3000 उपद्रवियों की FIR वापसी अटकी, सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहां उलझा मामला?

NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के बाद छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि आपराधिक रिकॉर्ड वाले या हिंसा में शामिल लोगों को राहत नहीं मिलेगी.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के बाद छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि आपराधिक रिकॉर्ड वाले या हिंसा में शामिल लोगों को राहत नहीं मिलेगी. ऐसे में 100 से ज्यादा मामलों में छात्रों और उपद्रवियों की पहचान के बाद ही केस वापस लेने और रिहाई की प्रक्रिया पूरी होगी.

NEET पेपर लीक और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र सड़कों पर उतरे थे. इस दौरान पुलिस ने कई राज्यों में सख्त कार्रवाई की, लाठीचार्ज हुए और सैकड़ों छात्रों को हिरासत में लिया गया. सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों को राहत देने के निर्देश दिए हैं, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि आपराधिक रिकॉर्ड वाले या हिंसा में शामिल लोगों को इसका फायदा नहीं मिलेगा. देशभर में हुए छात्र आंदोलन के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि छात्रों पर दर्ज FIR कब वापस होंगी.

पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन की आड़ में हजारों संदिग्ध और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग भी शामिल थे. ऐसे में छात्रों और उपद्रवियों की पहचान पूरी होने तक 100 से ज्यादा FIR तुरंत वापस होता मुश्किल दिख रहा है. आखिर किस राज्य में कितने केस दर्ज हुए, कितने वापस लिए जा रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश में पेच कहां फंसा है, आइए समझते हैं…

1. दिल्ली में 20 केस और 2800 संदिग्ध
जंतर-मंतर और दिल्ली के अन्य इलाकों में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कुल 20 केस (FIR) दर्ज किए थे. पुलिस की जांच में सामने आया कि आंदोलन की आड़ में हिंसा और उपद्रव फैलाने वाले लगभग 2800 ऐसे लोग थे, जिनका पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड था या वे आदतन अपराधी थे. इस तरह से देशभर में 3000 से ज्यादा उपद्रवियों की पहचान की गई है.

2. बिहार में 64 FIR वापसी की प्रक्रिया शुरू
बिहार में NEET पेपर लीक के खिलाफ और CJP के समर्थन में 25 जुलाई को बड़ा प्रदर्शन हुआ था. पुलिस कार्रवाई में 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था. इनमें से करीब 405 लोग अभी भी ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं. राज्य सरकार ने प्रदर्शन से जुड़े 64 FIR वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. पटना जिले में छात्रों के प्रदर्शन से जुड़ी 27 FIR वापस ली जा रही है. पटना के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर राजेश कुमार के मुताबिक, कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बुधवार से छात्रों की रिहाई शुरू होने की उम्मीद है.

3. महाराष्ट्र में सभी FIR वापस लेने का निर्देश
महाराष्ट्र में 23 और 24 जुलाई को मुंबई, पुणे और नागपुर समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए थे. इसके अलावा 18 जुलाई से छात्रों के समर्थन में राज्यभर में प्रदर्शन जारी थे. अकेले मुंबई में 18 जुलाई से 23 जुलाई के बीच 13 FIR दर्ज किए गए थे, जिनमें 400 लोगों के नाम शामिल हैं. मुख्यमंत्री और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गृह विभाग को प्रदर्शन से जुड़े सभी FIR वापस लेने के निर्देश दिए हैं. ज्यादातर मामले गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने से जुड़े हैं. हालांकि सरकार ने अभी कुल FIR की संख्या सार्वजनिक नहीं की है.

4. असम में 5 केस वापस
असम सरकार ने छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया है. गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अजय तिवारी के अनुसार, प्रदर्शन से जुड़े 5 केस वापस लिए जाएंगे और गिरफ्तार किए गए 13 लोगों को रिहा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

5. पश्चिम बंगाल में 16 गिरफ्तार, सभी को जमानत
कोलकाता में प्रदर्शन के दौरान झड़प हुई थी. कोलकाता पुलिस ने 7 FIR दर्ज की थी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गिरफ्तार किए गए 16 लोगों को मंगलवार को जमानत मिल गई. राज्य सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी.

6. राजस्थान में कोई FIR नहीं, UP-MP में राहत
राजस्थान में छात्र नेताओं और सरकारी प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के बाद सरकार ने साफ किया है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं की गई है और न ही आगे कोई दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. वहीं, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में NEET पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान कुछ छात्रों को एहतियातन हिरासत में लिया गया था. सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद इन राज्यों की पुलिस ने भी बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज शिकायतों को वापस लेने या रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

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