कानपुर: 13 घंटे में मां की मौत… क्रिकेटर का आरोप-अस्पताल ने वसूले पैसे, फिर फंसा दिया फर्जी केस में
कानपुर में क्रिकेटर उत्कर्ष द्विवेदी ने अपनी मां की मौत के बाद निजी अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इलाज के नाम पर अवैध वसूली की गई और शिकायत करने पर उनके खिलाफ ही फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया गया।

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों में आ गई है। एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट खिलाड़ी ने अपनी मां की मौत के बाद निजी अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्रोफेशनल क्रिकेटर उत्कर्ष द्विवेदी का दावा है कि उनकी मां का इलाज चकेरी स्थित एक निजी अस्पताल में किया गया, जहां इलाज के नाम पर अवैध वसूली हुई और लापरवाही भी बरती गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि शिकायत करने के बाद उनके खिलाफ ही फर्जी रंगदारी का मुकदमा दर्ज करा दिया गया।
इलाज के 13 घंटे बाद हुई मौत, अस्पताल पर गंभीर आरोप
उत्कर्ष द्विवेदी ने प्रेसवार्ता में बताया कि उनकी मां को 21 जुलाई 2025 को खून की कमी के कारण चकेरी के शिवकटरा इलाके में स्थित कैलाश मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया था। उनका आरोप है कि अस्पताल ने इलाज के नाम पर भारी रकम वसूली। लेकिन भर्ती होने के महज 13 घंटे के भीतर ही उनकी मां की मौत हो गई।
क्रिकेटर का कहना है कि मौत के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने शव को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज जारी होने का दावा किया। परिजनों के विरोध के करीब तीन घंटे बाद शव उन्हें सौंपा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इलाज से जुड़ा कोई मेडिकल दस्तावेज या रिपोर्ट उन्हें नहीं दी गई।
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शिकायत करने पर दर्ज हुआ फर्जी मुकदमा?
उत्कर्ष द्विवेदी का कहना है कि जब उन्होंने इस मामले की शिकायत स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से की, तो कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके उलट अस्पताल प्रबंधन की ओर से उनके खिलाफ रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज करा दिया गया। उनका कहना है कि इस विवाद के कारण उनके करियर और सामाजिक सम्मान पर भी असर पड़ा है।
CMO कार्यालय पर भी उठाए सवाल
क्रिकेटर ने आरोप लगाया है कि पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारी अस्पताल प्रबंधन को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हरि दत्त नेवी के कार्यालय से कुछ दूरी पर ही यह अस्पताल संचालित हो रहा है और कथित रूप से कई मानकों के खिलाफ चल रहा है, लेकिन इसके बावजूद उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उत्कर्ष का यह भी आरोप है कि उन्हें समझौता करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
RTI से सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
पीड़ित ने बताया कि सच्चाई सामने लाने के लिए उन्होंने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। उनका दावा है कि आरटीआई से मिले जवाबों में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
उत्कर्ष द्विवेदी ने हाल ही में कानपुर में सामने आए चर्चित किडनी कांड का जिक्र करते हुए कहा कि अगर इतने बड़े मामले स्वास्थ्य विभाग की नजर से छिपे रहे, तो इससे विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। उनकी मांग है कि पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो। फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
रिपोर्टर: प्रांजुल मिश्रा, कानपुर
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