पुलवामा अटैक में फंसाने की धमकी, रिटायर्ड अफसर से 57 लाख की ठगी! CISF सिपाही निकला मास्टरमाइंड
कानपुर में पुलवामा आतंकी हमले में फंसाने की धमकी देकर रिटायर्ड अधिकारी से 57 लाख की ठगी का खुलासा हुआ। पुलिस ने इंटरनेशनल डिजिटल अरेस्ट गैंग का भंडाफोड़ कर 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया, CISF सिपाही भी मास्टरमाइंड निकला।

4पीएम न्यूज नेटवर्कः कानपुर में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे के साथ आम लोगों को भी चौंका दिया। पुलवामा आतंकी हमले जैसे संवेदनशील मामले में नाम जोड़ने की धमकी देकर एक रिटायर्ड अधिकारी से 57 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जांच में सीआईएसएफ का एक सिपाही भी इस अंतरराष्ट्रीय डिजिटल अरेस्ट गिरोह से जुड़ा मिला। क्राइम ब्रांच और साइबर थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर को बनाया शिकार
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि रामबाग निवासी रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर भैरव प्रसाद पांडेय ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने खुद को जांच एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताकर उनसे संपर्क किया। ठगों ने उन्हें और उनकी पत्नी को पुलवामा आतंकी हमले से जुड़ा बताते हुए डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी। आरोपियों ने कहा कि यदि वे जांच में सहयोग नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। डर और मानसिक दबाव में आकर पीड़ित ने आरोपियों के बताए खातों में 57 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
ऐसे खुली इंटरनेशनल गैंग की परतें
शिकायत के बाद साइबर थाना और क्राइम ब्रांच ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों और बैंक ट्रांजेक्शन की पड़ताल के बाद पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जयप्रकाश, शुभांकर सिंह, विक्रम सिंह, विनय प्रताप सिंह और राजू ठाकुर के रूप में हुई है। पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। मुख्य आरोपी राजू ठाकुर, जो झारखंड का रहने वाला है, ने बताया कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड सीआईएसएफ का सिपाही दाऊद अंसारी है।
CISF का सिपाही निकला मास्टरमाइंड
पुलिस के अनुसार दाऊद अंसारी की पोस्टिंग राउरकेला, ओडिशा में है, जबकि वह मूल रूप से पश्चिम बंगाल का निवासी है। आरोपी राजू ठाकुर ने खुलासा किया कि दाऊद अंसारी ही पूरे ऑपरेशन को संचालित करता था। वह लोगों की प्रोफाइल, सरकारी पद और आर्थिक स्थिति के आधार पर टारगेट चुनता था और फिर उन्हें बड़े मामलों में फंसाने की धमकी देकर ठगी करता था। यह खुलासा सामने आने के बाद पुलिस विभाग में भी हलचल तेज हो गई है।
ओडिशा जाएगी पुलिस टीम
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि दाऊद अंसारी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की एक विशेष टीम राउरकेला, ओडिशा स्थित सीआईएसएफ हेडक्वार्टर भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस गिरोह का नेटवर्क सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कई राज्यों और संभवतः अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जुड़े हो सकते हैं।
बरामद हुए मोबाइल, गाड़ी और अन्य सामान
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से कई मोबाइल फोन, एक गाड़ी और अन्य महत्वपूर्ण सामान बरामद किया है। इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि गिरोह के बाकी सदस्यों तक पहुंचा जा सके। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और अपराधी लोगों के डर का फायदा उठा रहे हैं।
क्या है डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड?
डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड में ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, कस्टम या किसी केंद्रीय एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फोन करते हैं। वे किसी बड़े अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स या आतंकी गतिविधियों में नाम जुड़ने की बात कहकर पीड़ित को मानसिक रूप से दबाव में डालते हैं। इसके बाद वे बैंक खाते की जांच, जमानत या सत्यापन के नाम पर बड़ी रकम ट्रांसफर करा लेते हैं।
लोगों के लिए पुलिस की अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या जांच एजेंसी के नाम पर आने वाली धमकी से घबराएं नहीं। किसी भी स्थिति में तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। कानपुर का यह मामला एक बार फिर बता रहा है कि साइबर अपराधी अब सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि लोगों के डर और भरोसे को भी हथियार बना रहे हैं।
रिपोर्ट – प्रांजुल मिश्रा
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