डेस्क जॉब सेहत के लिए एक बड़ा खतरा

दफ्तर में काम करने वाले न करें ये गलती

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
ऑफिस में काम करने वाले अधिकतर लोग एक ही जगह देर तक बैठकर काम करते हैं। देखा जाए तो ऐसा करना आपके शरीर में मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है और ये संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है। पहले केसमय केलोगों का सपना हुआ करता था कि कोई ऐसी नौकरी मिल जाए जहां सिर्फ बैठकर आराम से काम करना हो, मगर आज वही बैठकर लंबे समय तक काम करना सेहत के लिए जोखिम भरा हो चुका है। आजकल की कॉर्पोरेट कल्चर में डेस्क जॉब बहुत कॉमन है, और ये सेहत के लिए एक बड़ा खतरा बनती जा रही है। क्योंकि अगर आप लगातार एक घंटे से ज्यादा एक जगह बैठे रहते हैं, तो आपका मेटाबॉलिज्म 50-70 प्रतिशत तक कम हो सकता है। यही वह मेन कारण है जिससे कोलेस्ट्रॉल, शुगर, पेट की चर्बी और वजन तेजी से बढऩे लगता है। अक्सर सबसे मेहनती कर्मचारी ही जल्दी बीमार पड़ते हैं क्योंकि वे 7-8 घंटे बिना हिले-डुले काम में मग्न रहते हैं। चूंकि नौकरी छोडऩा समाधान नहीं है, इसलिए डॉक्टर ने कुछ ऐसी आसान आदतों और 5 लाइफ-सेविंग टिप्स का सुझाव है, जिससे आप काम के साथ-साथ अपनी सेहत को भी सुरक्षित रख सकते हैं।

हर घंटे में 5 मिनट का ब्रेक जरूरी

पहला सुझाव है कि हर एक घंटे के काम के बाद 5 मिनट का मूवमेंट बहुत जरूरी है। इसके लिए आप अपनी जगह पर खड़े हो सकते हैं, हल्की स्ट्रेचिंग कर सकते हैं या ऑफिस के गलियारे में स्लो वॉक कर सकते हैं। अगर किसी मीटिंग के कारण आप खड़े नहीं हो सकते, तो कुर्सी पर बैठे-बैठे ही अपने ऐंकल सर्किल करें ताकि पैरों में रक्त संचार बना रहे। आप इन छोटे-छोटे बदलाव करके खुद को स्वस्थ्य रख सकते हैं और गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं।

लंच के बाद वॉकिंग

पानी पीने के बहाने हर घंटे अपनी डेस्क से उठें, एक गिलास पानी पिएं और फिर वापस आएं, इससे आप टहल भी लेंगे और पानी भी पी लेंगे। दोपहर के भोजन के बाद तुरंत काम पर न लौटें, बल्कि अपने कलीग के साथ बात करते-करते 15-20 मिनट तक जरूर टहलें। यह छोटी सी आदत आपके पाचन को दुरुस्त रखती है और लंच के बाद आने वाली सुस्ती को भी दूर कर देगी। भोजन के बाद टहलने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है जिससे कैलोरी बर्न होती है। ऐसे में खाना खाने के बाद अगर आप रोजाना कुछ देर तक चलते हैं तो इससे आपका वजन कंट्रोल में रहता है।

मीटिंग और कॉल्स को बनाएं एक्टिव

अगर संभव हो तो फोन कॉल्स या अनौपचारिक मीटिंग्स को टहलते हुए अटेंड करने की कोशिश करें। लगातार बैठे रहने से शरीर की बड़ी मांसपेशियां निष्क्रिय हो जाती हैं, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढऩे का खतरा रहता है। एक्टिव रहने से न सिर्फ आपका वजन नियंत्रित रहता है, बल्कि मस्तिष्क में ऑक्सीजन का प्रवाह बढऩे से आपकी कार्यक्षमता भी बढ़ती है। और रोजमर्रा के विषयों पर खुलकर बातचीत होने से काम में सुगमता और वृद्धि देखने को मिलती है। ऐसे में कर्मचारी भविष्य की चिंताओं या नए विचारों को साझा करने में खुलकर भाग लेते हैं। इसके अलावा, यह धारणा कि नियमित बैठकें काम करने की दक्षता को कम करती हैं, सही नहीं है। वास्तव में, सार्थक और खुला संवाद मानसिक संसाधनों की पुन: पूर्ति करने में मदद करता है, जिससे कर्मचारी अधिक उत्पादक और दृढ़ बनते हैं।

 

 

Related Articles

Back to top button