सुप्रीम कोर्ट ने 15 राज्यों के मुख्य सचिवों से मांगा जवाब, जानिए क्यों
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद सीवर और सेप्टिक टैंक में मौतें नहीं रुक रही हैं. तीन सालों यानी 2023 से 2025 तक सीवर और सेप्टिक टैंक में उतरने पर 165 मौतें दर्ज की गईं हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद सीवर और सेप्टिक टैंक में मौतें नहीं रुक रही हैं. तीन सालों यानी 2023 से 2025 तक सीवर और सेप्टिक टैंक में उतरने पर 165 मौतें दर्ज की गईं हैं.इसी पर सुप्रीम कोर्ट ने 15 राज्यों के मुख्य सचिवों को अवमानना का नोटिस भेजा है.
सुप्रीम कोर्ट ने देश में मैनुअल स्कैवेंजिंग यानी हाथ से सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई पर एक बार फिर सख्ती दिखाई है. कोर्ट ने इस मसले पर यूपी समेत देश के 15 राज्यों के मुख्य सचिवों को अवमानना का नोटिस भेजा है. कोर्ट ने इन राज्यों के मुख्य सचिव से पूछा है कि अदालत के स्पष्ट आदेशों के बावजूद सीवर और सेप्टिक टैंक में लोगों की मौतें रुकने का नाम क्यों नहीं ले रही हैं. अदालत ने यह भी कहा कि अब इस मसले पर जिम्मेदारी तय करने का समय आ गया है.
20 अक्टूबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, सभी राज्यों और स्थानीय निकायों को निर्देश दिया था कि मैनुअल स्कैवेंजिंग यानी हाथ से सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई पूरी तरह खत्म की जाए. ऐसी व्यवस्था की जाए कि किसी व्यक्ति को सीवर या सेप्टिक टैंक में उतरने की जरूरत न पड़े. अदालत ने सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में मशीनों के इस्तेमाल, सुरक्षा उपकरणों, मुआवजे और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए थे.
तीन सालों में सीवर और सेप्टिक टैंक में कितनी मौतें हुईं?
अदालत के सामने यह आकंड़े भी सामने आए कि साल 2024 और 2025 के दौरान करीब 100 लोगों की मौत सीवर और सेप्टिक टैंक में सफाई के लिए उतरने के दौरान हो गई है. केंद्र सरकार की तरफ से संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक भी 15 राज्यों में सेप्टिक और सीवर टैंक में उतरने के चलते 2023 से 2025 के बीच 165 मौतें दर्ज की गईं.इनमें 2023 में 65, 2024 में 54 और 2025 में 46 मौतें शामिल हैं.
किन राज्यों के मुख्य सचिवों को अवमानना का नोटिस भेजा गया?
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इन मौतों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अदालत के आदेश के बावजूद भी मौतें जारी हैं.इसलिए संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव बताएं कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, गोवा, बिहार और झारखंड के मुख्य सचिवों को कंटेप्ट ऑफ कोर्ट यानी अवमानना का नोटिस भेजा है.
अवमानना क्या होती है?
कोर्ट की अवमानना यानी कंटेप्ट ऑफ कोर्ट का मतलत किसी अदालत के आदेश, निर्णय या न्यायिक प्रक्रिया का जानबूझकर उल्लंघन करना या फिर ऐसा काम करना जिससे न्याय प्रशासन में बाधा पहुंचे. सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामलों में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 129 के जरिए अवमानना की कार्रवाई कर सकता है. वहीं, अनुच्छेद 215 के जरिए हाईकोर्ट को भी यही शक्ति मिली हुई है. कंटेप्ट ऑफ कोर्ट एक्ट 1971 के जरिए अवमानना के मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया और उसपर सजा तय होती है.Contempt of Courts Act, 1971 की धारा 12 के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम 6 महीने की साधारण कैद और 2,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा दी जा सकती है.
कितने प्रकार की होती है अवमानना?
सिविल कंटेम्प्टः इस तरह के मामले में कोई व्यक्ति या सरकारी अधिकारी अदालत के आदेश, निर्देश या रिट का जानबुझकर पालन नहीं करता तो इसे सिविल कंटेम्प्ट करार दिया जाता है.
क्रिमिनल कंटेम्प्ट : जब कोई व्यक्ति अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाए, न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डाले, या न्याय के प्रशासन को प्रभावित करने की कोशिश करे तो यह आपराधिक अवमानना मानी जाती है.
अदालत अवमानना नोटिस कब जारी करती है?
अदालत के आदेश का जानबूझकर पालन न करने पर
सरकारी अधिकारियों द्वारा आदेश लागू न करने पर
अदालत के निर्देशों की लगातार अनदेखी करने पर
न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने पर
अदालत या न्यायाधीशों के खिलाफ ऐसा आचरण जिससे न्याय व्यवस्था प्रभावित हो
किसी फैसले के अनुपालन में अनावश्यक देरी करने पर
राज्यों के मुख्य सचिवों को ही कोर्ट ने नोटिस क्यों भेजा?
सेप्टिक और सेप्टिक टैंक में उतरने पर हुई मौतें और इस पर कोर्ट के आदेशों का पालन न करने के लिए राज्य सरकार के मुख्य सचिव को ही इसलिए नोटिस भेजा गया क्योंकि वह प्रदेश का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी होता है. जब अदालत किसी राज्य सरकार को आदेश देती है और उसका पालन नहीं होता, तो जवाबदेही तय करने के लिए अक्सर मुख्य सचिव को ही तलब किया जाता है. अदालत की तरफ से ऐसा करने के पीछे का उद्देश्य दंड देना नहीं बल्कि सरकारी मशीनरी और न्यायालय के आदेशों का पालन करवाना है.
अदालती आदेश और सरकार के आश्वासन के बाद भी नहीं रुक रही ये मौतें
लंबे समय से सीवर और सेप्टिक टैंक में उतरने और सफाई करने के दौरान मौतें सामने आती रही हैं. अदालती आदेशों और सरकार के आश्वासन के बावजूद इस तरह के मामलों में कमी नहीं आई है. अदालत ने तो यहां तक कह दिया है कि सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई इंसानों के जरिए नहीं मशीनों के जरिए हो. फिर लगातार सीवर और सेप्टिक टैंक में मौतों के आंकड़े सामने आ रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सीवर या सेप्टिक टैंक में किसी भी व्यक्ति की मौत स्वीकार नहीं की जा सकती है. यही वजह है अदालत ने यह तय करेगी किआदेशों की अवहेलना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाए या नहीं.



