कर्नाटक में भर्ती घोटाले पर बड़ा एक्शन, KPSC अध्यक्ष सस्पेंड

कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. सहूकर को उनकी दो बेटियों की कथित अवैध भर्ती के आरोपों के चलते निलंबित कर दिया है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. सहूकर को उनकी दो बेटियों की कथित अवैध भर्ती के आरोपों के चलते निलंबित कर दिया है.

राज्यपाल ने मामले की जांच संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट से कराने की सिफारिश राष्ट्रपति को भेजी है. जांच पूरी होने तक आयोग के वरिष्ठ सदस्य अध्यक्ष की जिम्मेदारियां संभालेंगे.

कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सोमवार (13 जुलाई) को कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. सहूकर को गंभीर निलंबित कर दिया. सहूकर पर अपनी दो बेटियों की अवैध रूप से इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन ऑफिसर के पद पर अवैध त भर्ती कराने का आरोप है. मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है.

राज्यपाल ने इस मामले को संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत जांच के लिए राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट भेजने की सिफारिश भी की है. राज्यपाल सचिवालय की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट से जांच कराना जरूरी है.

राज्यपाल ने निर्देश दिया कि अगला आदेश आने तक आयोग का वरिष्ठतम सदस्य KPSC अध्यक्ष के कार्यों का निर्वहन करेगा. उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए निलंबन आवश्यक था.
राष्ट्रपति से की सिफारिश

आदेश में कहा गया कि निष्पक्ष और बिना दबाव की जांच सुनिश्चित करने के लिए सहूकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है. आदेश में कहा गया है कि राज्यपाल ने भारत के राष्ट्रपति से सिफारिश की है कि वो कर्नाटक के लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. सहूकर के खिलाफ लगे आरोपों की आवश्यक जांच के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट को संदर्भ भेजा जाए.

क्या हा आरोप

दरअसल राज्यपाल सचिवालय को शिकायतें मिली थीं कि सहूकर लोक सेवा आयोग (KPSC) के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. सहूकर ने अपनी दो बेटियों को इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन ऑफिसर के पद पर अवैध रूप से चयनित कराने में मदद की.

आदेश के मुताबिक सहूकर ने उस समय खुद को भर्ती प्रक्रिया से अलग नहीं किया, जब उनकी दोनों बेटियां KPSC की भर्ती प्रक्रिया में शामिल थीं. उन्होंने न तो हितों के टकराव की घोषणा की और न ही भर्ती प्रक्रिया से दूरी बनाई, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं.

बेटी ने छिपाई सच्चाई

आरोप है कि सहूकर की एक बेटी ने परिवार की सालाना आय 40,000 रुपए बताकर आय और जाति प्रमाण पत्र बनवाया. इसके आधार पर उसने अन्य पिछड़ा वर्ग ( OBC) के तहत आरक्षण एवं क्रीमी लेयर छूट का लाभ लिया. जबकि उसके पिता KPSC अध्यक्ष के पद पर थे. आरोप है कि इस तथ्य को जानबूझकर छिपाया गया.

2002 के सरकारी आदेश का जिक्र

आदेश में 30 मार्च 2002 के सरकारी आदेश का भी जिक्र है जिसके अनुसार कर्नाटक में लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के बच्चे पिछड़ा वर्ग कोटे में आरक्षण का दावा नहीं कर सकते. आरोप है कि सहूकर और उनकी बेटी ने अनुचित लाभ लेने के लिए इस जानकारी को छिपाया.

वरिष्ठ सदस्य को सौंपी गई जिम्मेदारी

राज्यपाल सचिवालय ने कहा कि अध्यक्ष द्वारा प्रस्तुत आय और संपत्ति का ब्योरा एंव अन्य रिकॉर्ड कदाचार की ओर इशारा करते हैं. इसलिए संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत कार्रवाई जरूरी है.

सचिवालय ने कहा कि निष्पक्ष, स्वतंत्र और बिना किसी प्रभाव के जांच सुनिश्चित करने के लिए सहूकार को राष्ट्रपति के अगले आदेश तक निलंबित कर दिया गया है. इस दौरान आयोग के सबसे वरिष्ठ सदस्य को KPSC अध्यक्ष की जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं.

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