पार्टी के भीतर आत्म-मंथन करने की जरुरत

- शिवसेना यूबीटी में भगदड़ पर रास सांसद संजय राउत की सलाह
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना में वफादारों के बीच असंतोष के संकेत तब मिले, जब पार्टी सांसद संजय राउत ने कहा कि पार्टी में कुछ लोगों को ज़रूरत से ज़्यादा दिया गया। उनके ये बयान यूबीटी सेना छोडऩे और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली विरोधी सेना में शामिल होने वाले छह सांसदों के कुछ दिनों बाद आए हैं। राउत ने कहा कि हमें व्यक्ति के चरित्र को पहचानने की ज़रूरत है। उन्होंने पार्टी के भीतर आत्म-मंथन करने की बात कही।
उनकी ये बातें मंगलवार को शिव सेना के सुनील शिंदे की कही बातों से मिलती-जुलती थीं, जब पूर्व विधायक सचिन अहीर शिंदे के नेतृत्व वाली सेना में शामिल हुए थे। सुनील शिंदे ने भी पार्टी के भीतर आत्म-मंथन की मांग की है, हालांकि उन्हें अहिर के पार्टी छोडऩे के बावजूद वर्ली सीट पर शिव सेना की जीत की उम्मीद है। शिंदे ने कहा, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को आत्म-मंथन करना चाहिए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कैसे उन्होंने 14 में वर्ली में सचिन अहिर को हराया था और 19 में आदित्य ठाकरे ने यह सीट जीती थी। सुनील शिंदे के बयान के एक दिन बाद, संजय राउत ने भी इसी तरह आत्म-मंथन की अपील की है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी में कुछ लोगों को खास तवज्जो दिए जाने को लेकर शिवसेना के वफादार नेताओं में नाराजगी हो सकती है। पिछले कुछ हफ्तों में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना में एक बड़ा संकट सामने आया है, क्योंकि छह सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले खेमे में चले गए हैं।
सभी फायदा उठाने वाले लोग पार्टी छोड़कर चले गए
राउत ने बुधवार को कहा, हमें अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में आत्म-मंथन करने की ज़रूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में कुछ लोगों को सब कुछ मिला और वे सभी फ़ायदा उठाने वाले लोग पार्टी छोड़कर चले गए। राउत ने एकनाथ शिंदे पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि उनका राजनीतिक करियर उद्धव सेना के कंधों पर बना है, और अब वे और उनके बेटे श्रीकांत शिंदे उन्हें सिखा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे को हर पद, हर शक्ति न दी होती तो वे कहाँ होते? वे आज जो कुछ भी हैं, पार्टी में नेतृत्व से उन्हें जो कुछ भी मिला है, उसी की वजह से हैं।



