सरकारी निर्देशों की अनदेखी पड़ी भारी, समय पर भंडारण न होने से बारिश में भीगा गेहूं
मिर्जापुर जिले के लालगंज क्षेत्र स्थित थरपरसिया गेहूं खरीद केंद्र पर सैकड़ों बोरी गेहूं बारिश में भीगकर खराब होने का मामला प्रकाश में आया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद में सरकारी गेहूं खरीद व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई है। एक ओर प्रदेश सरकार गरीबों तक खाद्यान्न पहुंचाने और किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदने के दावे कर रही है,
वहीं दूसरी ओर मिर्जापुर जिले के लालगंज क्षेत्र स्थित थरपरसिया गेहूं खरीद केंद्र पर सैकड़ों बोरी गेहूं बारिश में भीगकर खराब होने का मामला प्रकाश में आया है। इस घटना ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई), राज्य भंडारागार निगम तथा परिवहन व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, संबंधित खरीद केंद्र पर 28 जून 2026 को गेहूं की टीडी (ट्रांजिट डिलीवरी) काट दी गई थी, लेकिन निर्धारित समय के भीतर उसका उठान नहीं हो सका। आरोप है कि परिवहन ठेकेदार की लापरवाही तथा भंडारण की समुचित व्यवस्था न होने के कारण गेहूं खुले में पड़ा रहा। इसी दौरान हुई बारिश में सैकड़ों बोरी गेहूं पूरी तरह भीग गई, जिससे उसके खराब होने की आशंका बढ़ गई है।
295 कुंतल गेहूं प्रभावित, 75 बोरी वापस लौटाई गई
सूत्रों के मुताबिक, खरीद केंद्र से लगभग 295 कुंतल गेहूं की टीडी काटी गई थी। हालांकि समय पर परिवहन न होने के कारण स्थिति बिगड़ती चली गई। बताया जा रहा है कि खराब स्थिति को देखते हुए 75 बोरी गेहूं वापस कर दी गई, जबकि शेष गेहूं भी बारिश के पानी में भीगने से प्रभावित हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते गेहूं को सुरक्षित गोदामों में पहुंचा दिया जाता तो इतनी बड़ी मात्रा में अन्न की बर्बादी नहीं होती।
गरीबों के अन्न की बर्बादी पर लोगों में आक्रोश
बारिश में भीगकर सड़ रहे गेहूं की तस्वीरें सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि जहां एक ओर गरीब परिवारों को राशन के लिए संघर्ष करना पड़ता है, वहीं सरकारी लापरवाही के कारण हजारों लोगों का पेट भरने वाला अनाज खुले आसमान के नीचे बर्बाद हो रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकारी मशीनरी की उदासीनता के कारण न केवल किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है, बल्कि सरकारी धन का भी नुकसान हो रहा है।
केन्द्र प्रभारी ने अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
बताया जा रहा है कि यह गेहूं खरीद केंद्र थरपरसिया, लालगंज का है, जिसकी केन्द्र प्रभारी आकांक्षा शुक्ला हैं।
चर्चा है कि केन्द्र प्रभारियों में भी इस मामले को लेकर नाराजगी है। उनका आरोप है कि भारतीय खाद्य निगम एवं राज्य भंडारागार निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की उदासीनता के कारण समय पर उठान नहीं हो पाया। यदि समय पर परिवहन और भंडारण की व्यवस्था की जाती तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
पहले से थे सुरक्षित भंडारण के निर्देश
जानकारी के अनुसार, मानसून शुरू होने से पहले शासन स्तर से स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि खरीद केंद्रों से खरीदे गए गेहूं को खुले में न रखा जाए तथा उसे सुरक्षित गोदामों में संरक्षित किया जाए, ताकि बारिश से नुकसान न हो। इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
यही कारण है कि बारिश शुरू होते ही बड़ी मात्रा में गेहूं भीग गया और अब उसके खराब होने की आशंका जताई जा रही है।
जिलाधिकारी के निर्देशों की भी अनदेखी का आरोप
मामले में यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि जिलाधिकारी सहित अन्य उच्च अधिकारियों के निर्देशों को भी गंभीरता से नहीं लिया गया। यदि समय रहते जिम्मेदार विभाग सक्रिय हो जाते तो इस नुकसान से बचा जा सकता था।
इस घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस नुकसान की जिम्मेदारी कौन तय करेगा और सरकारी अन्न की बर्बादी की भरपाई कैसे होगी।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों, किसानों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि लापरवाही साबित होती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सबसे बड़ा सवाल
समय पर गेहूं का उठान क्यों नहीं किया गया?परिवहन ठेकेदार की जिम्मेदारी तय होगी या नहीं?बारिश से खराब हुए गेहूं की भरपाई कौन करेगा?सरकारी अन्न की बर्बादी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
फिलहाल यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर इस गंभीर लापरवाही के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाता है और गरीबों के अन्न की बर्बादी पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
रिपोर्ट – संतोष देव गिरि,मिर्जापुर



