यूएस ने किया रास्ता बंद तो चीन ने मारी एंट्री, ट्रंप के सारे दावे हवाहवाई
इस्लामाबाद में ईरान के साथ बातचीत के विफल होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सोचा था कि वो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज पर अगर नाकाबंदी कर देंगे तो सारे देश डर जाएंगे और ईरान पर झुकने का दबाव बना लेंगे।

4pm न्यूज नेटवर्क: इस्लामाबाद में ईरान के साथ बातचीत के विफल होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सोचा था कि वो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज पर अगर नाकाबंदी कर देंगे तो सारे देश डर जाएंगे और ईरान पर झुकने का दबाव बना लेंगे। लेकिन अब ट्रंप के सारे दावे और बड़ी बड़ी धमकियां फेल होती नजर आ रही हैं। एक तरफ जहां ईरान ने ट्रंप की नाक में दम करके रखा था तो वहीं अब इस लड़ाई में चीन की एंट्री हो गई है, जिससे वर्ल्ड वॉर जैसी स्थिति पैदा हो गई हैं।
इस्लामाबाद में ईरान के साथ बातचीत के विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुरी तरह से बौखला गए थे जिससे बाद उन्होंने ऐलान कर दिया था कि वो होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के सभी बंदरगाहों पर ब्लॉकेड यानी नाकाबंदी कर देंगे। उन्होंने दिए गए हुए समय के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट में जाने-आने वाले जहाजों पर नौसेना ब्लॉकेड भी लगाना शुरू कर दिया।
ट्रंप ने कहा कि, ‘जो भी अवैध टोल देता है, उसे समुद्र में सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा।’ ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना होर्मुज में माइन्स साफ करती रहेगी ताकि दोस्ताना देशों के जहाजों को रास्ता मिलता रहे। उन्होंने चेतावनी भी दी कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर आगे भी कार्रवाई करेगी। उधर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि यह ब्लॉकेड ईरान के बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी जहाजों पर लागू होगा।
इसने कहा कि, ‘ब्लॉकेड सभी देशों के जहाजों पर बराबरी से लागू होगा, चाहे वो अरब की खाड़ी हो या ओमान की खाड़ी। अगर कोई जहाज नियम तोड़ेगा तो उसे रोका या पकड़ा जा सकता है।’ ट्रंप ने सोमवार को एक और पोस्ट में चेतावनी दी, “ईरान की नौसेना अब समुद्र के तल पर पड़ी है, पूरी तरह तबाह हो चुकी है और उसके 158 जहाज डुबो दिए गए। हमने सिर्फ उनके कुछ छोटे ‘फास्ट अटैक शिप्स’ को नहीं मारा क्योंकि हमें लगता था कि ये ज्यादा खतरा नहीं हैं।” ट्रंप ने चेताया था कि “अगर इनमें से कोई भी जहाज हमारे ब्लॉकेड के पास भी आया, तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। ठीक उसी तरह जैसे हम समुद्र में ड्रग तस्करों की नावों को मारते हैं। ये कार्रवाई तेज और बहुत सख़्त होगी।”
जैसे रही अमेरिका की तरफ से नाकाबंदी करने की बात सामने आई तो इसका मकसद साफ था कि अमेरिका रूस चीन भारत और पाकिस्तान जैसे देशों के जहाजों को निशाना बना सकता है जिनको ईरान ने मित्र देश होने के नाते हॉर्मूज स्ट्रेट के रास्ते से गुजरने की परमिशन दे रखी है। लेकिन ईरान से लड़ाई के चलते ट्रंप चीन औल रूस से पंगा क्यों ले रहे थे? तो इसका मतलब था कि ट्रंप चीन और भारत जैसे देशों पर आर्थिक दबाव डालने की कोशिश कर रहे थे जिससे कि वो ईरान पर जंग से पीछे हटने का दबाव बनाए और अमेरिका की सभी शर्तें मानने के लिए तैयार हो जाए। लेकिन इसका हुआ ठीक उलटा।
ईरान ने ट्रंप की चेतावनी का जवाब सीधे चेतावनी दे डाला। ईरान ने कहा कि अगर उसके बंदरगाहों पर खतरा मंडराता है तो इसके बड़े क्षेत्रीय नतीजे होंगे। खतम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा “सामूहिक” होनी चाहिए। ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाने वाले किसी भी कदम का असर पड़ोसी देशों पर भी पड़ेगा। उन्होंने साफ कहा कि अगर ईरानी बंदरगाहों की सुरक्षा को खतरा होता है, तो “फारस की खाड़ी या ओमान की खाड़ी में कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।” उधर, चीन भी पीछे नहीं हटा औल अमेरिका को सख्त चेतावनी दे डाली। एक वरिष्ठ चीनी अधिकारी ने अमेरिका को होर्मुज स्ट्रेट पर नाकाबंदी लगाने के खिलाफ चेतावनी दी और उसे ईरान के साथ चीन के द्विपक्षीय संबंधों में हस्तक्षेप न करने के लिए आगाह किया।
ट्रंप ने तमाम धमकिया दी बड़ी बड़ी बातें की लेकिन न तो ईरान दबा और न चीन घबराया। और अब तो खबर सामने आ गई है कि US की धमकियों के बावजूद चीनी टैंकर ने होर्मुज स्ट्रेट को पार कर लिया है और अमेरिकी सेना इसका बाल भी बाका नहीं कर पाई है। जी हां, शिपिंग डेटा से पता चला है कि अमेरिका की तरफ से प्रतिबंधित एक चीनी टैंकर मंगलवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरा है। मरीनट्रैफिक और केप्लर के डेटा से पता चला है कि चीनी टैंकर रिच स्टारी नाकाबंदी शुरू होने के बाद से होर्मुज को पार करके खाड़ी से बाहर निकलने वाला पहला जहाज बन गया है.
