BJP का दांव पड़ा उल्टा, रील स्टार को टिकट देते ही पार्टी में बगावत
गुजरात में BJP ने सोशल मीडिया रील स्टार को टिकट देकर बड़ा सियासी दांव खेला है... लेकिन इस फैसले से जमीनी कार्यकर्ताओं में नाराजगी...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात में स्थानीय निकाय चुनाव 26 अप्रैल 2026 को होने वाले हैं.. इन चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं.. बीजेपी ने विभिन्न जिलों और तालुकों के लिए उम्मीदवारों की सूचियां जारी कर दी हैं.. वडोदरा जिले की पोर जिला पंचायत सीट अचानक सुर्खियों में आ गई है.. बीजेपी ने यहां से सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर.. और युवा नेता अंकिता परमार को टिकट दिया है.. अंकिता के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 10 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं.. वे फिटनेस, लाइफस्टाइल और राजनीतिक संदेशों वाली रील्स बनाती हैं.. पार्टी को उम्मीद है कि उनकी डिजिटल लोकप्रियता युवाओं.. और महिलाओं को आकर्षित करेगी.. लेकिन टिकट मिलते ही बीजेपी के अंदर नाराजगी सामने आ गई है.. पुरानी जमीनी कार्यकर्ता नयना परमार ने खुलेआम विरोध किया.. और निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी.. और उन्होंने कहा कि रील की बजाय रियलिटी को महत्व दिया जाना चाहिए.. वहीं यह घटना गुजरात की स्थानीय राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गई है..
आपको बता दें कि वडोदरा गुजरात का एक बड़ा और महत्वपूर्ण जिला है.. यहां जिला पंचायत, तालुका पंचायत.. और नगरपालिका की सीटों पर चुनाव हो रहे हैं.. पोर गांव/क्षेत्र वडोदरा जिले का हिस्सा है.. यह इलाका ग्रामीण है, जहां किसानी, छोटे व्यापार.. और स्थानीय मुद्दे जैसे पानी, सड़क, सिंचाई और स्वास्थ्य सुविधाएं मुख्य चर्चा में रहते हैं.. बीजेपी लंबे समय से यहां मजबूत रही है.. लेकिन हर चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर आंतरिक चर्चाएं होती रहती हैं..
बीजेपी ने 9-10 अप्रैल 2026 के आसपास वडोदरा जिला पंचायत के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी की.. पोर सीट से अंकिता रोनक परमार का नाम घोषित किया गया.. अंकिता पहले वडोदरा तालुका पंचायत की सदस्य रह चुकी हैं.. और उन्होंने ढाई साल तक तालुका पंचायत अध्यक्ष का पद भी संभाला था.. हाल ही में उन्हें बीजेपी गुजरात युवा मोर्चा की उपाध्यक्ष बनाया गया था.. उनकी इंस्टाग्राम पर मजबूत उपस्थिति है.. वे फिट इंडिया अभियान की फैन हैं और खुद जिम चलाती हैं.. उनकी रील्स युवाओं को स्वस्थ रहने, आत्मनिर्भर बनने.. और सकारात्मक सोच अपनाने का संदेश देती हैं..
अंकिता का जन्म वडोदरा शहर में हुआ.. लेकिन उनकी शादी पोर गांव में हुई.. उनके ससुर 45 साल तक सक्रिय राजनीति में रहे.. परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि ने उन्हें इस क्षेत्र से जोड़ा.. और उन्होंने रायपुर की कलिंगा यूनिवर्सिटी से बी.कॉम की पढ़ाई की है.. राजनीति में आने से पहले वे जिम ट्रेनर के रूप में काम करती थी.. 5 साल पहले तालुका पंचायत चुनाव जीतकर उन्होंने राजनीतिक सफर शुरू किया.. अब जिला पंचायत स्तर पर टिकट मिलना उनके लिए बड़ा कदम माना जा रहा है..
