पाकिस्तान में नहीं होगी बात, ईरानी राजदूत का ट्वीट डिलीट, बढ़ा सस्पेंस

ईरान अब अमेरिका की दोहरी चालों से तंग आ चुका है। ईरान का मानना है कि जब तक इज़राइल लेबनान में बमबारी नहीं रोकता, तब तक किसी भी मेज़ पर बैठना बेगुनाहों के खून का सौदा करने जैसा है।

4pm न्यूज नेटवर्क: दुनिया को लगा था कि जंग रुक गई है, लेकिन पर्दे के पीछे जो खेल खेला जा रहा है, उसने पूरी इंसानियत को खतरे में डाल दिया है। अभी तक चर्चा थी कि शुक्रवार को पाकिस्तान में जेडी वांस और ईरान के बीच बातचीत होगी, लेकिन अब एक ऐसी खबर आई है जिसने सस्पेंस को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है।

पाकिस्तान में अब कोई बात नहीं होगी! ईरानी राजदूत के एक ट्वीट ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी, जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया। लेकिन सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि ईरान ने बातचीत की मेज़ से हटने का फैसला ले लिया? एक तरफ ट्रंप शांति की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ नेतन्याहू को लेबनान में कत्लेआम की खुली छूट दे दी गई है।

इसके जवाब में ईरान ने भी साफ कर दिया है कि यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) पर कोई रोक नहीं लगेगी। होर्मुज में जहाजों की आवाजाही ठप है और ईरान ने वहाँ बिछी समुद्री माइंस (Marine Mines) से बचने के लिए एक नया ‘मैप’ जारी कर दिया है। आज हम ट्रंप के दोहरे चरित्र और नेतन्याहू की खूनी ज़िद का कच्चा चिट्ठा खोलेंगे।

कूटनीति की गलियों में इस वक्त जबरदस्त हलचल है। सबको इंतज़ार था कि पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच सुलह का कोई रास्ता निकलेगा, लेकिन अचानक ईरानी राजदूत के एक ट्वीट ने सब कुछ बदल दिया। ट्वीट में साफ इशारा था कि अब पाकिस्तान में कोई बातचीत नहीं होगी। हालांकि, कुछ देर बाद उस ट्वीट को डिलीट कर दिया गया, लेकिन जो संदेश जाना था, वो जा चुका है।

ईरान अब अमेरिका की दोहरी चालों से तंग आ चुका है। ईरान का मानना है कि जब तक इज़राइल लेबनान में बमबारी नहीं रोकता, तब तक किसी भी मेज़ पर बैठना बेगुनाहों के खून का सौदा करने जैसा है। पाकिस्तान की मध्यस्थता पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं। क्या यह ट्रंप की नाकामी है या ईरान का कड़ा संदेश? सस्पेंस गहरा गया है।

अब ज़रा ट्रंप की मक्कारी पर गौर फरमाइए। ‘एक्सिओस’ की ताज़ा रिपोर्ट ने दुनिया को हिला कर रख दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, खुद डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू को लेबनान पर हमले जारी रखने के लिए उकसाया और उन्हें झूठी जानकारी दी कि ईरान कमजोर पड़ रहा है। यह ट्रंप ही थे जिन्होंने नेतन्याहू को लेबनान पर हमले की खुली छूट दी, ताकि इज़राइल अपना विस्तारवादी एजेंडा पूरा कर सके।

एक तरफ ट्रंप टीवी पर आकर कहते हैं कि वे अमन चाहते हैं, और दूसरी तरफ पीठ पीछे नेतन्याहू को बारूद सप्लाई करने और लेबनान को कब्रिस्तान बनाने का ‘ग्रीन सिग्नल’ देते हैं। लेबनान पर जो हमले हो रहे हैं, उनकी डोर व्हाइट हाउस के हाथों में है। नेतन्याहू तो सिर्फ एक मोहरा हैं, असली कातिल तो ट्रंप की नीतियां हैं। ट्रंप की इस दादागीरी के बीच अब दुनिया के दूसरे देश भी बोलने लगे हैं। बड़ी खबर ये है कि यूके अब खुलकर लेबनान के समर्थन में आ गया है। यूके ने साफ कहा है कि लेबनान की संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए और इज़राइली हमलों को तुरंत रुकना होगा।

सिर्फ यूके ही नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र ने भी पुरज़ोर मांग की है कि ईरान के साथ जो सीज़फायर हुआ है, उसे लेबनान तक बढ़ाया जाए। दुनिया जानती है कि अगर लेबनान में आग लगी रही, तो ईरान का सीज़फायर महज़ एक दिखावा बनकर रह जाएगा। आप एक तरफ आग बुझाने का नाटक करेंगे और दूसरी तरफ लेबनान में पेट्रोल डालेंगे, ये मुमकिन नहीं है।

