राम मंदिर मामले पर मचा बवाल, संजय राउत ने बोला बड़ा हमला, अब कौन देगा जवाब?

राम मंदिर मामले पर सियासी घमासान तेज हो गया है। अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे में कथित चोरी या गड़बड़ी के आरोपों ने पूरे देश में बड़ी राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जो कभी नहीं हुआ वो अब भाजपा के राज में रहा है। जिस मंदिर में लोग चढ़ावा चढ़ाते हैं उसी मंदिर के अंदर कुछ ऐसे भी लोग हैं जो मुँह में राम नाम का जाप करते हैं लेकिन अंदर ही अंदर चढ़ावा लेकर चंपत हो जाते हैं।

लेकिन अफ़सोस की बात तो ये है कि जिस राम मंदिर के नाम पर भाजपा ने वोट मांगे या यूँ कह लें कि जिस मुद्दे पर भाजपा की राजनीतिक दुकान चल रही है उसी मंदिर से चढ़ावा चोरी होना भाजपा के लिए चुल्लू भर पानी में डूब मरने जैसा है।

राम मंदिर मामले पर सियासी घमासान तेज हो गया है। अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे में कथित चोरी या गड़बड़ी के आरोपों ने पूरे देश में बड़ी राजनीतिक बहस छेड़ दी है। यह मामला जून में खूब चर्चा में आया। विपक्षी पार्टियां भाजपा और योगी सरकार पर हमला बोल रही हैं, जबकि सत्ताधारी पक्ष इसे छोटी घटना बताकर जांच का हवाला दे रहा है।

मंदिर में भक्त सोना, चांदी, नकद रुपये, गहने और अन्य चीजें चढ़ाते हैं। ये पैसा मंदिर की देखभाल, गरीबों की मदद और अन्य कामों में लगना चाहिए। लेकिन आरोप है कि करोड़ों रुपये गायब हो गए। कुछ पूर्व कर्मचारियों के बयानों में कमीशनखोरी, गिनती में गड़बड़ी और पैसों की अनियमितता की बात कही गई।

उत्तर प्रदेश सरकार ने इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT बना दी। कई लोगों की गिरफ्तारी हुई और मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कुछ अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया। ट्रस्ट ने कुछ बदलाव भी किए हैं। चढ़ावा चोरी विवाद के बीच चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफे भी हुए जिसके बाद इस मामले ने और सियासी तूल पकड़ लिया। नेताओं की लगातार प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।

इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत, एनसीपी (SP) नेता रोहित पवार और कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने इस मामले को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं.इन नेताओं ने पूरे राम मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ ही मामला दर्ज करने की मांग कर डाली है. इस मामले में बीजेपी और आरएसएस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि लोगों ने आस्था से दान दिया, पर उनके साथ गलत किया गया है. शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा, “राम मंदिर से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में इस्तीफा लिया गया है. इसमें आश्चर्य की बात क्या है? सबसे पहले, राम मंदिर में जो लूट हुई है उसका हिसाब कौन देगा?

अगर कोई गरीब 50 रुपए की चोरी करता है तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है. अगर 10 लाख रुपए का मामला सामने आता है, तो ED दखल देती है.” उन्होंने आगे कहा, “यहां बीजेपी के लोगों ने और BJP द्वारा बनाए गए राम मंदिर ट्रस्ट ने, 550 करोड़ का घपला किया है. यह मामला एक साल से चल रहा है. बाद में, भगवान राम के गहनों और माता सीता के आभूषणों की चोरी के आरोप हो गए. लगभग 2 हजार करोड़ का ये घोटाला हुआ है. पूरे ट्रस्ट के खिलाफ FIR दर्ज होनी चाहिए.”

वहीं इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता और करजत-जामखेड़ विधायक रोहित पवार ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले पर कहा कि जमीन को लेकर भी भ्रष्टाचार हुआ था. रोहित ने कहा, “जब मंदिर बनाया जा रहा था, तब वहां की जमीन को लेकर भी बहुत बड़ा भ्रष्टाचार किया गया था. जो जमीन 2 करोड़ रुपये में अभी खरीदी गई थी उसे कुछ ही मिनट बाद मंदिर ट्रस्ट को 18 करोड़ में बेचा गया. इसी के साथ वहां जो भी खर्चा किया गया, वो 40 प्रतिशत अधिक था.”

