आइशी घोष केस पर बढ़ा सियासी बवाल, CPI कार्यालय में तलाशी से संसद में हंगामा
दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को CPI(M) ऑफिस में तलाशी की. वह SFI नेता आइशी घोष को ढूंढ रही है. आइशी जंतर मंतर पर हुए छात्र आंदोलन में शामिल रही हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को CPI(M) ऑफिस में तलाशी की. वह SFI नेता आइशी घोष को ढूंढ रही है. आइशी जंतर मंतर पर हुए छात्र आंदोलन में शामिल रही हैं. दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा बुधवार को राज्यसभा में उठा. CPI (M) सांसद जॉन ब्रिटास ने इसे उठाया, जिसके बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ.
राज्यसभा में बुधवार को दिल्ली स्थित CPI(M) दफ्तर में पुलिस की तलाशी पर हंगामा हो गया. CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने इस मुद्दे को उठाया. विपक्ष के अन्य सांसद भी उनके समर्थन में खड़े हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. ब्रिटास ने कहा कि दिल्ली पुलिस के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी ब्रिटास का साथ दिया तो केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जवाब देते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस कानून के तहत अपना काम कर रही है, इसपर हंगामा ठीक नहीं है.
क्या है पूरा मामला?
CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास के मुताबिक, मंगलवार को दिल्ली पुलिस के अधिकारी CPI(M) के दफ्तर में घुस गए, जो एक राष्ट्रीय पार्टी है. वे SFI नेता और JNU छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष को हिरासत में लेना चाहते थे. घोष जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक हैं.घोष का कहना है कि उनके खिलाफ एक वारंट है, जो 2021 के एक मामले से जुड़ा है, लेकिन मैंने पुलिस अधिकारी से बात की और उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ वारंट जारी किया गया था. वारंट की जानकारी फोन पर दी गई थी. आप फोन पर वारंट की जानकारी नहीं दे सकते. इसे व्यक्तिगत रूप से सौंपा जाना चाहिए. अब, उनका मकसद उन सभी छात्रों को संदेश देना है जिन्होंने आंदोलन में हिस्सा लिया था.
कोर्ट के आदेश पर तलाशी
बता दें कि साल 2021 के एक मामले में आइशी घोष के खिलाफ अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किया. घोष अदालत में सुनवाई के लिए पेश नहीं हुईं, इसलिए वारंट जारी हुआ है. दिल्ली पुलिस कोर्ट के आदेश की तामील करते हुए घोष को तलाश कर रही है. इसी के तहत वो CPI(M) मुख्यालय एकेजी भवन पहुंची थी, लेकिन वो यहां नहीं मिलीं.
राज्यसभा में क्या-क्या हुआ?
बुधवार को जब राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई तब विपक्षी सांसद दिल्ली में आइशी घोष को गिरफ्तार करने की कोशिश का विरोध कर रहे थे. साथ ही उन्होंने नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग भी दोहराई. सूचीबद्ध दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के तुरंत बाद सांसद जॉन ब्रिटास ने आइशी घोष का मुद्दा उठाया.
उन्होंने कहा कि सादे कपड़ों में दिल्ली पुलिस की एक टीम 2021 में जेएनयू में हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में आइशी घोष को गिरफ्तार करने के लिए पार्टी कार्यालय में दाखिल हुई. ब्रिटास ने पुलिस कार्रवाई को हाल के छात्र प्रदर्शनों से जोड़ते हुए कहा कि आइशी घोष की एकमात्र गलती यह थी कि उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में हिस्सा लिया था. उनकी बात का समर्थन करते हुए नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि लोकतंत्र खतरे में है. कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल किया कि एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के कार्यालय में पुलिस के प्रवेश का आदेश किसने दिया.
आरोपों का जवाब देते हुए सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा कि यह एक सामान्य कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला है. उन्होंने कहा कि पुलिस को कानून के अनुसार कार्रवाई करनी होती है और उसने उसी के अनुरूप कार्रवाई की है. केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि कोई भी छात्र यदि सक्रिय राजनीति या आंदोलनों में शामिल होता है तो उसे इस तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.
नड्डा ने कहा कि वह भी छात्र आंदोलन से जुड़े रहे हैं और उन्हें भी ऐसी कार्रवाई का सामना करना पड़ा था. उन्होंने कहा, आपातकाल के दौरान मुझे कक्षा से भी गिरफ्तार किया गया था. उन्होंने बताया कि ऐसा दो बार हुआ था. CPI (M) और अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने इस घटना पर विरोध जताया.



