अखिलेश के तंज से तिलमिला उठीं स्मृति, कह दी बड़ी बात

स्मृति ईरानी ने अखिलेश यादव को गोरखपुर से चुनाव लड़ने की चुनौती दी है। यह बात संसद में महिला आरक्षण बिल पर बहस के दौरान शुरू हुई।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सत्ताधारी दल भाजपा के नेताओं की एक आदत लगातार चर्चा में बनी रहती है .दरअसल ये नेता विपक्ष की बुराई तो खूब जमकर करते हैं लेकिन खुद की आलोचना जरा भी नहीं सह सकते हैं .

दरअसल हम बात कर रहे हैं बीजेपी की नेता और अभिनेत्री स्मृति ईरानी की जिन्होंने अभी सपा मुखिया अखिलेश यादव के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की है .

स्मृति ईरानी ने अखिलेश यादव को गोरखपुर से चुनाव लड़ने की चुनौती दी है। यह बात संसद में महिला आरक्षण बिल पर बहस के दौरान शुरू हुई। अखिलेश यादव ने स्मृति ईरानी पर तंज कसा और कहा कि ‘सास-बहू वाली तो हार गईं’।

इसका मतलब था कि स्मृति पहले टीवी सीरियल में काम करती थीं। बात जब बाहर आई तो ये स्मृति ईरानी को एक न भाई और उन्होंने इसे लेकर जोरदार पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव में अगर सच्चा दम है तो अपनी पारिवारिक सीट कन्नौज छोड़कर गोरखपुर से लड़कर दिखाएं। गोरखपुर योगी आदित्यनाथ का गढ़ माना जाता है। स्मृति ने याद दिलाया कि उन्होंने खुद 2019 में राहुल गांधी को उनकी मजबूत सीट अमेठी से हराया था। उन्होंने अखिलेश को परिवारवादी नेता बताया और कहा कि विरासत में राजनीति पाने वाले आसान रास्ता चुनते हैं।

स्मृति ईरानी ने चुनौती भरे अंदाज में कहा कि अगर अखिलेश यादव इतना ही दमखम रखते हैं तो परंपरागत सीट छोड़कर गोरखपुर से लड़कर दिखाएं। उन्होंने कहा कि कामकाजी महिला पर टिप्पणी करना आसान होता है। जो लोग कभी नौकरी नहीं किए हों, वह अधिक टिप्पणी करते हैं।

स्मृति ईरानी ने कहा कि जहां तक की महिला आरक्षण विधेयक की बात है, अगर वे संसद में इस विधेयक के समर्थन में बात कहते तो बड़ा ही प्रोडक्टिव कंट्रीब्यूशन होता। उन्होंने कांग्रेस के विरोध पर भी सवाल उठाया। पूर्व सांसद ने कहा कि जब पार्टी ने महिला नेतृत्व दिया तो फिर इस आरक्षण के लिए इतना हल्ला क्यों? संवैधानिक व्यवस्था के तहत उन्होंने इसके समर्थन की अपील विपक्ष से की थी।

बीजेपी की इस रणनीति पर सवाल उठते हैं। बीजेपी हमेशा विपक्षी नेताओं को व्यक्तिगत हमलों से घेरती है। असली मुद्दों जैसे महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की परेशानी पर बात करने की बजाय वह व्यक्तिगत टिप्पणियों पर बहस घुमाती है। स्मृति ईरानी का यह चैलेंज भी उसी का हिस्सा लगता है। असल में बीजेपी जानती है कि अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में मजबूत सामाजिक समीकरण रखते हैं।

इसलिए वह उन्हें परिवारवाद का टैग देकर कमजोर दिखाना चाहती है।बीजेपी की सरकार में महिला आरक्षण बिल लाकर भी असली सशक्तिकरण नहीं हुआ। बिल अभी लागू नहीं हुआ है और बीजेपी जातिगत जनगणना जैसे जरूरी काम टाल रही है। स्मृति ईरानी जैसे नेता विपक्ष को चिढ़ाने में लगे रहते हैं, लेकिन जनता की समस्याओं का हल नहीं देत.

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