युवाओं पर लाठीचार्ज से सियासत गरम, अमित चावड़ा ने मांगा अमित शाह का इस्तीफा
दिल्ली में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है... गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर सियासत तेज हो गई है.. छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार को घेर रहा है.. इसी बीच गुजरात कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने भारतीय जनता पार्टी.. और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है.. उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र पर धब्बा बताते हुए गृह मंत्री अमित शाह से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की है.. इतना ही नहीं, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी देश के युवाओं से माफी मांगने की मांग की है..
गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने अपने बयान में कहा कि देश के भविष्य का प्रतिनिधित्व करने वाले छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पर पुलिस द्वारा किया गया.. कथित लाठीचार्ज लोकतंत्र पर एक गहरा धब्बा है.. उनका कहना है कि लोकतंत्र में नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार संविधान देता है.. यदि छात्र अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे थे.. तो सरकार को उनके साथ संवाद करना चाहिए था.. न कि उनके खिलाफ बल प्रयोग करना चाहिए था..
अमित चावड़ा ने कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत संवाद, सहिष्णुता.. और असहमति का सम्मान करने में होती है.. उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी सरकार की पहली प्रतिक्रिया बातचीत के बजाय पुलिस कार्रवाई हो.. तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत माना जाएगा.. उनके अनुसार सरकार का दायित्व जनता की आवाज़ सुनना है, न कि उसे दबाना..
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार असहमति की आवाजों को दबाने का प्रयास कर रही है.. जो भी व्यक्ति या संगठन सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है.. या लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करता है.. उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है.. अमित चावड़ा ने कहा कि यह प्रवृत्ति लोकतंत्र की भावना के अनुरूप नहीं है.. और इससे लोगों का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास कमजोर हो सकता है..
आपको बता दें कि कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्र केवल किसी एक विश्वविद्यालय या संस्थान का हिस्सा नहीं होते.. बल्कि वे पूरे देश के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं.. आज के छात्र ही कल देश के वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि बनेंगे..
ऐसे में यदि उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जाता है.. तो यह केवल कुछ छात्रों का मामला नहीं रह जाता.. बल्कि यह देश के भविष्य से जुड़ा विषय बन जाता है.. और उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की समस्याओं को समझने और उनका समाधान निकालने की दिशा में गंभीर प्रयास करने चाहिए..
यदि युवा अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखना चाहते हैं.. तो उन्हें अवसर मिलना चाहिए.. लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन कोई अपराध नहीं होता.. बल्कि यह संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का हिस्सा है..



