डीएम के आदेश को भी ठेंगा! 4 महीने बाद भी जांच टीम का इंतजार कर रहे ग्रामीण

मीरजापुर के मनिगढ़ा गांव में विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये के घोटाले का आरोप है। डीएम के जांच आदेश के चार माह बाद भी टीम मौके पर नहीं पहुंची, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी और भ्रष्टाचार के आरोप तेज हो गए।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मीरजापुर के हलिया विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत मनिगढ़ा इन दिनों विकास कार्यों से ज्यादा कथित वित्तीय घोटाले की चर्चा में है। गांव के लोगों का आरोप है कि सरकारी योजनाओं के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान कागजों में दिखा दिया गया, लेकिन धरातल पर काम नजर नहीं आता। इससे भी बड़ा सवाल यह है कि जिलाधिकारी के स्पष्ट आदेश के बावजूद चार से पांच महीने बाद भी जांच टीम मौके पर नहीं पहुंची। ग्रामीणों का कहना है कि अब मामला सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता और जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिशों का भी बन गया है।

300 पन्नों की शिकायत के बाद डीएम ने दिए थे जांच के आदेश

ग्राम पंचायत मनिगढ़ा निवासी अब्दुल समद ने अक्टूबर 2025 में जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार को लगभग 300 पन्नों का शिकायती पत्र सौंपा था। इसमें गांव में विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। शिकायत में कहा गया कि कई कार्य केवल कागजों में पूरे दिखाए गए, जबकि जमीन पर उनका कोई अस्तित्व नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने 28 अक्टूबर 2025 को आदेश संख्या 3394/7/शिकायत जांच/2025-26 के तहत जांच समिति गठित कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। लेकिन महीनों बाद भी जांच की रफ्तार शून्य बनी हुई है।

कुएं, तालाब, सड़क और मस्जिद- सब कागजों में?

शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनके घर के सामने स्थित पुराने कुएं के जगत के निर्माण के नाम पर दो बार में एक लाख रुपये से अधिक का भुगतान दिखाया गया, जबकि वास्तविकता में निर्माण कार्य नहीं हुआ। ग्रामीणों के अनुसार, कुआं आज भी पुराने हालात में पड़ा है। यही नहीं, तालाब, सड़क, मस्जिद और अन्य विकास कार्यों के नाम पर भी सरकारी धन खर्च दिखाया गया, लेकिन धरातल पर कोई स्पष्ट काम दिखाई नहीं देता। इससे गांव में लाखों रुपये के गबन की आशंका और गहरी हो गई है।

महिला प्रधान के नाम पर संचालन, नियंत्रण किसी और के हाथ में?

शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत की महिला प्रधान के नाम पर पूरा वित्तीय संचालन किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि प्रधान को खुद यह जानकारी नहीं है कि गांव के विकास कार्यों पर कितनी राशि खर्च हुई और कहां खर्च की गई। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जांच समिति बनी, लेकिन मौके पर नहीं पहुंचा कोई अधिकारी

ग्रामीणों की सबसे बड़ी नाराजगी इसी बात को लेकर है कि डीएम के आदेश के बावजूद जांच टीम अब तक स्थल निरीक्षण के लिए नहीं पहुंची। न तो शिकायतकर्ता को जांच की कोई तारीख बताई गई और न ही कोई भौतिक सत्यापन हुआ। इस बीच आरोप है कि प्रधान, सचिव और बीडीओ स्तर पर कृत्रिम फोटोग्राफ तैयार कर मामले की लीपापोती की कोशिश भी की गई, ताकि मूल अनियमितताओं को छिपाया जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि जांच में देरी से साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं।

दस्तावेज देने से क्यों बच रहे प्रधान, सचिव और बीडीओ?

मामले को और गंभीर तब माना गया जब जिला लेखा परीक्षा अधिकारी, सहकारी समितियां एवं पंचायत लेखा परीक्षा मीरजापुर के अधिकारी बैजनाथ सिंह राठौर ने 20 मार्च 2026 को फिर से खंड विकास अधिकारी हलिया को पत्र लिखकर जरूरी अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा। इससे पहले भी 1 नवंबर 2025 और 20 जनवरी 2026 को पत्र भेजे जा चुके थे। पत्र में स्पष्ट कहा गया कि ग्राम पंचायत सचिव द्वारा आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण भौतिक सत्यापन और अभिलेखी जांच नहीं हो सकी। खंड विकास अधिकारी से तीन दिन के भीतर दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया था, लेकिन डेढ़ महीने बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। जब इस संबंध में पूछा गया, तो जांच टीम के अधिकारी ने साफ कहा “दो-दो बार तारीख दी गई है, लेकिन प्रधान, सचिव और बीडीओ संबंधित दस्तावेज नहीं दे रहे हैं।”

ग्रामीणों ने उठाई वीडियोग्राफी और सख्त कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों और शिकायतकर्ता ने मांग की है कि गठित जांच समिति को तत्काल प्रभाव से स्थल निरीक्षण के निर्देश दिए जाएं। जांच के समय शिकायतकर्ता को पूर्व सूचना अनिवार्य रूप से दी जाए और पूरी जांच प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाए। उनका कहना है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है, ताकि किसी प्रकार की लीपापोती न हो सके। साथ ही दोषियों के खिलाफ विधिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी मांग की गई है।

पुराने घोटालों की याद भी ताजा

हलिया विकासखंड का नाम पहले भी मनरेगा घोटालों में सामने आ चुका है। वर्ष 2007 से 2010 के बीच राज्य के कई जिलों में मनरेगा योजना के तहत हुए भ्रष्टाचार में मीरजापुर का यह क्षेत्र भी जांच के दायरे में रहा था। तब 54 लोगों, जिनमें अधिकारी, कर्मचारी और ग्राम प्रधान शामिल थे, के खिलाफ कार्रवाई और मुकदमे दर्ज हुए थे। ऐसे में वर्तमान मामला ग्रामीणों की चिंता को और बढ़ा रहा है।

रिपोर्ट – संतोष देव गिरी

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