भारत की सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीदें बरकरार

- जिम्बाब्वे को 72 रनों से हराया, भारत के नेट रन रेट में भी सुधार
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
चेन्नई। भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच में बल्ले और गेंद दोनों से दमदार प्रदर्शन किया जिससे सूर्यकुमार यादव की अगुआई वाली टीम ने सेमीफाइनल की ओर एक कदम बढ़ा लिए। भारत को अगर टी20 विश्व कप के अंतिम चार में पहुंचना है तो उसे सुपर आठ के आखिरी मैच में वेस्टइंडीज को हराना होगा। भारत की जीत से जिम्बाब्वे का सफर टी20 विश्व कप में समाप्त हो गया है। ग्रूप-1 से सेमीफाइनल की दौड़ में अब वेस्टइंडीज और भारत शामिल है।
दक्षिण अफ्रीका ने लगातार दो मैच जीतकर स्थिति मजबूत कर ली थी और भारत की जीत से वह सेमीफाइनल में पहुंचने में सफल रहा। अब अगर भारत अपना आखिरी मैच जीत जाए तो ग्रूप-1 से भारत और अफ्रीका सेमीफाइनल में पहुंच जाएंगे। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में चार विकेट पर 256 रन बनाए। यह टी20 विश्व कप में भारत का सर्वोच्च स्कोर है। भारतीय टीम इस लक्ष्य का बचाव करने में सफल रही और जिम्बाब्वे की टीम को 72 रनों से हराया। जिम्बाब्वे के लिए ब्रायन बेनेट ने शानदार पारी खेली, लेकिन टीम 20 ओवर में छह विकेट पर 184 रन ही बना सकी। भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ बड़ी जीत से नेट रन रेट में सुधार किया है, ग्रूप-1 में तीसरे स्थान पर है और उसका नेट रन रेट -0.100 है। वेस्टइंडीज की टीम दूसरे स्थान पर है और उसका नेट रन रेट +1.791 का है। भारत के लिए इस मैच में अभिषेक शर्मा और हार्दिक पांड्या ने अर्धशतक लगाए। वहीं, तिलक वर्मा ने नाबाद 44 रन बनाए। तिलक और हार्दिक ने आखिरी पांच ओवर में 80 रन जुटाए।
क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता का निधन
नोएडा। रिंकू सिंह पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का लंबी बीमारी के बाद देर रात निधन हो गया है। उन्होंने ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में अंतिम सांस ली। रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। वह करीब तीन दिन से अस्पताल में भर्ती थे। रिंकू सिंह वल्र्ड कप के बीच ही अपने पिता से मिलने आए थे। पिता के निधन की खबर के बाद वो तुरंत वापस लौट रहे हैं। रिंकू टूर्नामेंट में आगे टीम इंडिया का हिस्सा बनेंगे इसको लेकर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक गैस एजेंसी में काम करते थे। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने बेटे रिंकू के क्रिकेटर बनने के सपने को पूरा करने में सहयोग किया। रिंकू की कामयाबी के बाद भी उन्होंने यह काम नहीं छोड़ा। रिंकू ने खुद शुरुआत में सिलिंडर वितरण के काम में पिता का हाथ बंटाया और गरीबी से लड़ते हुए क्रिकेट के मैदान पर अपनी जगह बनाई।



