नॉर्वे में पत्रकार के सवालों से भागे मोदी, हो गई इंटरनेशनल बेइज्जती!
बाहर देशों में जब भी मोदी जाते हैं बेइज्जती करवाते हैं। न सिर्फ अपनी बेइज्जती बल्कि पूरे देश की बेइज्जती करवाते हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जवाब न देना मोदी की आदत नहीं फितरत बनती जा रही है। मोदी जी सवालों के जवाब सिर्फ उन्ही को देते हैं जो उनसे पूछते हैं कि मोदी जी आप आम काटकर खाते हैं या चूस कर कहते हैं।
या फिर गोदी मीडिया के उन पत्रकारों को जवाब देते हैं जो सवाल करते हैं कि आप कौनसी टॉनिक लेते हैं जो चेहरा चमकदार है या फिर ऐसे सवाल करते हैं कि आप इतना काम कैसे कर लेते हैं। खैर ये रिश्ता है मोदी और गोदी मीडिया का जो पिछले एक दसक से ज्यादा से चला आ रहा है। जिसका कोई तोड़ नहीं है। लेकिन से सब सिर्फ यहीं है। बाहर देशों में जब भी मोदी जाते हैं बेइज्जती करवाते हैं। न सिर्फ अपनी बेइज्जती बल्कि पूरे देश की बेइज्जती करवाते हैं। खैर ये सब हम इस लिए कह रहे हैं क्योंकि मोदी की एक बार फिर हर जगह थू-थू हो रही है।
दरअसल हाल ही में नॉर्वे की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक नॉर्वेजियन पत्रकार हेल्ले लिंग स्वेन्डसेन ने जोर से सवाल किया, “प्राइम मिनिस्टर मोदी, व्हाई डोंट यू टेक सम क्वेश्चन्स फ्रॉम द फ्रीस्ट प्रेस इन द वर्ल्ड?” लेकिन मोदी जी तुरंत नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ वहां से चल दिए, जैसे पीछे कोई भूत लग गया हो। यह वीडियो देखकर लगता है कि सवालों से बचना उनकी आदत बन चुकी है। शायद उन्हें डर था कि कहीं एप्स्टीन फाइल्स, या अन्य संवेदनशील सवाल न पूछ लिए जाएं।
खैर मोदी के इस वीडियो को लेकर विपक्ष भी आगबबूला है और जमकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने एक वीडियो शेयर करते हुए मोदी को जमकर घेरा। सिर्फ मोदी ही नहीं… मोदी के साथ गए अधिकारियों से भी सवालों के घेरे में है। क्योंकि वो भी नॉर्वे के पत्रकारों को जवाब नहीं दिया गया…
गौरतलब है कि नॉर्वे की प्रेस पूरी तरह स्वतंत्र है।
विश्व प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में नॉर्वे लगातार नंबर 1 पर है। वहां के पत्रकार बिना किसी डर के सत्ता के खिलाफ सवाल पूछते हैं, भ्रष्टाचार उजागर करते हैं और नेताओं को जवाबदेह बनाते हैं। नॉर्वे में मीडिया पर सरकारी दबाव नहीं, कोई ED-CBI का डर नहीं, बल्कि पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। हेल्ले लिंग जैसी पत्रकार बिना झिझक पावरफुल लीडर्स से सवाल करती हैं क्योंकि उनका देश उन्हें सुरक्षा और स्वतंत्रता देता है। इतना ही नहीं दोस्तों वहां संवाद और बहस करने पर प्रोत्साहन मिलता है, न कि दबाया जाता है। और जांच की धमकी दी जाती है।
लेकिन इससे ठीक उलट, भारत की ‘गोदी मीडिया’ चरणचुंबक बनकर रह गई है। मोदी के 12 साल के शासन में उन्होंने कभी भी भारत में अनस्क्रिप्टेड प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की। सिर्फ चुनिंदा पत्रकारों को इंटरव्यू देते हैं जो प्रशंसात्मक सवाल पूछें। RSF के मुताबिक भारत 180 देशों में 157वें स्थान पर है। स्वतंत्र पत्रकारों पर हमले, FIR, ED रेड, चैनलों पर दबाव, विज्ञापन रोकना और सेल्फ-सेंसरशिप आम हो गई है।
कई बड़े मीडिया हाउस सरकार की लाइन पर चलते हैं, विपक्ष की खबरें दबाते हैं और मोदी जी की तारीफ में लगे रहते हैं। लेकिन वहीं दूसरी तरफ 4PM जैसे बेकाबक चैनल को सच्ची खबरें दिखाने और सरकार से सवाल करने पर चैनल को बंद कर दिया जाता है। यही कारण है कि असली मुद्दे जैसे बेरोजगारी, महंगाई, किसान संकट जैसे घोटाले पर गहरी बहस नहीं होती।
अगर भारतीय मीडिया भी नॉर्वे की तरह सवाल पूछने लगे तो मोदी जी की क्या हालत होगी? शायद रोज प्रेस कॉन्फ्रेंस से भागना पड़ जाए। राहुल गांधी ने ठीक कहा कि जब कुछ छिपाने को नहीं होता तो डर भी नहीं होता। लेकिन यहां मीडिया ‘चरणचुंबक’ बनकर काम करती है, जो सत्ता की चापलूसी को पत्रकारिता समझ बैठी है। नॉर्वे में मीडिया की स्वतंत्रता लोकतंत्र को मजबूत करती है।
वहां नेता जनता के सवालों का सामना करते हैं, पारदर्शिता बनी रहती है। भारत में गोदी मीडिया ने लोकतंत्र को कमजोर किया है। सत्ता के प्रति आंख बंद कर लेना राष्ट्रहित में नहीं है। मोदी को नॉर्वे से सबक लेना चाहिए कि सवालों से भागने के बजाय उनका सामना करना लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करता है। लेकिन मोदी सबक लेने के बयाज सवालों से भागना ज्यादा पसंद आता है।



