लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे पर नहीं सरकार की साख पर है ये दरार
पंखों से नहीं... कार्रवाई से सूखेगा दाग

- 4PM के सवालों की लगी कुछ ऐसी चोट कि सिस्टम को कार्रवाई करनी पड़ी
- परियोजना निदेशक बर्खास्त, निर्माण एजेंसी को कारण बताओ नोटिस आईआईटी करेगी जांच
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत यही है कि सवाल पूछे जाएं। और 4PM ने भी यही किया जिस समय कानपुर एक्सप्रेसवे की परते उखडऩे की खबरें सामने आना शुरू हुई मेन स्ट्रीम मीडिया में पिन ड्राप सायलेंस था।
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के वीडियो शेयर करने और 4PM पर छपने के बाद मामले ने रफ्तार पकड़ी। हालात यह है कि आज दूसरे दिन भी वीडियो ट्रेंड कर रहा है और लोग चर्चा।
पंखों ने बढ़ा दी राजनीतिक गर्मी
मरम्मत के दौरान सामने आए एक वीडियो ने पूरे विवाद को राष्ट्रीय बहस में बदल दिया। वीडियो में मरम्मत किए गए हिस्से को जल्दी उपयोग में लाने के लिए बड़े बड़े पंखे और ब्लोअर लगाए गए दिखायी दिए। आम लोगों के बीच यह तस्वीर सरकार के विकास दावों पर व्यंग्य का प्रतीक बन गयी। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वीडियो साझा करते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नई सड़क को कुछ ही दिनों में इस तरह की मरम्मत की जरूरत पड़ रही है तो उसकी गुणवत्ता पर जनता भरोसा कैसे करे। उनके बयान के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया से निकलकर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया।
उदघाटन के 22वें दिन ही टैं बोल गया एक्सप्रेसवे
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की कहानी अब सिर्फ एक सड़क की कहानी नहीं रह गयी है। यह जवाबदेही गुणवत्ता और सार्वजनिक धन से बनने वाली परियोजनाओं की विश्वसनीयता का सवाल बन चुकी है। उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क के कई हिस्सों में आई दरारों धंसाव और मरम्मत की तस्वीरों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। मरम्मत वाले हिस्सों को जल्दी उपयोग में लाने के लिए लगाए गए बड़े बड़े पंखों और ब्लोअर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तो बहस और तेज हो गई। विपक्ष ने सवाल उठाए यात्रियों ने चिंता जतायी और आखिरकार राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को भी कार्रवाई करनी पड़ी। अब घटनाक्रम तेजी से बदला है। परियोजना निदेशक को हटाया गया है स्वतंत्र इंजीनियरिंग टीम के प्रमुख के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है निर्माण एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है टोल वसूली रोकी गयी है और मामले की स्वतंत्र जांच के लिए आईआईटी खडग़पुर की विशेषज्ञ टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह सब दिखाता है कि यदि सार्वजनिक परियोजनाओं में खामियों के संकेत मिलते हैं तो उन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं होता।
आईआईटी खडग़पुर करेगी स्वतंत्र जांच
इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी स्वतंत्र तकनीकी जांच है। एनएचएआई ने घोषणा की है कि आईआईटी खडग़पुर की विशेषज्ञ टीम पूरे निर्माण की जांच करेगी। जांच का उद्देश्य केवल यह पता लगाना नहीं होगा कि सड़क क्यों धंसी बल्कि यह भी कि क्या निर्माण सामग्री डिजाइन जल निकासी व्यवस्था मिट्टी की स्थिति या गुणवत्ता नियंत्रण में कहीं कोई चूक हुई। विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी बड़े बुनियादी ढांचे की परियोजना में स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट भविष्य की परियोजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण सीख देता है।
बड़ा सवाल जांच कितनी पारदर्शी होगी?
इस पूरे प्रकरण ने एक पुराने सवाल को फिर सामने ला खड़ा किया है क्या हमारी बड़ी परियोजनाओं की असली परीक्षा उद्घाटन के दिन होती है या पहली बारिश के बाद? करोड़ों अरबों रुपये की लागत से बनने वाली सड़कें केवल दूरी कम करने का माध्यम नहीं होतीं वह सरकार और नागरिक के बीच भरोसे का पुल भी होती हैं। यदि उस भरोसे में दरार पड़ती है तो उसका असर सिर्फ यातायात पर नहीं शासन की विश्वसनीयता पर भी पड़ता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि एनएचएआई ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि मरम्मत का खर्च ठेकेदार वहन करेगा और अनुबंध के अनुसार अगले 15 वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी उसी की होगी। अब सबसे बड़ी परीक्षा यह होगी कि जांच कितनी पारदर्शी होती है जिम्मेदारी कितनी स्पष्ट तय होती है और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए कौनसे संस्थागत सुधार किए जाते हैं। सड़क की दरारें भरी जा सकती हैं लेकिन जनता के मन में उठे सवाल तभी भरेंगे जब जवाब भी उतने ही मजबूत होंगे जितने उद्घाटन के समय किए गए दावे थे।
ज्यादा दिन नहीं टिक सका उत्सव का माहौल
13 जुलाई को जब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हुआ तब इसे उत्तर प्रदेश के विकास की नई रफ्तार बताया गया। मंच पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद थे। दावा किया गया कि यह एक्सप्रेसवे यात्रा को तेज सुरक्षित और आधुनिक बनाएगा। लेकिन उत्सव का माहौल ज्यादा दिन नहीं टिक सका। 26 जुलाई को उन्नाव के कुरारी गांव के पास पहली बार सड़क के एक हिस्से में डामर उखडऩे और किनारे धंसने की खबर सामने आई। इसके बाद अलग अलग स्थानों पर इसी तरह की खामियां सामने आने लगीं। देखते ही देखते आठ स्थानों पर मरम्मत करनी पड़ी। यात्रियों के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाए गए और कई जगहों पर गति सीमित करनी पड़ी।




