बांदा में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही, सड़क हादसे में घायल महिला की मौत

बांदा में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है। सड़क हादसे में घायल महिला को समय पर एंबुलेंस नहीं मिली और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बांदा में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है। सड़क हादसे में घायल महिला को समय पर एंबुलेंस नहीं मिली और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया।

हैरानी की बात यह है कि आपातकालीन सेवा की एंबुलेंस परीक्षा ड्यूटी में लगी थी, जबकि सड़क पर घायल जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे।

मामला नरैनी तहसील के कालिंजर थाना क्षेत्र का है। छतैनी गांव निवासी बुद्धिविलास यादव अपनी पत्नी शेखा देवी को बाइक से लेकर रिश्तेदारी जा रहे थे। सढ़ा गांव के पास अचानक सामने आए साइकिल सवार को बचाने की कोशिश में बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खंती में जा गिरी। हादसे में शेखा देवी के सिर में गंभीर चोट लगी, जबकि साइकिल सवार किशोर प्रांशु भी बुरी तरह घायल हो गया।

हादसे के तुरंत बाद परिजनों ने डायल 108 एंबुलेंस सेवा को फोन किया, लेकिन एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। घायल महिला सड़क किनारे तड़पती रही, लेकिन मदद नहीं मिली। समय बीतता गया और आखिरकार अस्पताल पहुंचने से पहले ही शेखा देवी ने दम तोड़ दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस एंबुलेंस से लोगों की जान बचनी चाहिए थी, उसे परीक्षा ड्यूटी में लगा दिया गया था। यानी कागजों में आपातकालीन सेवा चलती रही और जमीन पर एक महिला जिंदगी हार गई।

उधर गंभीर रूप से घायल किशोर को सीएचसी से मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन यहां भी एंबुलेंस करीब डेढ़ घंटे तक नहीं पहुंची। बाद में समाजसेवी के हस्तक्षेप के बाद दूसरे स्थान से एंबुलेंस भेजी गई और तब जाकर घायल को मेडिकल कॉलेज पहुंचाया जा सका।

सवाल साफ है—जब एंबुलेंस ही समय पर नहीं पहुंचेगी तो आपातकालीन सेवा का क्या मतलब रह जाएगा। क्या सरकारी सिस्टम की सुस्ती और लापरवाही यूं ही लोगों की जान लेती रहेगी? बांदा की यह घटना एक बार फिर सरकारी व्यवस्था की पोल खोल रही है।

रिपोर्ट -इकबाल खान, बांदा

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