उन्होंने आगे कहा, “लोगों ने अच्छी भावना के साथ पैसा दिया था, उसमें अगर भ्रष्टाचार हो रहा है तो ये गलत है. इसके बाद चढ़ावे में भी भ्रष्टाचार हुआ. भ्रष्टाचार होने के समय जो लोग वहां अधिकारिक पदों पर बैठे थे, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन CID, ED या CBI जैसी संस्थाएं तो कार्रवाई नहीं करेंगी इसलिए यहां पर न्यायिक जांच होनी चाहिए.”

इसी कड़ी में कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार किए जाने पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा, “चंपत राय बंसल और अनिल मिश्रा का इस्तीफा हो जाता है, उन्हें क्लीन चिट दे दी गई, जिसकी घोषणा ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि कर रहे हैं. जो खुद मानते हैं कि वो स्वयं कुछ नहीं करते थे.

प्रभु राम के मंदिर के प्रति इन लोगों की क्या गंभीरता थी इस बात से पता चलता था.” उन्होंने आगे कहा, “सबसे बड़ी बात यह है कि RSS की इसमें पूरी-पूरी भूमिका है. चंपत राय या अनिल मिश्रा को किस आधार पर क्लीन चिट दी गई है? बड़ी बात ये है कि कृष्ण मोहन, जिन्हें अभी महासचिव बनाया गया है, उनकी खुद की भूमिका भी संदिग्ध है.

हालांकि चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है. इसके साथ ही उनका श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के साथ भी अब किसी तरह का संबंध नहीं रहा हैं. मंगलवार को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने साफ कर दिया कि चंपत राय और अनिल मिश्रा को सिर्फ उनके दायित्वों से ही नहीं बल्कि ट्रस्ट की सदस्यता से भी हटा दिया गया है.

गोविंद देव गिरि के इस बयान के बाद उन तमाम अटकलों पर विराम लग गया है, जिसमें ये दावा किया जा रहा था कि चंपत राय और अनिल मिश्रा को केवल उनके पदों से मुक्त किया गया है लेकिन, वो अब भी ट्रस्ट के सदस्य बने हुए हैं. ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने कहा कि उनके इस्तीफे के बाद अब उनका श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट से भी कोई संबंध नहीं है. उनकी सदस्यता भी खत्म हो गई है.

वहीं बीते सोमवार को अयोध्या राम मंदिर परिसर में चढ़ावा चोरी मामले को लेकर ट्रस्ट की एक अहम बैठक बुलाई गई थी, जिसमें चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों को मंजूर कर लिया गया. इसके साथ ही मंदिर के वित्तीय लेन देने और बीते वर्ष 2025-26 की ऑडिट रिपोर्ट को लेकर भी चर्चा की गई और कई अहम फैसले लिए गए. इस मामले में कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि की जिम्मेदारियों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे थे लेकिन, गोविंद गिरि ने तमाम आरोपों से ख़ुद को अलग कर लिया.

वहीं बात की जाए अगर जांच की तो SIT को आरोपियों की निशानदेही पर फर्जी रसीद बुक बरामद हुई है. आरोपियों ने इस फर्जी चंदे की रसीद बुक के जरिए वसूली की बात भी कबूल कर ली है. दरअसल, जानकारों की मानें तो पुलिस जांच में आरोपियों ने इस बात को कबूला है कि वो न केवल चंदा चोरी करते थे बल्कि फर्जी रसीद काट कर चंदा देने वालों से पैसे भी ऐंठ लेते थे.

बताया जा रहा है कि आरोपियों के पास से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पुरानी फर्जी रसीद बुक भी मिली है. सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत में टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, अनुकल्प मिश्रा और तमाम गिरफ्तार आरोपी से जब कोई मंदिर में दान देने की इच्छा जताता तो ये लोग रिसीविंग के तौर पर ये फर्जी रसीद दे देते थे ताकि किसी को शक ना हो।

रसीद पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का लोगो बनवाया गया था. ये रसीद हूबहू बिल्कुल असली रसीद की तरह ही दिखती थी. अब नई व्यवस्था के तहत रसीद ऑनलाइन मिलती है. इसलिए इन लोगों ने इन रसीदों का प्रयोग करना बंद कर दिया था. राम मंदिर में कागजी रसीद व्यवस्था खत्म होने के बाद दान देने वाले सीधा राम मंदिर के बैंक खाते में पैसा भेजते थे या फिर मंदिर में आकर दान काउंटर से स्लिप लेते थे.

वहीं इन सब आरोपों के बीच आप मुखिया अरविंद केजरीवाल ने दावा किया है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में असली चोर कोई और हैं. एसआईटी केवल लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए बनाई गई है. अरविंद केजरीवाल का कहना है कि सारे देश में किसी से पूछ लो, सबको दिख रहा है कि मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है. खैर इस मामले को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर है। आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है।

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