धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर इसुदान गढ़वी का बड़ा बयान, कहा- यह देश के युवाओं की जीत है
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आम आदमी पार्टी के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने बड़ा बयान दिया... उन्होंने कहा कि यह देश के युवाओं के संघर्ष...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः देशभर में युवाओं की जीत का जश्न मनाया जा रहा है.. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आम आदमी पार्टी गुजरात के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है.. और उन्होंने कहा कि इस इस्तीफे ने यह साबित कर दिया है कि यदि देश के युवा किसी मुद्दे पर एकजुट होकर ठान लें.. तो वे अपनी बात मनवाकर रहते हैं.. गढ़वी ने इस आंदोलन की सफलता का श्रेय पूरे देश के लाखों युवाओं को दिया.. और कहा कि यह किसी एक व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि पूरे युवा वर्ग की जीत है..
इसुदान गढ़वी ने अपने बयान में कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से एक बात बिल्कुल साफ हो गई है.. अगर युवा किसी मुद्दे पर एकजुट हो जाएं.. तो कोई भी सरकार उनकी आवाज को लंबे समय तक अनसुना नहीं कर सकती.. यह जीत सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे युवा समाज की है.. उन्होंने आगे कहा कि इस आंदोलन को मजबूत बनाने में सोनम वांगचुक, अभिजीत दीपक, कॉकरोच जनता पार्टी.. और देशभर के लाखों आम लोगों ने कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया.. उन्होंने यह भी दावा किया कि नेताओं और अधिकारियों के बच्चों ने भी इस आंदोलन में भाग लिया.. जिससे यह अभियान और अधिक व्यापक एवं प्रभावशाली बन गया..
गढ़वी ने अपने संबोधन में भारत के स्वतंत्रता संग्राम का भी उल्लेख किया.. उन्होंने कहा कि जिस देश के युवाओं ने अंग्रेजों जैसी शक्तिशाली हुकूमत को झुकने पर मजबूर कर दिया था.. उसके सामने कोई भी अहंकारी सरकार अधिक समय तक टिक नहीं सकती.. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार युवाओं की आवाज नहीं सुनेगी.. तो युवा फिर से सड़कों पर उतरेंगे.. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गुजरात में उनके 200 से 300 साथियों को नजरबंद किया गया है.. लेकिन सच्चाई की आवाज को कभी दबाया नहीं जा सकता..
आपको बता दें कि यह बयान ऐसे समय में सामने आया है.. जब पूरे देश में कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में युवा आंदोलन चल रहा था.. NEET परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद छात्रों में भारी आक्रोश देखने को मिला.. देशभर के छात्रों ने दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई शहरों में प्रदर्शन शुरू किए.. सोनम वांगचुक जैसे जाने-माने शिक्षाविद.. और अभिजीत दीपक जैसे युवा नेताओं ने इस आंदोलन का समर्थन किया.. धीरे-धीरे यह आंदोलन केवल परीक्षा में कथित गड़बड़ियों तक सीमित नहीं रहा.. बल्कि बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था की कमियों.. और सरकार की नीतियों को लेकर भी व्यापक विरोध का रूप ले लिया..
धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया.. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि छात्रों के लगातार दबाव.. और जनभावनाओं का सम्मान करते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया है.. इसे मोदी सरकार के कार्यकाल की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना माना जा रहा है.. युवाओं ने इस फैसले को अपनी बड़ी जीत बताया.. दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, बेंगलुरु समेत देश के कई शहरों में छात्रों.. और युवाओं ने खुशी जताई और इसे लोकतांत्रिक संघर्ष की सफलता बताया..
इसुदान गढ़वी ने गुजरात की स्थिति पर भी विस्तार से बात की.. उन्होंने कहा कि गुजरात के युवाओं ने भी इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.. राज्य के कई शहरों में प्रदर्शन आयोजित किए गए.. लेकिन पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं और युवाओं को नजरबंद कर दिया.. गढ़वी ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है.. उन्होंने कहा कि सरकार चाहे जितनी कोशिश कर ले, सच्चाई को कभी कैद नहीं किया जा सकता.. और जनता की आवाज को दबाने की हर कोशिश अंततः विफल होती है..
आम आदमी पार्टी लंबे समय से शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाती रही है.. गढ़वी ने कहा कि पार्टी हमेशा युवाओं के साथ खड़ी रही है.. उन्होंने दावा किया कि दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकारों ने शिक्षा क्षेत्र को प्राथमिकता दी है.. और सरकारी स्कूलों में बड़े स्तर पर सुधार किए हैं.. उन्होंने कहा कि गुजरात में भी पार्टी युवाओं की समस्याओं को लेकर लगातार संघर्ष कर रही है.. और आगे भी करती रहेगी.. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी एकजुटता बनाए रखें.. क्योंकि यह लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है.. उनके अनुसार एक बड़ी जीत जरूर मिली है.. लेकिन शिक्षा सुधार और रोजगार जैसे मुद्दों पर अभी भी लंबा संघर्ष बाकी है..
कॉकरोच जनता पार्टी की चर्चा करते हुए गढ़वी ने कहा कि इसकी शुरुआत अभिजीत दीपक ने की थी.. शुरुआत में इसे एक मजाक के रूप में देखा गया.. लेकिन धीरे-धीरे युवाओं ने इसे अपनी पहचान बना लिया.. कॉकरोच शब्द को आंदोलन का प्रतीक बना दिया गया.. उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया.. और भूख हड़ताल जैसी गतिविधियों के माध्यम से युवाओं की मांगों को मजबूती दी.. आंदोलन की प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा.. परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करना शामिल था..