दरअसल, ईरान के साथ व्यापार करने की वजह से टैंकर और उसके मालिक शंघाई जुआनरुं शिपिंग कंपनी लिमिटेड पर संयुक्त राज्य अमेरिका की तरफ से प्रतिबंध लगाया गया था लेकिन इस टैंकर ने अमेरिकी नाकेबंदी के बावजूद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज पार कर लिया। ऐसे में सवाल उठता है कि कहां गई ट्रंप की नौसेना? कहां गए वो ट्रंप जो कह रहे थे कि, अगर इनमें से कोई भी जहाज हमारे ब्लॉकेड के पास भी आया, तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। इससे साफ पता चलता है कि अमेरिकी चाहे जितनी बड़ी बड़ी बायें कर लें लेकिन चीन से पंगा लेने का गूदा अमेरिका में नहीं है।
अमेरिका के द्वारा नाकाबंदी करने का क्या फायदा हुआ? क्या मिला उसको ये सब करके जब चीनी टैंकर को रोकना ही नहीं था। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अब अमेरिका हिम्मत हार रहा है? क्या ये बेहतर नहीं होता कि वो ईरान से डील कर लेता और शांति बनाए रखता। उसकी जो और आगे फजीहत हो रही है कम से कम वो न होती। लेकिन जेडी वेंस ने अब खुलकर बताया है कि आखिर ईरान से उनकी बात कहां बिगड़ गई। उनका कहना है कि पाकिस्तान में हुई बातचीत में हमने टेबल पर बहुत अच्छे प्रस्ताव रखे, लेकिन बातचीत के लिए जो टीम आयी थी लग रहा था उनको निर्णय का अधिकार नहीं है बल्कि उनको ईरान में सुप्रीम लीडर या किसी से कंसल्ट करना है… जो भी हो अब बॉल उनके पाले में है…”
तो इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि दुनिया की सबसे बड़ी ताकत होने का दावा करने वाला अमेरिका भी हर मोर्चे पर अपनी मनमर्जी नहीं चला सकता है। डोनाल्ड ट्रंप की धमकियां, चेतावनियां और सैन्य ताकत का प्रदर्शन उस वक्त फीका पड़ गया जब न तो ईरान झुका और न ही चीन पीछे हटा। होर्मुज जैसे बेहद संवेदनशील इलाके में नाकाबंदी की रणनीति उलटी पड़ती नजर आई, जहां अमेरिका की सख्ती के बावजूद हालात उसके नियंत्रण से बाहर जाते दिखे।
सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा होता है कि क्या अब अमेरिका की वैश्विक पकड़ कमजोर पड़ रही है? क्योंकि जब खुलेआम एक प्रतिबंधित चीनी टैंकर Strait of Hormuz पार कर जाता है और अमेरिका सिर्फ देखता रह जाता है, तो उसकी साख पर सवाल उठना लाजिमी है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखा दिया कि अब दुनिया एकध्रुवीय नहीं रही, बल्कि कई ताकतें बराबरी से चुनौती देने के लिए तैयार हैं। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो यह टकराव आगे और बड़ा रूप ले सकता है। ऐसे में कूटनीति ही एकमात्र रास्ता बचता है, वरना यह तनाव किसी बड़े संघर्ष की ओर बढ़ सकता है, जिसके नतीजे पूरी दुनिया को भुगतने पड़ेंगे।