बीजेपी की रणनीति साफ दिख रही है.. पार्टी युवा चेहरों और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को मौका दे रही है.. गुजरात में कई जगहों पर बीजेपी ने सिंगर्स, इंफ्लुएंसर्स.. और नए चेहरों को टिकट दिया है.. अंकिता के मामले में पार्टी को लगता है कि उनकी 10 लाख फॉलोअर्स वाली पहुंच युवा वोटर्स और महिलाओं को पार्टी से जोड़ सकती है.. आज के डिजिटल युग में जनता तक पहुंचने के लिए इंस्टाग्राम, रील्स.. और सोशल मीडिया बहुत महत्वपूर्ण हो गए हैं.. बीजेपी उम्मीद कर रही है कि अंकिता की लोकप्रियता पोर सीट पर फायदा देगी..
लेकिन टिकट घोषणा के तुरंत बाद पार्टी में बगावत शुरू हो गई.. नयना परमार, जो बीजेपी की पुरानी और समर्पित कार्यकर्ता हैं, काफी नाराज हो गईं.. नयना को पोर सीट का प्रबल दावेदार माना जा रहा था.. और उन्होंने खुलेआम विरोध जताया.. 11 अप्रैल को उन्होंने बीजेपी का खेस पहनकर ममलतदार कार्यालय पहुंचकर.. निर्दलीय नामांकन दाखिल करने की घोषणा की.. नयना ने कहा कि रील वाली अंकिता और रियल वाली मैं.. जनता तय करेगी कि उन्हें क्या चाहिए.. और उन्होंने आरोप लगाया कि टिकट बंटवारे में गड़बड़ी हुई है.. कुछ लोगों ने पैसे लेकर टिकट दिलवाया.. उन्होंने पूर्व जिला बीजेपी अध्यक्ष रसिक प्रजापति का भी नाम लिया.. नयना का कहना है कि अंकिता को पहले से कई पद मिले हुए हैं.. तालुका अध्यक्ष, युवा मोर्चा उपाध्यक्ष.. पार्टी की नीति एक व्यक्ति, एक पद का उल्लंघन हो रहा है..
नयना परमार की बगावत बीजेपी के लिए सिरदर्द बन गई है.. अगर वोट बंटते हैं तो पारंपरिक बीजेपी वोट बैंक में सेंध लग सकती है.. पोर इलाके में परमार समुदाय की अच्छी संख्या है.. दोनों उम्मीदवारों के सरनेम एक जैसे हैं.. इसलिए समुदाय के वोट का बंटवारा और भी महत्वपूर्ण हो गया है.. नयना ने कहा कि वे पार्टी के खिलाफ नहीं हैं.. लेकिन अंकिता के चयन से नाराज हैं.. और उन्होंने समाज के समर्थन से जीतने का भरोसा जताया..
अंकिता परमार ने इस नाराजगी पर प्रतिक्रिया दी.. उन्होंने कहा कि नयना उनके लिए बहन जैसी हैं.. वे बीजेपी की समर्पित कार्यकर्ता हैं.. अंकिता ने आश्वासन दिया कि वे नाराज लोगों को मनाने की पूरी कोशिश करेंगी.. और विकास के कामों के लिए साथ मिलकर काम करेंगी.. अंकिता ने नामांकन दाखिल करते हुए भारी जीत का दावा किया.. और उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन पर विश्वास जताया है.. और वे पोर क्षेत्र के विकास के लिए काम करेंगी..
वहीं यह घटना गुजरात की स्थानीय राजनीति में नई बहस छेड़ रही है.. एक तरफ डिजिटल लोकप्रियता और युवा चेहरा.. दूसरी तरफ जमीनी अनुभव और लंबे समय की सेवा.. नयना परमार रील vs रियलिटी की बात कर रही हैं.. वे कहती हैं कि सोशल मीडिया पर रील्स बनाना अलग बात है.. जबकि गांव-क्षेत्र की समस्याओं को समझना.. और सुलझाना वास्तविक काम है.. अंकिता की तरफ से जवाब है कि वे पहले भी तालुका पंचायत में काम कर चुकी हैं.. और डिजिटल माध्यम से ज्यादा लोगों तक पहुंच सकती हैं..
वडोदरा जिले में बीजेपी ने जिला पंचायत की कई सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित किए हैं.. कई जगहों पर नए चेहरों को मौका दिया गया है.. पुराने पदाधिकारियों को टिकट नहीं मिला.. पार्टी नो रिपीट और युवा नेतृत्व पर जोर दे रही है.. लेकिन पोर सीट पर यह आंतरिक कलह पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठा रही है.. कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस बगावत का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं..



