आखिर कौन हैं तिरुवनचूर राधाकृष्णन? जानिए नए केरल विधानसभा अध्यक्ष का राजनीतिक सफर
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तिरुवनचूर राधाकृष्णन 16वीं केरल विधानसभा के नए अध्यक्ष चुने गए हैं। UDF के भारी बहुमत के बीच हुए मतदान में उन्हें 101 वोट मिले। वहीं LDF और बीजेपी उम्मीदवारों को करारी हार का सामना करना पड़ा।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: केरल की राजनीति में शुक्रवार का दिन कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के लिए बेहद अहम साबित हुआ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अनुभवी विधायक तिरुवनचूर राधाकृष्णन को 16वीं केरल विधानसभा का नया अध्यक्ष चुन लिया गया। विधानसभा में हुए मतदान में उन्हें भारी बहुमत मिला, जिसने राज्य की बदली हुई राजनीतिक तस्वीर को और स्पष्ट कर दिया।
140 सदस्यीय विधानसभा में राधाकृष्णन को 101 वोट हासिल हुए। वहीं वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के उम्मीदवार ए. सी. मोइदीन को 35 वोट मिले, जबकि बीजेपी के बी. बी. गोपाकुमार को 3 वोट प्राप्त हुए। प्रोटेम स्पीकर जी. सुधाकरन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
केरल विधानसभा में UDF का मजबूत बहुमत
हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस नेतृत्व वाले UDF ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 102 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसी बहुमत के दम पर तिरुवनचूर राधाकृष्णन का अध्यक्ष बनना लगभग तय माना जा रहा था। UDF गठबंधन में कांग्रेस के अलावा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) भी प्रमुख सहयोगी दल है। कांग्रेस को जहां 63 सीटें मिलीं, वहीं IUML ने 22 सीटों पर जीत हासिल की। दूसरी ओर, पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाला LDF केवल 35 सीटों तक सिमट गया।
बीजेपी ने भी बढ़ाई मौजूदगी
इस चुनाव में बीजेपी ने भी केरल की राजनीति में अपनी उपस्थिति मजबूत की है। पार्टी ने पहली बार तीन सीटों पर जीत दर्ज कर विधानसभा में अपनी संख्या शून्य से बढ़ाकर तीन कर ली है। बीजेपी ने तिरुवनंतपुरम के नेमोम और कज़ाकूटम के साथ कोल्लम जिले के चथन्नूर सीट पर जीत हासिल की। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार बी. बी. गोपाकुमार को केवल तीन वोट ही मिले।
कौन हैं तिरुवनचूर राधाकृष्णन?
तिरुवनचूर राधाकृष्णन केरल कांग्रेस के अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। वे कई बार विधायक रह चुके हैं और राज्य सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। ओमन चांडी सरकार के दौरान वे केरल के गृह मंत्री और सतर्कता मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा वन, परिवहन, खेल और पर्यावरण जैसे विभागों का कार्यभार भी उनके पास रहा है। राजनीतिक अनुभव और प्रशासनिक पकड़ को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए चुना था।
विधानसभा अध्यक्ष पद क्यों अहम माना जाता है?
केरल जैसे राजनीतिक रूप से सक्रिय राज्य में विधानसभा अध्यक्ष का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सदन की कार्यवाही को निष्पक्ष और सुचारु रूप से चलाना अध्यक्ष की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में केरल विधानसभा में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। ऐसे में तिरुवनचूर राधाकृष्णन का अनुभव सदन संचालन में अहम भूमिका निभाएगा।
बदली हुई राजनीति का संकेत
इस चुनाव परिणाम ने साफ कर दिया है कि केरल की राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है। एक तरफ दस साल पुरानी वामपंथी सरकार सत्ता से बाहर हुई, वहीं कांग्रेस गठबंधन मजबूत बहुमत के साथ वापसी करने में सफल रहा। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि नई सरकार और नए विधानसभा अध्यक्ष के नेतृत्व में केरल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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