ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना सख्त, कहा- आतंकवाद के खिलाफ अभियान नहीं रुकेगा
पहलगाम में आतंकी हमले के बाद सेना ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए ऑपरेशन सिंदूर किया था. इसे अभियान को एक साल हो चुके हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पहलगाम में आतंकी हमले के बाद सेना ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए ऑपरेशन सिंदूर किया था. इसे अभियान को एक साल हो चुके हैं.
इस खास मौके पर जयपुर में सेना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया. लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर तो बस शुरुआत है, आतंक के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी.
ऑपरेशन सिंदूर के आज (7 मई) एक साल पूरा होने पर सेना ने जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अंत नहीं है, ये तो बस शुरुआत है. उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन में हमने अपने लक्ष्य हासिल किए. हमें सफलता मिली. हमने दुश्मन को सबक सिखाया और आतंक के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी.
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि आत्मनिर्भरता सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि वास्तव में एक शक्तिवर्धक कारक है. आज हमारे 65% से अधिक रक्षा उपकरण स्वदेशी रूप से निर्मित हो रहे हैं. मैं यहां हमारी निकास रणनीति और तनाव नियंत्रण के बारे में भी बात करना चाहता हूं.
विश्व भर में चल रहे लंबे संघर्षों के दौर में, हमने कड़ा प्रहार किया, स्पष्ट रूप से परिभाषित उद्देश्यों को प्राप्त किया और फिर शत्रुता समाप्त करने का निर्णय लिया जब पाकिस्तानी बातचीत के लिए विवश हुए और उन्होंने हमसे रुकने का अनुरोध किया.
सेना ने और क्या कहा?
उन्होंने कहा कि ये उद्देश्य एक सुनियोजित हमले और तीखे प्रहार के माध्यम से प्राप्त किए गए, जिसने दुश्मन की जोखिम लेने की प्रवृत्ति को बदल दिया और भारत को किसी लंबे युद्ध या संघर्ष में उलझाए बिना उसकी कमान और नियंत्रण को बाधित कर दिया, जिसके दुष्परिणाम हम विश्व भर में चल रहे संघर्षों में देख रहे हैं. खुफिया एजेंसियों ने सटीक जानकारी प्रदान की जो सटीक लक्ष्यीकरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध इकाइयों ने सूचना प्रभुत्व बनाए रखा. सरकार ने अंतरराष्ट्रीय वातावरण के साथ-साथ आंतरिक सुरक्षा और जनता को आश्वस्त करने का प्रबंधन किया. सशस्त्र बलों ने गतिज कार्रवाई को अंजाम दिया. अनुशासन, सटीकता और न्यूनतम दुष्प्रभाव के साथ इस चरण को पूरा किया गया.
‘इस ऑपरेशन ने स्वदेशी क्षमताओं को भी प्रदर्शित किया’
राजीव घई ने कहा, …इस ऑपरेशन ने हमारी स्वदेशी क्षमताओं को भी प्रदर्शित किया. इसमें इस्तेमाल किए गए हथियार प्रणालियों, गोला-बारूद, रॉकेट और मिसाइलों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट का एक बड़ा हिस्सा भारत में ही विकसित और निर्मित किया गया था.
ब्रह्मोस, आकाश, उन्नत निगरानी और लक्ष्य-निर्धारण प्रणालियों के साथ-साथ स्वदेशी गोला-बारूद और कल-पुर्जों ने भी इसमें निर्णायक भूमिका निभाई. स्वदेशी उपकरणों का मतलब केवल आत्मनिर्भरता ही नहीं था, बल्कि यह लचीलापन भी था कि हम अपनी ऑपरेशनल ज़रूरतों के हिसाब से इन्हें ढाल सकें, आपूर्ति श्रृंखलाओं को बनाए रख सकें और पूरी गति व आत्मविश्वास के साथ जवाब दे सकें.
22 अप्रैल, 2025 को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद सेना ने पाकिस्तान को सबक सिखाया था. उसने ऑपरेशन सिंदूर का आगाज कर पाकिस्तान में ताबड़तोड़ हमले किए और कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया. हिंदुस्तान की जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तान हिल गया था और शांति की अपील की, जिसे भारत ने स्वीकार किया.



