राहुल का ‘गुजरात लॉबी’ पर बड़ा हमला! BJP-RSS पर आदिवासियों की जमीन छीनने का आरोप

राहुल गांधी ने गुजरात लॉबी पर तीखा हमला बोलते हुए BJP और RSS पर गंभीर आरोप लगाए हैं... उन्होंने दावा किया कि विकास... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के वडोदरा में आदिवासी अधिकार संविधान सम्मेलन के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कई आरोप लगाए.. और कहा कि मोदी आदिवासियों के हितों की परवाह नहीं करते.. राहुल गांधी ने सबसे पहले आदिवासियों के इतिहास की बात करते हुए कहा कि.. अगर कोई 5000 साल पहले यहां आता.. तो सारी जमीन आदिवासियों के नाम होती.. धीरे-धीरे उन्हें हटाया गया.. वहीं अब 21वीं सदी में भी उनके लिए नया शब्द लाया गया है.. राहुल ने बताया कि आरएसएस और बीजेपी का शब्द है वनवासी.. मतलब आप मूल मालिक नहीं हो.. यह देश आपका था.. लेकिन असली मालिक कोई और था.. अगर आप आदिवासी हो.. तो इस देश पर आपका हक है.. आपकी जमीन, आपका जंगल, आपका पानी आपसे छीना गया.. लेकिन वनवासी कहने का मतलब है कि आप सिर्फ जंगल में रहने वाले हो.. राहुल ने कहा कि यह शब्द आदिवासियों को छोटा दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.. और इससे उनकी पहचान बदल दी जाती है..

आपको बता दें कि राहुल गांधी ने आगे मोदी सरकार पर तीखा हमला किया.. और उन्होंने कहा कि मोदी जी बिरसा मुंडा, अंबेडकर.. और गांधी जी की मूर्तियों के सामने हाथ जोड़ते हैं.. लेकिन उनके विचारों की रक्षा नहीं करते.. बिरसा मुंडा ने आदिवासियों के लिए लड़ाई लड़ी और शहीद हुए.. लेकिन आज जब वनवासी कहकर आदिवासियों की जमीन छीनकर उद्योगपतियों को दी जाती है.. तो यह संविधान और बिरसा मुंडा दोनों पर हमला है.. राहुल ने कहा कि अब यह एक तरह का चलन बन गया है.. जब भी विकास की बात आती है.. तो सबसे पहले आदिवासियों की जमीन ली जाती है.. स्टैच्यू बनाने के लिए, माइनिंग के लिए जमीन ली जाती है.. और कई बार सही मुआवजा भी नहीं दिया जाता..

राहुल ने जाति जनगणना का मुद्दा भी उठाया.. उन्होंने कहा कि जब वह जाति जनगणना की बात करते हैं.. तो आरएसएस, मोदी और बीजेपी उन पर हमला करते हैं.. लेकिन इसका मतलब है कि देश को समझना.. इस देश में करीब 10 प्रतिशत आदिवासी.. 15 प्रतिशत दलित और 50 प्रतिशत ओबीसी हैं.. इन सभी की हिस्सेदारी होनी चाहिए.. राहुल ने प्राइवेटाइजेशन पर भी सवाल उठाए.. और उन्होंने कहा कि प्राइवेटाइजेशन का मतलब है कि सिर्फ 5-7 लोगों को फायदा होता है.. पहले पब्लिक सेक्टर में आदिवासी.. और दलितों को अवसर मिलते थे.. वहीं अब अडानी की कंपनियों में एक भी आदिवासी नहीं मिलेगा.. ब्यूरोक्रेसी में भी उनकी संख्या बहुत कम है.. प्राइवेट अस्पतालों के मालिकों में कोई आदिवासी नहीं है.. न ही यूनिवर्सिटी या कॉलेज के मालिकों में.. देश की 500 सबसे बड़ी कंपनियों में भी आदिवासियों की हिस्सेदारी नहीं के बराबर है..

