलिस घर-घर जाकर लोगों को समझा रही है.. और कोई अप्रिय घटना न हो.. इसके लिए धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखा जा रहा है.. फिर भी, सड़कों पर बुजुर्ग, महिलाएं.. और बच्चे अपने सामान के साथ खड़े नजर आ रहे हैं.. जो दिल दुखाने वाला नजारा है..

वहीं इस अभियान की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं.. करीब 3 हजार पुलिसकर्मी तैनात हैं.. जिनमें डीआईजी, 4 डीसीपी, 11 एसीपी, 37 इंस्पेक्टर और सैकड़ों कांस्टेबल शामिल हैं.. राजकोट के अलावा सुरेंद्रनगर, जामनगर और मोरबी से अतिरिक्त फोर्स बुलाई गई है.. रैपिड एक्शन फोर्स. स्टेट रिजर्व पुलिस, क्विक रिस्पॉन्स टीम, स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप,, और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर मौजूद हैं.. ड्रोन से निगरानी हो रही है, वॉटर कैनन, शील्ड्स और टियर गैस तैयार रखी गई हैं.. बॉडी कैमरों से सब रिकॉर्ड किया जा रहा है..

आपको बता दें कि शहर को 23 से 25 फरवरी तक नो-ड्रोन फ्लाई जोन घोषित किया गया है.. और 26 फरवरी तक 4 या उससे ज्यादा लोगों के शादी और अंतिम संस्कार को छोड़कर इकट्ठा होने पर पाबंदी है.. पुलिस का कहना है कि आतंकवादी या असामाजिक तत्वों से खतरा हो सकता है.. इसलिए ये कदम उठाए गए हैं.. अब तक अभियान शांतिपूर्ण रहा है.. कोई बड़ा विरोध नहीं हुआ.. जंगलेश्वर के लोग इस कार्रवाई से सहमत तो हैं.. लेकिन टाइमिंग से नाराज हैं.. रमजान 2026 में 17-18 फरवरी से शुरू हुआ है, जो मार्च तक चलेगा.. इस पवित्र महीने में लोग रोजे रखते हैं, त्योहार मनाते हैं.. लेकिन अब घर तोड़ने की वजह से उनका उत्साह खत्म हो गया है..

वहीं कई परिवार खुद हथौड़ों, ड्रिल और मशीनों से अपने घर तोड़ रहे हैं.. ताकि बुलडोजर से होने वाले नुकसान से बच सकें.. सड़कों पर सामान के ढेर लगे हैं.. बच्चे और बुजुर्ग हैरान-परेशान घूम रहे हैं.. व्यापार ठप है, क्योंकि रमजान में दुकानें धीमी चलती हैं.. निवासियों का सवाल है.. विकास की सड़कें हमेशा गरीबों के घरों से क्यों गुजरती हैं.. क्या सरकार सिर्फ बड़े उद्योगपतियों के लिए है..

 

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