चैतर वसावा के समर्थन में उमड़ा जनसैलाब, 2027 में BJP को मिलेगा जवाब!

डेडियापाड़ा में चैतर वसावा के समर्थन में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग जुटे... सभा के दौरान नेताओं ने जनता को संबोधित किया...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के आदिवासी क्षेत्र डेडियापाड़ा में एक बड़ी घटना हुई है.. आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा के समर्थन में आदिवासी समाज की एक विशाल सामाजिक जन-समर्थन रैली आयोजित की गई.. हजारों की संख्या में आदिवासी भाई-बहन इस रैली में इकट्ठा हुए.. लोग चैतर वसावा के नाम के नारे लगा रहे थे.. और उन्होंने कहा कि चैतर वसावा आदिवासी अधिकारों के सच्चे लड़ाके हैं.. भाजपा ने उन्हें झूठे मामले में फंसाया है.. लेकिन आदिवासी समाज अब चुप नहीं रहेगा.. 2027 के चुनाव में भाजपा को करारा जवाब मिलेगा..

डेडियापाड़ा का यह जनसैलाब देखकर लग रहा था कि पूरा इलाका आदिवासी एकता से गूंज उठा है.. दूर-दूर से लोग ट्रैक्टर, बस, बाइक और पैदल चलकर पहुंचे.. महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी शामिल थे.. उन्होंने पारंपरिक वेशभूषा पहनी थी.. हाथों में झंडे, बैनर और पोस्टर थे, जिन पर चैतर वसावा की तस्वीर और आदिवासी एकता जिंदाबाद.. चैतर वसावा हमारे नेता जैसे नारे लिखे थे.. मंच पर आदिवासी नेता भाषण दे रहे थे.. वे बता रहे थे कि चैतर वसावा ने पिछले कई सालों से आदिवासी समाज के लिए क्या-क्या काम किए हैं..

चैतर वसावा AAP के लोकप्रिय चेहरों में से एक हैं.. वे आदिवासी इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, बिजली और जमीन के अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहे हैं.. आदिवासी लोग उन्हें अपना नेता मानते हैं.. लेकिन कुछ समय पहले भाजपा सरकार ने उन पर एक झूठा केस दर्ज कर दिया.. आदिवासी समाज इसे साजिश मानता है.. उनका कहना है कि चैतर वसावा को इसलिए फंसाया गया.. क्योंकि वे आदिवासियों के हक की आवाज उठाते हैं.. और भाजपा की गलत नीतियों का विरोध करते हैं.. इस झूठे मामले ने पूरे आदिवासी समाज में गुस्सा भर दिया है..

रैली में लोगों ने बताया कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास के नाम पर सिर्फ वादे किए जाते हैं.. जंगलों में रहने वाले आदिवासी आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं.. स्कूल नहीं हैं, अस्पताल दूर हैं और सड़कें खराब हैं.. चैतर वसावा जैसे नेता इन समस्याओं को उठाते हैं.. इसलिए उन्हें दबाया जा रहा है.. लेकिन आज का यह जनसैलाब दिखाता है कि आदिवासी अब जाग चुके हैं.. वे एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे..

चैतर वसावा गुजरात के आदिवासी क्षेत्र से आते हैं.. वे AAP में शामिल होकर राजनीति में सक्रिय हुए.. विधायक बनने के बाद उन्होंने अपने क्षेत्र में कई मुद्दों पर काम शुरू किया.. आदिवासी किसानों की जमीन बचाने की लड़ाई, जंगल के अधिकारों का मुद्दा, शिक्षा के लिए स्कूलों की मांग.. और स्वास्थ्य केंद्र खोलने की कोशिश.. ये सभी उनके एजेंडे में रहे..

आदिवासी समाज मुख्य रूप से खेती, मजदूरी.. और जंगल से मिलने वाले उत्पादों पर निर्भर रहता है.. लेकिन विकास के नाम पर कंपनियां जंगल काट रही हैं.. और आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल किया जा रहा है.. चैतर वसावा ने ऐसे मामलों में आवाज उठाई.. और उन्होंने कहा कि आदिवासियों का हक उनकी जमीन, जंगल और पानी पर है.. वे पेसा कानून और अन्य आदिवासी अधिकार कानूनों को लागू करने की मांग करते रहे.. रैली में एक बुजुर्ग आदिवासी नेता ने कहा कि चैतर भाई ने हमारे बच्चों के लिए स्कूल की मांग की.. महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग की.. वे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते हैं.. इसलिए भाजपा उन्हें पसंद नहीं करती.. झूठा केस लगाकर उन्हें रोकना चाहती है.. लेकिन हम सब उनके साथ हैं..

डेडियापाड़ा का मैदान लोगों से भरा हुआ था.. सुबह से ही लोग पहुंचने लगे थे.. धूप में भीड़ लगातार बढ़ती गई.. मंच पर आदिवासी नृत्य और गीत प्रस्तुत किए गए.. पारंपरिक ढोल-नगाड़े बज रहे थे.. बच्चे भी नारे लगा रहे थे.. महिलाएं आदिवासी माता जिंदाबाद के नारे लगा रही थीं.. वक्ताओं ने एक-एक करके भाषण दिए.. उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास नहीं हो रहा है.. सड़क, बिजली और पानी की समस्या अब भी बनी हुई है.. आंगनवाड़ी केंद्रों में अच्छा खाना नहीं मिलता.. स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं.. जंगलों में आदिवासियों को उनके अधिकार नहीं मिल रहे हैं..

रैली में युवाओं की बड़ी संख्या थी.. उनका कहना था कि 2027 के विधानसभा चुनाव में आदिवासी वोट भाजपा को सबक सिखाएगा.. आदिवासी गुजरात की आबादी का बड़ा हिस्सा हैं.. कई विधानसभा सीटें आदिवासी बहुल हैं.. भाजपा इन क्षेत्रों में सरकार बनाती रही है.. लेकिन विकास के दावों के बावजूद आदिवासी महसूस करते हैं कि उनकी उपेक्षा की जा रही है..

 

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