रामनगरी में गौतम अदाणी: आस्था, असर और कल्चर कनेक्ट का नया अध्याय
रामलला के दर्शन से गुरुकुल तक गौतम अदाणी का संदेश विकास के साथ संस्कृति भी एआई के दौर में परंपरा को नई रफ्तार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। अयोध्या की सुबह सरयू की हवा और मंदिर की घंटियों के बीच आज अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी अपने परिवार के साथ श्री राम जन्मभूमि मंदिर पहुंचे और दर्शन किये। रामलला के दरबार में गौतम अदाणी ने पत्नी प्रीति अदाणी और परिवार के साथ विशेष पूजा-अर्चना की। बाहर निकलकर उन्होंने जो कहा वह सीधा और सधा हुआ था यह मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं बल्कि भारत की संस्कृति, एकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। यह बयान सिर्फ श्रद्धा नहीं बल्कि एक व्यापक दृष्टि का संकेत भी देता है जिसमें धर्म राष्ट्रऔर विकास एक साथ बुने जाते हैं।
उनकी इस यात्रा का असली टर्निंग प्वाइंट राम मंदिर से निकलकर गुरुकुल की ओर बढ़ते कदम थे। गौतम अदाणी का काफिला जब अयोध्या के एक निशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय पहुंचा तो वहां का माहौल अलग था। छात्रों के बीच बैठकर गौतम अदाणी ने यहां संस्कृत, परंपरा और मूल्यों पर छात्रों के साथ चर्चा की उन्होंने यहां जो समय बिताया वह किसी कारपोरेट मीटिंग से ज्यादा एक सांस्कृतिक संवाद जैसा था। गुरुकुल के पदाधिकारियों ने उन्हें एक पुस्तक भेंट की। पत्रकारों से बातचीत में गौतम अदाणी ने साफ कहा कि गुरुकुल आज के दौर में संस्कृति को जीवित रखने का महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। यहीं से गौतम अदाणी के मुह से निकला अगला वाक्य और दिलचस्प हो जाता है कि एआई के समय में संस्कृति को और वेग कैसे मिले इसके लिए हर सहयोग किया जाएगा। यानी बात सिर्फ संरक्षण की नहीं बल्कि अपग्रेड की है। परंपरा को संग्रहालय में रखने की नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी के साथ जोडक़र आगे बढ़ाने की। और यहीं पर अदाणी फाउंडेशन की भूमिका सामने आती है जो शिक्षा और सामाजिक क्षेत्रों में पहले से सक्रिय है।
गुरुकुल के एक शिक्षक ने भी माना कि गौतम अदाणी की संस्कृत और भारतीय संस्कृति में दिलचस्पी स्पष्ट दिखी। यह बात महज औपचारिक नहीं लगती क्योंकि कॉर्पोरेट दुनिया में जहां रिटर्न आन इंवेस्टमेंट की भाषा चलती है वहां संस्कृति पर निवेश का इशारा अपने आप में अलग है। सवाल यह भी है कि क्या यह कल्चर कनेक्ट भविष्य में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी का नया चेहरा बनेगा? अयोध्या की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब देश में सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक विरासत और आर्थिक विकास तीनों पर बराबर चर्चा हो रही है। एक ओर विशाल मंदिर दूसरी ओर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर यह संतुलन ही आज की राजनीति और अर्थव्यवस्था का नया फ्रेम बनता दिख रहा है। ऐसे में गौतम अदाणी जैसे उद्योगपति का इस फ्रेम में सक्रिय दिखना अपने आप में कई संकेत देता है।

भारत की ग्रोथ स्टोरी में संस्कृति अब साफ्ट पावर नहीं बल्कि मुख्यधारा का हिस्सा बन रही है?
गौर करने वाली बात यह भी है कि अदाणी ने अपनी बात को सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं रखा बल्कि शिक्षा और संस्कृति को जोड़ते हुए गुरुकुल माडल की तारीफ की। आज जब एजुकेशन सिस्टम में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। डिजिटल क्लासरूम एआई टूल्स, ग्लोबल सिलेबस। ऐसे में गुरुकुल जैसी पारंपरिक व्यवस्था को सपोर्ट करने की बात एक अलग विमर्श खड़ा करती है। अयोध्या की इस यात्रा में कोई बड़ा ऐलान नहीं हुआ न ही कोई आर्थिक पैकेज घोषित किया गया। लेकिन इसके बावजूद यह यात्रा चर्चा में है क्योंकि यह साइलेंट मैसेज वाली यात्रा है यहां शब्द कम थे संकेत ज्यादा। अब देखना यह है कि यह संदेश यहीं तक सीमित रहता है या आगे चलकर कोई ठोस पहल में बदलता है। क्योंकि अगर कॉर्पोरेट सेक्टर सच में संस्कृति और शिक्षा के इस मॉडल में निवेश करता है, तो यह सिर्फ सीएसआर नहीं बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करने का बड़ा कदम हो सकता है।



