राहुल का मोदी सरकार पर बड़ा वार, 100 में 80 इंजीनियर बेरोजगार? युवाओं के भविष्य पर छिड़ी बहस
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने युवाओं की बेरोजगारी को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा... इंजीनियरिंग डिग्री के बाद रोजगार की स्थिति...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इंजीनियरिंग कर रहे छात्रों से संवाद किया.. और उनके दुखों को साझा किया.. और सिस्टम पर सवाल उठाए.. आपको बता दें कि राहुल गांधी ने छात्रों से तमाम मुद्दों पर बात की.. और उनके दुखों को जाना.. छात्र मेहनत करके पढ़ाई करते हैं.. अपने सपने सुख सब त्याग कर तैयारी करते हैं.. वहीं पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें नौकरी नहीं मिलती है.. और वे बेरोजगारी की मार झेलने के मजबूर हो जाते हैं.. सरकार दावे तो बहुत करती है.. लेकिन युवाओं को उनके स्किल के हिसाब से रोजगार नहीं उपलब्ध करा पा रही है.. जिसको लेकर राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए छात्रों के दुख और दर्द को समझा.. और सरकार को आईना दिखाने का काम किया..
आपको बता दें कि भारत में इंजीनियरिंग की पढ़ाई एक सपना बन चुकी है.. लेकिन उस सपने को हकीकत में बदलना बहुत मुश्किल हो गया है.. आज देश में 100 इंजीनियरों में से करीब 80 इंजीनियर बेरोजगार हैं.. यह आंकड़ा बहुत चौंकाने वाला है.. लाखों युवा चार साल की मेहनत, माता-पिता की मेहनत की कमाई.. और बड़ी उम्मीदों के साथ इंजीनियरिंग की डिग्री लेते हैं.. लेकिन नौकरी नहीं मिलती.. डिग्री हाथ में आती है तो बेरोजगारी का बोझ कंधों पर आ जाता है.. इस स्थिति ने पूरे देश में चिंता पैदा कर दी है.. युवा, अभिभावक और विशेषज्ञ सभी कह रहे हैं कि.. अब इस सिस्टम को बदलना होगा.. शिक्षा, रोजगार और उद्योग के बीच तालमेल बैठाना जरूरी है.. वरना करोड़ों युवाओं का भविष्य बर्बाद हो जाएगा..
भारत दुनिया का सबसे बड़ा इंजीनियरिंग टैलेंट पूल वाला देश है.. हर साल लाखों छात्र इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला लेते हैं.. कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी ब्रांचेस बहुत पॉपुलर हैं.. माता-पिता सोचते हैं कि बेटा-बेटी इंजीनियर बन गया तो जीवन सेट हो जाएगा.. लेकिन हकीकत कुछ और है.. कई सर्वे बताते हैं कि 70-80 प्रतिशत इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स को नौकरी नहीं मिल पाती.. या फिर उन्हें बहुत कम सैलरी वाली नौकरी मिलती है.. जो उनकी डिग्री के अनुरूप नहीं होती.. कुछ इंजीनियर टैक्सी चलाते हैं.. कुछ दुकान पर काम करते हैं.. और कई तो घर बैठे रह जाते हैं.. यह स्थिति युवाओं में हताशा और गुस्सा पैदा कर रही है..
भारत में इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है.. 1990 के दशक में कुछ सौ कॉलेज थे, आज हजारों हैं.. प्राइवेट कॉलेजों की बाढ़ आ गई है.. कई कॉलेजों में अच्छे शिक्षक नहीं हैं.., लैबोरेटरी उपकरण पुराने हैं और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग नहीं होती.. छात्र सिर्फ किताबी ज्ञान लेकर निकलते हैं.. उद्योग को जो स्किल चाहिए, वह पढ़ाई में नहीं सिखाई जाती.. कंपनियां कहती हैं कि फ्रेशर इंजीनियर काम के लायक नहीं होते.. उन्हें फिर से ट्रेनिंग देनी पड़ती है.. इस गैप की वजह से बेरोजगारी बढ़ रही है..
इसके अलावा, एडमिशन के लिए सिर्फ एंट्रेंस एग्जाम पास करना काफी है.. काउंसलिंग में कम मार्क्स वाले छात्र भी अच्छे कॉलेजों में चले जाते हैं.. नतीजा यह होता है कि बहुत से छात्र बेसिक कॉन्सेप्ट्स भी क्लियर नहीं रख पाते.. पढ़ाई पूरी होने के बाद वे जॉब मार्केट में फिट नहीं बैठते.. सरकार और यूनिवर्सिटी को अब इस सिस्टम को बदलना होगा.. कोर्स को उद्योग की जरूरत के हिसाब से अपडेट करना चाहिए.. प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, इंटर्नशिप और स्किल डेवलपमेंट को अनिवार्य बनाना चाहिए..
एक इंजीनियरिंग छात्र चार साल की पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च करता है.. माता-पिता उधार लेते हैं, जमीन बेचते हैं या अपनी जमा पूंजी लगा देते हैं.. डिग्री हाथ में आती है तो उम्मीद होती है कि अच्छी नौकरी मिलेगी.. लेकिन जब नौकरी नहीं मिलती तो पूरा परिवार टूट जाता है.. युवा मानसिक तनाव में रहते हैं.. कई युवा डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं.. कुछ तो गलत रास्ते पर चले जाते हैं..
मध्यम वर्ग के परिवारों में यह सबसे बड़ी समस्या बन गई है.. बेटा इंजीनियर बना, लेकिन बेरोजगार है तो शादी भी मुश्किल हो जाती है.. लड़कियां भी इंजीनियरिंग करती हैं.. लेकिन जॉब न मिलने पर घर संभालने को मजबूर होती हैं.. यह स्थिति समाज के लिए घातक है.. युवा ऊर्जा बर्बाद हो रही है.. देश की प्रगति रुक रही है..



