UP जल रहा और यहां भाषणबाजी?’, CM Yogi के बुलडोजर वाले बयान पर Mamata Banerjee का करारा जवाब 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बीच सियासत अपने पूरे उफान पर है...बीजेपी के बड़े नेता, प्रधानमंत्री से लेकर गृह मंत्री और मुख्यमंत्री तक, बंगाल में डेरा डाले हुए हैं.

4pm न्यूज नेटवर्क: पश्चिम बंगाल में इन दिनों चुनाव का मौसम है…जिसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप अपने चरम पर हैं…लेकिन इस शोर-शराबे के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या जो नेता दूसरे राज्यों में कानून व्यवस्था का पाठ पढ़ा रहे हैं…वो अपने ही घर की हालत संभाल पा रहे हैं?…

आज हम बात करेंगे उसी सियासी विरोधाभास की…जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पश्चिम बंगाल में जाकर बुलडोजर और कानून व्यवस्था की बातें कर रहे हैं…तो वहीं दूसरी तरफ उनका अपना राज्य उत्तर प्रदेश सड़कों पर उबल रहा है…और इसी बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला है..

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बीच सियासत अपने पूरे उफान पर है…बीजेपी के बड़े नेता, प्रधानमंत्री से लेकर गृह मंत्री और मुख्यमंत्री तक, बंगाल में डेरा डाले हुए हैं…खासकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार रैलियां कर रहे हैं और ममता बनर्जी की सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं…लेकिन इसी बीच एक बड़ा सवाल उठता है कि क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दूसरे राज्य की चिंता करने से पहले अपने राज्य की स्थिति नहीं देखनी चाहिए?….

अगर हम उत्तर प्रदेश की बात करें…खासकर नोएडा जैसे बड़े औद्योगिक शहर की…तो वहां हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं…हजारों श्रमिक सड़कों पर उतर आए हैं….उनकी मांग है…सिर्फ सम्मानजनक वेतन और बेहतर कामकाजी हालात…जब इन मांगों को अनदेखा किया गया…तो श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा…आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसक प्रदर्शन की खबरें सामने आईं…पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और शहर के कई हिस्सों में तनाव फैल गया…… ये वही उत्तर प्रदेश है…जिसे अक्सर कानून व्यवस्था का मॉडल बताकर पेश किया जाता है…

नोएडा के मजदूरों की हालत पर गौर करें तो तस्वीर और भी चिंताजनक हो जाती है…8 से 10 हजार रुपये महीने की तनख्वाह में एक महंगे शहर में जीवन गुजारना लगभग असंभव है….मजदूरों की मांग है कि उनका वेतन कम से कम 20 हजार रुपये किया जाए…लेकिन सरकार की तरफ से ठोस कार्रवाई न होने के कारण उनका आक्रोश सड़कों पर दिखाई दे रहा है…ये वही समय है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पश्चिम बंगाल में जाकर रोजगार और विकास के बड़े-बड़े वादे कर रहे थें…ऐसे में सवाल उठता है कि जब अपने राज्य के युवाओं और मजदूरों की समस्याएं हल नहीं हो पा रही हैं…तो दूसरे राज्य को क्या संदेश जा रहा है?…

इसी मुद्दे को लेकर अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीएम योगी आदित्यनाथ पर सीधा हमला बोला और उनके बयान पर पलटवार करते हुए पिंगला की एक जनसभा में उन्होंने कहा कि…आजकल उत्तर प्रदेश जल रहा है…योगी बाबू यहां आकर भाषण देते हैं, और कहते हैं कि बंगाल में बुलडोजर चलते रहेंगे। गौरतलब हो कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के तहत पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे…ममता बनर्जी ने ये भी कहा कि…बंगाल में बुलडोजर नहीं चलते, बंगाली सलाम करते हैं, प्रणाम कहते हैं, जय हिंद कहते हैं, वंदे मातरम कहते हैं। यहां से जब लड़के-लड़कियां BJP के राज्य में जाते हैं, तो उन्हें मार दिया जाता है। उन पर अत्याचार किया जाता है। जब वे बंगाली बोलते हैं, तो उन्हें घुसपैठिया कहा जाता है। उनका बदला लोकतंत्र के बक्से में होगा। इसी महीने डिलिमिटेशन बिल लाया जा रहा है। यह आपको टुकड़ों में बांट देगा…

पश्चिम बंगाल में सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपनी रैलियों में बुलडोजर मॉडल को कानून व्यवस्था का प्रतीक बताया…उन्होंने पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह की कार्रवाई की बात कही…इसके जवाब में ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल में बुलडोजर नहीं चलता, यहां लोकतंत्र चलता है…ये बहस अब सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि ये दो अलग-अलग राजनीतिक सोच और प्रशासनिक मॉडल की लड़ाई बन चुकी है…..यही नहीं योगी आदित्यनाथ ने अपनी रैलियों में भाषा और पहचान का मुद्दा भी उठाया…उन्होंने कहा कि बंगाल में बांग्ला ही बोली जाएगी, कठमुल्लापन की संस्कृति यहां नहीं चलने दी जाएगी…

अब सीएम योगी के इस बयान पर भी ममता बनर्जी ने जवाब दिया और कहा कि बंगाल में सभी भाषाओं और संस्कृतियों का सम्मान होता है…ये मुद्दा अब चुनावी रणनीति का हिस्सा बन चुका है…जहां पहचान की राजनीति के जरिए वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है…

अब यहां अगर आप गौर करके देखेंगे…तो एक बात साफ नजर आती है कि सियासत और प्रशासन के बीच संतुलन बिगड़ता जा रहा है..एक तरफ नेता चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं…दूसरी तरफ उनके अपने राज्यों में जनता सड़कों पर उतर रही है…ये सिर्फ उत्तर प्रदेश की बात नहीं है, बल्कि एक बड़ा सवाल है कि क्या चुनावी राजनीति के चलते प्रशासनिक जिम्मेदारियों को नजरअंदाज किया जा रहा है?..आज की जनता पहले से ज्यादा जागरूक है…सोशल मीडिया के दौर में हर घटना तुरंत सामने आ जाती है…जब एक तरफ नेता दूसरे राज्यों की आलोचना करते हैं और दूसरी तरफ उनके अपने राज्य में समस्याएं बढ़ती हैं, तो यह विरोधाभास जनता को साफ दिखाई देता है…यही वजह है कि अब लोग सिर्फ भाषण नहीं, बल्कि जमीनी काम देखना चाहते हैं…

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर इस पूरे घटनाक्रम का चुनावों पर क्या असर पड़ेगा?…तो पश्चिम बंगाल में ये मैसेज जा रहा है कि बीजेपी जिस कानून व्यवस्था और विकास की बात कर रही है…वो उसके अपने राज्यों में भी सवालों के घेरे में है…ममता बनर्जी इसी मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रही हैं और बीजेपी को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही हैं…

तो कुल मिलाकर तस्वीर साफ है…एक तरफ बड़े-बड़े दावे, दूसरी तरफ जमीनी हकीकत…सीएम योगी आदित्यनाथ पश्चिम बंगाल में जाकर कानून व्यवस्था का पाठ पढ़ा रहे हैं…लेकिन उनके अपने राज्य में हालात सवाल खड़े कर रहे हैं…वहीं ममता बनर्जी इस मौके को भुनाते हुए बीजेपी पर पलटवार कर रही हैं और खुद को बेहतर विकल्प के तौर पर पेश कर रही हैं…अब ऐसे हालातों में आखिरकार फैसला जनता को करना है कि क्या वो भाषणों पर भरोसा करेगी या जमीनी सच्चाई पर?…

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