मदरसे पर विवादित बयान देकर फंस गए नितेश राणे, विपक्ष ने कर दिया बेनकाब
भाजपा राज अपने राजनीतिक फायदे के लिए जमकर हिंदू-मुसलमान किया जा रहा है। भाजपा नेता एक ही जाति विशेष को टारगेट करते हुए नजर आ रहे हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज अपने राजनीतिक फायदे के लिए जमकर हिंदू-मुसलमान किया जा रहा है। भाजपा नेता एक ही जाति विशेष को टारगेट करते हुए नजर आ रहे हैं।
आलम ये है कि लोगों की नमाज और उनकी शिक्षा पर भी खूब सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच महाराष्ट्र के मालेगांव नगर निगम कार्यालय परिसर में नमाज़ अदा किए जाने को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। अपने तीखे बयानों के कारण सुर्खियों में रहने वाले फडणवीस सरकार के मंत्री नितेश राणे इस मुृद्दें को लेकर भड़क उठे हैं। उन्होंने नगर निगम कार्यालय में नमाज पढ़े जाने का विरोध करते हुए मदरसों को लेकर बड़ा ही विवादित बयान दे डाला है। उनका बयान सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
नितेश राणे ने मालेगांव नगर निगम में हुई घटना पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने प्रतिनिधियों को शहर के विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए चुना है, न कि सरकारी भवनों में नमाज पढ़ने के लिए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “चुनाव के वक्त ये लोग ‘जय भीम’ का नारा लगाते हैं, लेकिन चुनाव जीतते ही ‘जय मीम’ पर उतर आते हैं और टीपू सुल्तान की फोटो लगाने लगते हैं।” राणे ने मांग की कि जिन कर्मचारियों ने कार्यालय परिसर का उपयोग नमाज के लिए किया है, उन्हें तत्काल सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि यदि इतनी सारी मस्जिदें मौजूद हैं, तो सरकारी इमारत में नमाज पढ़ने की क्या आवश्यकता है?
मदरसों पर कड़ा रुख अपनाते हुए नितेश राणे ने उन्हें ‘आतंकवादी तैयार करने का अड्डा’ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि मदरसों में शिक्षा का कोई वास्तविक संबंध नहीं है और वहां केवल धार्मिक कट्टरता सिखाई जाती है। राणे ने मुख्यमंत्री से मांग की कि राज्य के सभी मदरसों को बंद कर उन्हें स्कूलों में बदल दिया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि कुरान की शिक्षा के लिए मस्जिदें पर्याप्त हैं और सरकारी अनुदान पर चलने वाले संस्थानों में केवल आधुनिक और मराठी माध्यम की शिक्षा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि क्या किसी इस्लामिक देश में भगवद गीता सिखाने की अनुमति इसी तरह दी जाती?
यह बयान “फिर” विवादित इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि नितेश राणे पहले भी मदरसों पर बोल चुके हैं। जुलाई 2025 में उन्होंने कहा था कि मदरसों में उर्दू की जगह मराठी पढ़ाई जानी चाहिए, वरना वहां से “बंदूक ही मिलती है”। उन्होंने अजान भी मराठी में देने की बात कही थी। उस समय भी विपक्ष ने उन्हें कम्युनल भावनाएं भड़काने का आरोप लगाया था। नितेश राणे सिंधुदुर्ग जिले से विधायक हैं और महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार में मंत्री हैं। वे अक्सर मजबूत बयान देते रहते हैं जो सुर्खियां बन जाते हैं। अब इस बयान पर विपक्ष ने तेजी से जवाब दिया।
इस बयान को लेकर ने बयानबाजियां शुरू कर दी हैं। इसी कड़ी में सपा नेता अबू आसीम आजमी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए नितेश राणे को जमकर घेरा। समाजवादी पार्टी के अबू आसीम अजमी ने कहा कि भारत के किसी भी मदरसे में आतंकवाद की गतिविधि नहीं होती। उन्होंने सुझाव दिया कि सीसीटीवी लगाकर जांच कर लो, अगर कुछ गलत मिले तो ठीक है, लेकिन कुछ नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि वे खुद वहां रहकर खाना खाकर साबित करेंगे।
सपा नेता ही नहीं अन्य दल के नेता भी विवादित बयान देने वाले नितेश राणे के बयान पर एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान ने कहा कि नितेश राणे झूठ बोलने की आदत डाल चुके हैं। उन्होंने पूछा कि मदरसों से कितने बड़े-बड़े विद्वान निकले हैं, आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने वाले लोग क्या आतंकवादी थे? उन्होंने कहा कि नितेश राणे को मदरसों का इतिहास नहीं पता।
अब भले ही बीजेपी लीडर मदरसों को लेकर ऐसे आरोप लगा रहे हों लेकिन असल में हकीकत क्या है ये सब बखूबी जानते हैं। ज्यादातर गरीब परिवारों के बच्चे यहां मुफ्त पढ़ते हैं क्योंकि घर में स्कूल की फीस नहीं भर पाते। कुछ मदरसों में अब विज्ञान, गणित, हिंदी, अंग्रेजी जैसी आधुनिक पढ़ाई भी होती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सबसे ज्यादा मदरसे हैं। असम और उत्तर प्रदेश सरकारों ने मदरसों का सर्वे किया और कुछ को स्कूल में बदलने की कोशिश की है।
इस पूरे मामले में राजनीति साफ दिख रही है। महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार है और विधानसभा चुनाव कुछ समय पहले हुए हैं। विपक्ष कह रहा है कि नितेश राणे वोटों के लिए हिंदू-मुस्लिम बांटने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं बीजेपी समर्थक कहते हैं कि मदरसों में सुधार की जरूरत है, बच्चे बंदूक की बजाय किताब पकड़ें। अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर दबाव है कि वे क्या करते हैं। क्या वे मदरसों को बंद करेंगे या सर्वे कराएंगे?
यह विवाद सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। पूरे देश में मदरसों पर बहस चलती रहती है। एक तरफ लोग कहते हैं कि मदरसों को आधुनिक बनाना चाहिए ताकि बच्चे अच्छी नौकरी पा सकें। दूसरी तरफ मुस्लिम समाज कहता है कि ये उनकी सांस्कृतिक विरासत हैं और इन्हें बंद नहीं किया जा सकता। नितेश राणे के बयान ने फिर से इस बहस को गरमा दिया है। नितेश राणे का ये बयान एक बार फिर सियासी बहस का हिस्सा बन गया है।



