बाँदा में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान: “गौमाता के नाम पर वोट लेने वाली सरकार अब मौन क्यों?”
बाँदा पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौसंरक्षण और गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गौवध जारी है और जरूरत पड़ी तो आगामी चुनाव में अपनी राजनीतिक पार्टी भी बनाएंगे।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के बाँदा जनपद में मंगलवार देर रात उस समय धार्मिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब ज्योर्तिमठ बद्रिकाश्रम के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपनी गोविष्ट यात्रा और गौ संरक्षण अभियान के तहत पहुंचे। शहर में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने गौ संरक्षण, सनातन और राजनीति को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला।
“कागजों में हो रही गौसेवा, जमीन पर जारी है गौवध”
बाँदा पहुंचने के बाद रामलीला गणेश भवन में आयोजित कार्यक्रम में शंकराचार्य ने कहा कि सरकार सिर्फ कागजों में गौसेवा दिखा रही है, जबकि हकीकत में प्रदेश में लगातार गौवध जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में आने से पहले गौमाता के नाम पर राजनीति करने वाले लोग अब इस मुद्दे पर चुप हैं। उन्होंने कहा, “सरकार सनातन के नाम पर वोट मांगती है, लेकिन व्यवहार में धर्मनिरपेक्ष होने की बात करती है। अगर वास्तव में सनातन की चिंता होती तो गौवंश की यह स्थिति नहीं होती।”
3 मई से शुरू हुई यात्रा, 403 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने का लक्ष्य
शंकराचार्य ने बताया कि उनकी यह गोविष्ट यात्रा 3 मई से शुरू हुई है और इसका उद्देश्य पूरे उत्तर प्रदेश में गौसंरक्षण को लेकर जनजागरण करना है। उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों तक पहुंचेगी, ताकि लोगों को गौमाता के संरक्षण के लिए जागरूक किया जा सके।
“जरूरत पड़ी तो बनाएंगे राजनीतिक पार्टी”
अपने संबोधन में शंकराचार्य ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भी बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह अपनी राजनीतिक पार्टी बनाएंगे और चुनाव मैदान में प्रत्याशी भी उतारेंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में लोग सिर्फ बिजली, पानी और सड़क के मुद्दों पर वोट नहीं करेंगे, बल्कि गौमाता की रक्षा के संकल्प के साथ मतदान करेंगे।
सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
शंकराचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में गौमांस की बिक्री को रोकने के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गौसंरक्षण केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके लिए ठोस नीति और सख्त कार्रवाई जरूरी है।
राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बढ़ी चर्चा
शंकराचार्य के इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। उनके राजनीतिक पार्टी बनाने के संकेत को आगामी चुनावी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं समर्थक इसे गौसंरक्षण के लिए बड़ा जनआंदोलन बता रहे हैं।
रिपोर्ट – इक़बाल खान
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