एक वोट के फैसले पर SC नाराज, मद्रास HC के आदेश पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा फ्लोर टेस्ट के दौरान मतदान रोकने वाले मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर नाराजगी जताते हुए रोक लगा दी.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा फ्लोर टेस्ट के दौरान मतदान रोकने वाले मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर नाराजगी जताते हुए रोक लगा दी.

शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के रिट याचिका के क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाया. कोर्ट ने प्रतिवादियों से दो हफ्ते में जवाब मांगा है. डीएमके उम्मीदवार पेरियाकरुप्पन ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. वह एक वोट से चुनाव हार गए थे.

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान मतदान करने से रोकने वाले मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर नाराजगी जताई. शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए कहा कि रिट याचिका कैसे दायर की जा सकती है. टीवीके विधायक श्रीनिवास सेतुपति की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिवादी से दो हफ्ते में जवाब तलब किया, जिसमें उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी.

मद्रास हाई कोर्ट ने यह आदेश डीएमके उम्मीदवार पेरियाकरुप्पन द्वारा दायर याचिका पर दिया था, जो एक वोट से हार गए थे. डीएमके के प्रतिद्वंद्वी ने दावा किया कि उनके पक्ष में एक डाक वोट गलती से दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में भेज दिया गया था. जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में आदेश जारी किया. डीएमके उम्मीदवार पेरियाकरुप्पन महज एक वोट से चुनाव हार गए थे.

इस मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह आदेश स्पष्ट रूप से अवहेलना है. जस्टिस नाथ ने कहा कि चलिए रोहतगी की बात सुनते हैं. सिंघवी ने कहा कि वे कहेंगे कि फ्लोर टेस्ट शुरू हो गया है. अगर किसी आदेश की कड़ी आलोचना होनी चाहिए तो वह यही है. वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि मैं एक वोट से हार गया.

SC ने रिट याचिका के क्षेत्राधिकार पर उठाया सवाल
इस पर बेंच ने कहा तो आप रिट याचिका दायर करेंगे? जस्टिस मेहता ने कहा कि आप स्थगन आदेश पर भी कारण बताने वाला आदेश चाहते हैं? यह तो बेहद ही गलत है. हाईकोर्ट का कहना है कि उपाय चुनाव याचिका है, फिर भी अनुच्छेद 226 याचिका पर विचार किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी.

कोर्ट ने अपने आदेश में प्रतिवादी के वकील को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है. याचिकाकर्ता को इसके बाद प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मिलेगा. इस बीच विवादित आदेश का स्थगित रहेगा.

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