पोंडा सीट पर चुनाव रद्द, कांग्रेस का पलटवार! HC के फैसले के खिलाफ SC में याचिका
कांग्रेस ने गोवा के पोंडा विधानसभा उपचुनाव रद्द होने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला देते हुए चुनाव रद्द किया था, क्योंकि विधानसभा का कार्यकाल एक साल से कम बचा है.

4pm न्यूज नेटवर्क: कांग्रेस ने गोवा के पोंडा विधानसभा उपचुनाव रद्द होने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला देते हुए चुनाव रद्द किया था, क्योंकि विधानसभा का कार्यकाल एक साल से कम बचा है. कांग्रेस इसे मतदाताओं के अधिकारों का हनन बताते हुए बीजेपी पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया है.
कांग्रेस ने गोवा की पोंडा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव को रद्द किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पार्टी ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. यह उपचुनाव बीजेपी विधायक रवि नाइक के पिछले साल 15 अक्टूबर 2025 को निधन के बाद होना था. चुनाव 9 अप्रैल को प्रस्तावित था लेकिन मतदान से ठीक पहले इसे रद्द कर दिया गया.
कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य चोडंकर के मुताबिक पोंडा विधानसभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार डॉ. केतन भाटिकर ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की है. इसमें बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें उपचुनाव को रद्द कर दिया गया था.
8 अप्रैल अधिसूचना रद्द
बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने 8 अप्रैल को भारत चुनाव आयोग द्वारा उपचुनाव के लिए जारी अधिसूचना को रद्द कर दिया था, जिसमें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के उल्लंघन का हवाला दिया गया था, क्योंकि विधायिका का कार्यकाल एक वर्ष से भी कम समय में समाप्त होने वाला है. कोर्ट ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत अगर विधानसभा का कार्यकाल एक वर्ष से कम बचा हो, तो उपचुनाव नहीं कराया जाना चाहिए.
याचिका में क्या तर्क दिया
पोंडा क्षेत्र के दो पंजीकृत मतदाताओं ने अधिसूचना की वैधता को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, क्योंकि वर्तमान गोवा विधानसभा का कार्यकाल एक साल से भी कम समय के लिए बचा है. यह कार्यकाल 14 मार्च, 2027 को समाप्त होगा. उनका तर्क था कि इतने कम समय के लिए चुनाव कराना कानून के प्रावधानों के खिलाफ है. कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए चुनाव रद्द करने का निर्णय सुनाया. कोर्ट ने कहा कि चूंकि चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित होते और जीत दर्ज करने लासे विधायक को केवल लगभग नौ महीने का ही कार्यकाल मिलता.
कांग्रेस का आरोप
इधर कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं. गिरिश चोडणकर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए आरोप लगाया ‘गोवा के मुख्यमंत्री को उपचुनाव हारने का डर है, जिसके चलते संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर चुनाव रद्द किए जा रहे हैं’. उन्होंने कहा कि पोंडा के लोगों को वोट देने और अपना विधायक चुनने का पूरा अधिकार था.उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार हुआ, मतपत्र जारी हो चुके थे और उम्मीदवार तैयार थे, लेकिन मतदान से महज 16 घंटे पहले चुनाव रद्द कर दिया गया.
चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल
उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा ‘चुनाव आयोग ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील नहीं की, यह लोकतंत्र के लिए एक बड़ा झटका है. हमारे गोवा कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. केतन भाटिकर ने जनता के प्रतिनिधित्व के अधिकार को बहाल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसके इस सप्ताह सुनवाई होने की उम्मीद है’. पार्टी का कहना है कि यह निर्णय मतदाताओं के अधिकारों का हनन है और इससे लोकतंत्र कमजोर होता है. जहां सत्ताधारी बीजेपी ने इस फैसले को चौंकाने वाला बताया, वहीं कांग्रेस ने चुनाव आयोग के साथ मिलीभगत करके अधिसूचना में देरी करके चुनाव रद्द कराने का आरोप लगाया.



