नौकरी छोड़कर चुना UPSC का रास्ता, पिता का सपना पूरा कर IPS बनीं स्वीटी सहरावत

बिहार कैडर की आईपीएस अधिकारी स्वीटी सहरावत की सफलता की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बिहार कैडर की आईपीएस अधिकारी स्वीटी सहरावत की सफलता की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा है.

इंजीनियरिंग की पढ़ाई और अच्छी नौकरी छोड़कर उन्होंने अपने दिवंगत पिता के सपने को पूरा करने का फैसला किया. कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर आईपीएस अधिकारी बनने का सपना साकार किया.

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है. हर साल लाखों युवा इस परीक्षा में सफलता हासिल कर प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में जाने का सपना देखते हैं. बिहार कैडर की आईपीएस अधिकारी स्वीटी सहरावत की कहानी भी ऐसी ही प्रेरणादायक है.

उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद अच्छी नौकरी हासिल की, लेकिन अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए सब कुछ छोड़कर यूपीएससी की तैयारी शुरू की. कठिन मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने परीक्षा पास की और आईपीएस अधिकारी बनीं.

इंजीनियरिंग के बाद चुना सिविल सेवा का रास्ता

स्वीटी सहरावत ने दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने डिजाइन इंजीनियर के तौर पर काम भी किया. हालांकि उनके पिता चाहते थे कि वह सिविल सेवा में जाएं और समाज के लिए काम करें. पिता की इस इच्छा को उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया और नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी.

पिता के सपने को बनाया अपनी मंजिल

स्वीटी सहरावत के पिता दिल्ली पुलिस में हेड कांस्टेबल थे. वर्ष 2013 में एक सड़क हादसे में उनका निधन हो गया. इस कठिन समय ने स्वीटी को कमजोर करने के बजाय और मजबूत बना दिया. उन्होंने पिता के सपने को पूरा करने का संकल्प लिया और लगातार मेहनत की.

उनकी मेहनत रंग लाई और वर्ष 2019 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 187 हासिल की. इसके बाद उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में हुआ.

बिहार में है पोस्टिंग

वर्तमान में स्वीटी सहरावत बिहार के औरंगाबाद जिले में सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) के रूप में तैनात हैं. हाल ही में केरल के पूर्व राज्यपाल और पूर्व आईपीएस अधिकारी Nikhil Kumar के साथ उनकी मुलाकात का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ. वीडियो सामने आने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं.

कुछ लोगों ने निजी जीवन के सम्मान की बात कही, जबकि कुछ का मानना है कि सार्वजनिक पदों पर कार्यरत अधिकारियों को हमेशा जनता के प्रति जवाबदेह और उपलब्ध रहना चाहिए. इस वजह से यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है.

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