यूरोपियन यूनियन की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ युद्धविराम सिर्फ वहीं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे लेबनान तक भी बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लेबनान के समूह हिजबुल्लाह को हथियार छोड़ने चाहिए। काजा कालास ने यह भी कहा कि इज़राइल की हाल की कार्रवाइयों से यह युद्धविराम कमजोर पड़ रहा है। उनके मुताबिक, इज़राइल के हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है, जिससे यह कहना मुश्किल हो जाता है कि यह सिर्फ आत्मरक्षा (Self-defense) के लिए किया गया था।

ट्रंप की धमकियों के जवाब में ईरान ने भी अपनी तलवारें म्यान से बाहर निकाल ली हैं। ईरान का साफ संदेश है कि यूरेनियम एनरिचमेंट पर कोई रोक नहीं लगेगी। तेहरान ने साफ कर दिया है कि उनका परमाणु कार्यक्रम उनकी सुरक्षा की गारंटी है और वे ट्रंप के किसी भी दबाव में इसे बंद नहीं करेंगे।

इतना ही नहीं, सीज़फायर के दावों के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह ठप है। दुनिया की अर्थव्यवस्था की नस ईरान के अंगूठे के नीचे है। ईरान ने उन समुद्री माइंस से बचने के लिए एक नया मैप जारी किया है जो उन्होंने सुरक्षा के लिए बिछाई हैं। ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक नया नक्शा जारी किया है। इसका मकसद जहाजों को समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों से बचाना है। इस नए नक्शे में साफ तौर पर एक खतरनाक इलाका दिखाया गया है, जहां जहाजों को जाने से मना किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पहले जहाज आमतौर पर ओमान के किनारे के पास से गुजरते थे, लेकिन अब उन्हें सलाह दी गई है कि वे ईरान के किनारे के पास से गुजरें। इससे वे संभावित माइन वाले इलाकों से बच सकेंगे। साथ ही जहाजों को यह भी कहा गया है कि वे सीधे ईरान के अधिकारियों से संपर्क में रहें, ताकि सुरक्षित तरीके से रास्ता तय किया जा सके। हालांकि नक्शा जारी करके ईरान ने जहां एक ओर फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने की तरकीब बताई है, तो वहीं दूसरी ओर होर्मुज में बिछी माइंस इस बात का सबूत है कि कोई कुछ भी कर ले, ईरान जब चाहेगा तभी होर्मुज से कोई जहाज गुजर पाएगा। ऐसे में अगर अमेरिका और इज़राइल ने अपनी चालें नहीं बदलीं, तो होर्मुज का रास्ता कभी नहीं खुलेगा।

डोनाल्ड ट्रंप ने आज फिर एक कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिकी सेना तब तक तैनात रहेगी जब तक सुलह की शर्तें पूरी तरह से लागू नहीं हो जातीं। लेकिन ट्रंप साहब, शर्तें तो आप खुद तोड़ रहे हैं! जब आप नेतन्याहू को लेबनान पर हमले की खुली छूट दे रहे हैं, तो कौन सी शांति की बात कर रहे हैं? नेतन्याहू इस वक्त बेकाबू हो चुके हैं क्योंकि उन्हें ट्रंप का वरदहस्त प्राप्त है। लेबनान में अब तक सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं, स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है, लेकिन ट्रंप प्रशासन को सिर्फ अपनी साख बचाने की चिंता है। यह शांति नहीं, बल्कि एक मुल्क को मिटाने की साज़िश है।

इस पूरे खेल में पाकिस्तान की हालत ‘काटो तो खून नहीं’ जैसी है। ट्रंप ने पाकिस्तान का इस्तेमाल किया ताकि वे शांति का क्रेडिट ले सकें। लेकिन अब अमेरिका-पाकिस्तान के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। पाकिस्तान चाहता है कि सीज़फायर मुकम्मल हो, जबकि ट्रंप इज़राइल को लाडला बनाए रखना चाहते हैं। जेडी वांस के पाकिस्तान दौरे से पहले जिस तरह के हालात बने हैं, उससे साफ है कि शुक्रवार की वार्ता अब एक औपचारिकता बनकर रह गई है।

ऐसे में साफ है कि ट्रंप का सीज़फायर सिर्फ एक डिप्लोमैटिक स्टंट था। नेतन्याहू की खूनी ज़िद और ट्रंप का झूठ अब दुनिया के सामने है। ईरान ने भी बता दिया है कि वह झुकने वाला नहीं है। होर्मुज बंद है, यूरेनियम का काम जारी है और लेबनान में कत्लेआम जारी है। क्या आपको लगता है कि ट्रंप और नेतन्याहू की ये जोड़ी दुनिया को तीसरे महायुद्ध की तरफ धकेल रही है? क्या ईरान को अब आर-पार की लड़ाई लड़नी चाहिए?

Related Articles

Back to top button