राहुल गांधी ने टैक्स और कर्ज माफी का मुद्दा भी उठाया.. और उन्होंने कहा कि आम लोग जीएसटी देते हैं.. कपड़ों पर भी जीएसटी लगता है.. आम आदमी जितना टैक्स देता है.. उतना ही उद्योगपति भी देते हैं.. लेकिन उनकी आमदनी और आम आदमी की आमदनी में बहुत फर्क है.. उन्होंने सवाल उठाया कि कितने आदिवासियों का कर्ज माफ हुआ.. लेकिन बड़े उद्योगपतियों का कर्ज बार-बार माफ किया जाता है.. राहुल ने तेलंगाना का उदाहरण दिया कि जहां कांग्रेस ने जाति जनगणना करवाई.. उन्होंने पूछा कि देश की संस्थाओं, ब्यूरोक्रेसी और कॉरपोरेट सेक्टर में आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्गों की कितनी हिस्सेदारी है.. क्या यह 10 प्रतिशत भी है.. उन्होंने कहा कि भाषणों में सबका सम्मान किया जाता है.. लेकिन जब सत्ता और संपत्ति बांटने की बात आती है.. तो चुप्पी छा जाती है.. उन्होंने मनरेगा का जिक्र करते हुए कहा कि यह योजना आदिवासियों के लिए रोजगार का बड़ा साधन है..

राहुल ने एक उदाहरण भी दिया.. उन्होंने कहा कि केरल में एक व्यक्ति ने उनसे पूछा कि आदिवासियों को मिलने वाली मुफ्त सुविधाएं कब बंद होंगी.. इस पर राहुल ने कहा कि जब बड़े उद्योगपतियों को मिलने वाली सुविधाएं बंद होंगी.. तब ये भी बंद होंगी.. उन्होंने कहा कि मनरेगा में लोग मेहनत से काम करते हैं.. फिर भी उसे मुफ्त कहा जाता है.. उन्होंने सवाल उठाया कि विकास हो रहा है.. लेकिन किसका विकास हो रहा है.. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने आदिवासियों की सुरक्षा के लिए कानून बनाए थे.. लेकिन अब सरकारी स्कूल और कॉलेज बंद करके प्राइवेट संस्थान खोले जा रहे हैं.. राहुल ने कहा कि अगर आदिवासियों की मदद करनी है.. तो सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी.. सरकारी अस्पताल, स्कूल और कॉलेज मजबूत होने चाहिए.. और भविष्य के लिए साफ योजना बननी चाहिए..

वहीं शिक्षा पर भी राहुल गांधी ने सवाल उठाए.. उन्होंने कहा कि आज वाइस चांसलर की सूची देखिए.. तो ज्यादातर आरएसएस से जुड़े लोग हैं.. उन्हें शिक्षा का अनुभव नहीं है.. फिर भी उन्हें पद दिए जा रहे हैं.. उन्होंने कहा कि देश की कई संस्थाओं में यही स्थिति है.. राहुल ने कहा कि अगर आदिवासी अपने हक की बात करेंगे.. तो सवाल उठाएंगे कि उनकी जमीन.. और संसाधन उनसे क्यों छीने जा रहे हैं.. इसलिए उन्हें वनवासी कहकर उनकी पहचान बदलने की कोशिश की जाती है.. ताकि वे अपने अधिकार न मांगें.. राहुल ने कहा कि वह चाहते हैं कि.. आदिवासियों को बराबरी का हक मिले.. और देश के बड़े पदों पर उनकी भागीदारी हो..

राहुल गांधी ने विदेश नीति और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी बात की.. और उन्होंने कहा कि देश में नफरत और हिंसा बढ़ रही है.. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिका के साथ ऐसी डील की है.. जिससे किसानों को नुकसान हो सकता है.. उन्होंने कहा कि भारत में छोटे किसान हैं.. जबकि अमेरिका में बड़े किसान हैं.. ऐसे में कृषि क्षेत्र खोलने से भारतीय किसान प्रभावित होंगे.. राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि देश का डेटा अमेरिका को दिया जा रहा है.. और टैक्स नीतियां आम लोगों के खिलाफ हैं.. उन्होंने कहा कि सरकार बड़े उद्योगपतियों के हित में फैसले ले रही है..

आपको बता दें कि सम्मेलन का माहौल काफी उत्साहपूर्ण था.. वडोदरा और आसपास के आदिवासी इलाकों से लोग इसमें शामिल हुए.. गुजरात में आदिवासी आबादी लगभग 14 प्रतिशत है.. लेकिन उन्हें विकास में बराबरी का हिस्सा नहीं मिल रहा.. राहुल ने कहा कि आदिवासी इस देश के मूल निवासी हैं.. और उनकी जमीन, जंगल और पानी उनकी विरासत है.. उन्होंने बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने आदिवासियों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया.. और आज भी संविधान की रक्षा करना जरूरी है..

 

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