वर्दी का रौब या खुली गुंडागर्दी? मीरजापुर में महिला से बदसलूकी का वीडियो वायरल
मीरजापुर में मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत घर बनवा रही महिला से PRV 112 के सिपाही अमरपाल की कथित मारपीट का वीडियो वायरल है। पुलिस ने आरोपों से इनकार किया, लेकिन वीडियो और सवालों ने पूरे मामले को विवादों में ला दिया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मीरजापुर में एक वायरल वीडियो ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत अपना घर बनवा रही एक गरीब महिला के साथ कथित बदसलूकी और धक्का-मुक्की का मामला अब प्रशासनिक बहस का विषय बन चुका है। आरोप है कि PRV 112 के सिपाही अमरपाल ने न सिर्फ महिला के साथ अभद्र व्यवहार किया, बल्कि उसका मोबाइल छीनने की भी कोशिश की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कथित रूप से सिपाही महिला को धमकाते और रोकते हुए दिखाई दे रहे हैं। दूसरी ओर, मीरजापुर पुलिस ने प्रेस नोट जारी कर मारपीट की बात को “असत्य” बताया है। इसी विरोधाभास ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़िता कंचन देवी, पत्नी नंदलाल, ग्राम तेंदुआ खुर्द, लालगंज की निवासी हैं। वह मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत अपना घर बनवा रही थीं। आरोप है कि इसी दौरान PRV 112 के सिपाही अमरपाल मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य रुकवाने लगे। जब महिला ने इसका विरोध किया और मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू किया, तब कथित रूप से सिपाही ने उसे रोकने की कोशिश की। वायरल वीडियो में धक्का-मुक्की और मोबाइल छीनने जैसे दृश्य सामने आने का दावा किया जा रहा है। पीड़िता का आरोप है कि मदद करने के बजाय सिपाही ने उन्हें धमकाते हुए कहा “कहीं शिकायत करोगे तो भी मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा, मेरी पहुंच बड़े अधिकारियों तक है।”
पुलिस का प्रेस नोट और उठते सवाल
मीरजापुर पुलिस ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि “मारपीट की बात असत्य है।” हालांकि इसी प्रेस नोट में यह भी स्वीकार किया गया कि PRV के आरक्षी अमरपाल ने वीडियो बना रही महिला को वीडियो बनाने से मना किया था। यहीं से विवाद और गहरा हो गया। कानूनी जानकारों का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर पुलिस की कार्रवाई को रिकॉर्ड करना नागरिक का मौलिक अधिकार माना गया है। कई न्यायिक टिप्पणियों में भी पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए रिकॉर्डिंग को महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर कोई गलत कार्रवाई नहीं हुई, तो वीडियो बनाने से रोकने की जरूरत क्यों पड़ी?
दो बार पैमाइश, फिर भी जमीन पर विवाद?
स्थानीय लोगों के अनुसार, कंचन देवी के पास वन अधिकार कानून 2006 के तहत वैध आबादी पट्टा है। वन विभाग और हल्का लेखपाल द्वारा जमीन की दो बार पैमाइश भी की जा चुकी है। बताया जा रहा है कि दोनों बार यह स्पष्ट हुआ कि महिला अपने वैध पट्टे की सीमा के भीतर ही निर्माण करा रही थीं। इसके बावजूद पुलिस ने प्रेस नोट में जमीन को “वन विभाग की जमीन” बताकर मामले को विवादित स्वरूप देने की कोशिश की। यही बात अब स्थानीय स्तर पर पुलिस की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है।
पीड़ित परिवार पर ही कार्रवाई
मामले का सबसे विवादित पहलू यह है कि महिला और उसके परिवार के खिलाफ ही बीएनएस की धारा 126/135 के तहत शांति भंग की कार्रवाई कर दी गई। जबकि आरोपित सिपाही को तत्काल किसी कार्रवाई से राहत मिलती दिखी। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह एकतरफा कार्रवाई विपक्षी पक्ष के दबाव में की गई। ग्रामीणों ने कुछ नाम भी सामने रखे हैं और आरोप लगाया है कि उनके कहने पर पुलिस ने पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया।
ग्रामीणों का आरोप: पहले भी दिखाता रहा वर्दी का रौब
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिपाही अमरपाल पहले भी गरीब परिवारों के साथ अभद्रता, गाली-गलौज और जेल भेजने की धमकी जैसे मामलों में चर्चा में रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्दी की आड़ में भय का माहौल बनाकर कमजोर वर्ग के लोगों को दबाने की कोशिश की जाती रही है। इस घटना के बाद लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
पीड़िता की मांग
कंचन देवी ने क्षेत्राधिकारी लालगंज से आरोपी सिपाही अमरपाल के खिलाफ बीएनएस की धारा 74, 131 और 351 के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने तत्काल निलंबन की कार्रवाई और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत उनके घर का निर्माण बिना किसी बाधा के पूरा कराने की मांग भी रखी है। पीड़िता का कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए, न कि दबाव।
सोशल मीडिया पर बढ़ा आक्रोश
घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि एक तरफ जिले की महिला पुलिस कप्तान कानून व्यवस्था सुधारने और अपराधियों पर सख्ती की बात करती हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ वर्दीधारी खुद विवादों के केंद्र बन जाते हैं। जनता के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या अब सच दिखाना भी अपराध माना जाएगा?
रिपोर्ट : संतोष देव गिरी
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