उमर खालिद को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत

- जमानत याचिका लोअर कोर्ट से खारिज
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने उमर खालिद को 2020 के उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश में शामिल होने के आरोप में दायर यूएपीए मामले में अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। कडक़डड़ूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने खालिद की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने अपने चाचा के निधन के बाद होने वाले चेहलम अनुष्ठान में शामिल होने और 2 जून को होने वाली अपनी मां की सर्जरी से पहले और बाद की चिकित्सा जांच के लिए 15 दिनों की अंतरिम जमानत मांगी थी।
अदालत ने आज कहा कि सिर्फ इसलिए कि उमर खालिद और अन्य आरोपियों को पहले अंतरिम जमानत दी जा चुकी है और उन्होंने कभी भी शर्तों का उल्लंघन नहीं किया है, इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार जब भी आरोपी जमानत मांगे, उसे जमानत दे दी जाए। खालिद के खिलाफ दर्ज एफआईआर संख्या 59/2०2० में उआधिकारिक प्रशासन की धारा 13, 16, 17, 18, शस्त्र अधिनियम की धारा 25 और 27, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से रोकने वाले अधिनियम, 1984 की धारा 3 और 4 और भारतीय दंड संहिता, 186० के तहत अन्य अपराधों सहित गंभीर आरोप शामिल हैं। एफआईआर संख्या 59/2०2० में जिन अन्य लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए गए हैं। इसके बाद उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किया गया।
अगर जमानत मांगनी थी तो मृत्यु के समय ही मांगते
न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि अपने चाचा के चेहलम समारोह में शामिल होना इतना जरूरी नहीं है और अगर रिश्ता इतना करीबी और घनिष्ठ था, तो उन्हें मृत्यु के समय ही जमानत मांगनी चाहिए थी, न कि इतने लंबे समय बाद। मां की सर्जरी के संबंध में, अदालत ने कहा कि खालिद की अन्य बहनें हैं जो मां की देखभाल कर सकती हैं और पिता भी उनकी देखभाल कर सकते हैं। दिल्ली पुलिस ने अंतरिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मामले की संवेदनशीलता और व्यापक परिणामों को देखते हुए खालिद की रिहाई से सार्वजनिक व्यवस्था और प्रशासन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यह तर्क दिया गया कि अंतरिम जमानत याचिका पूरी तरह से निराधार, योग्यताहीन और प्रारंभिक चरण में ही खारिज किए जाने योग्य है क्योंकि खालिद को अंतरिम जमानत देने के लिए कोई असाधारण, अत्यावश्यक या बाध्यकारी परिस्थिति मौजूद नहीं है।



